बस अड्डा पर हुई पुलिस से हाई प्रोफाइल नूराकुश्ती में मुकदमा दर्ज,भाई-बहन गिरफ्तार

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फर्रुखाबाद:(जेएनआई ब्यूरो) थाना कादरी गेट पुलिस एक बार फिर अपनी कार्यप्रणाली को लेकर सवालों के घेरे में आ गई है। मामला बुधवार दोपहर करीब दो बजे थाना कादरी गेट की रोडवेज चौकी का है, जहां लगभग डेढ़ घंटे तक हाईप्रोफाइल ड्रामा चलता रहा। हंगामे के बाद पुलिस ने एक युवक, एक युवती और युवती की मां को कड़ी मशक्कत के बाद चौकी से उठाकर थाना कादरी गेट ले जाकर बैठा लिया।
विवाद के दौरान कार्रवायी के दौरान महिला थानाध्यक्ष रक्षा सिंह और कादरी गेट थाना प्रभारी कपिल चौधरी भी मौके पर मौजूद रहे। वहीं देर रात पुलिस ने आरक्षी यशवीर सिंह पुत्र बलबीर सिंह की तहरीर पर थाना मऊ दरवाजा क्षेत्र के शीशमहल मस्जिद के पास स्थित मोहल्ला बीबीगंज निवासी प्रशांत पुत्र विनोद कुमार एवं आकांक्षा पुत्री विनोद कुमार (भाई-बहन) के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
मामले में सबसे बड़ा विरोधाभास यह सामने आया है कि जिस युवती को बुधवार को पुलिस अधिकारियों द्वारा नाबालिग बताकर कार्रवाई से खुद को अलग कर लिया गया था, उसी युवती के संबंध में दर्ज मुकदमे में यह दर्शाया गया है कि वह पूरे घटनाक्रम के दौरान मौके से चली गई थी।
मुकदमे के अनुसार, आरक्षी यशवीर सिंह ने बताया कि वह सिपाही अनुज कुमार और जय किशोर के साथ रोडवेज चौकी पर तैनात थे। इसी दौरान उन्हें मौखिक सूचना मिली कि चौकी के पीछे शिव मंदिर के पास एक लड़का और लड़की आपत्तिजनक स्थिति में बैठे हैं। पुलिस के पहुंचने पर लड़की मौके से चली गई, जबकि युवक ने अपनी बहन आकांक्षा को मौके पर बुला लिया। आरोप है कि दोनों ने पुलिस से अभद्रता की, जान से मारने की धमकी दी, वर्दी फाड़ दी और सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न की।
हालांकि, प्रत्यक्षदर्शियों और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि जिस युवती को मौके से चला गया बताया जा रहा है, उसे उसकी मां के साथ पुलिस सरकारी वाहन में बैठाकर ले जाया जा रहा है। वीडियो के सामने आने के बाद पुलिस की कार्रवाही और दर्ज मुकदमे की कहानी में छेद ही छेद नजर आ रहें हैं|
बुधवार की इस घटना को लेकर पूरे शहर में चर्चाओं का बाजार गर्म है। आम जनता से लेकर पुलिस महकमे तक इस मामले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। लोगों का कहना है कि महिला सशक्तिकरण की बात करने वाली सरकार में, और जिले में महिला पुलिस अधीक्षक व सीओ सिटी के रहते हुए भी महिलाओं के साथ इस प्रकार का व्यवहार चिंता का विषय है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिस युवती को गुरुवार को निर्दोष बताकर छोड़ दिया गया, उसी को बुधवार को नाबालिग बताकर उसके कार्रवाई की गई। अब देखना यह है कि वायरल वीडियो और विरोधाभासी बयानों के सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है और सच्चाई कब तक सामने आती है। थानध्यक्ष नें बताया की मामले में मुकदमा पुलिस की तरफ से दर्ज किया गया हैं |

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