फेसबुक बना विधान सभा चुनाव के दावेदारों का अखाड़ा

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फर्रुखाबाद: देश में कम्पूटर क्रान्ति क्या आयी कि लोगों के उठने-बैठने, बोलने-चालने, शादी-विवाह सब के रंग रूप व नखरे ही बदल गए| इंटरनेट का फीवर बच्चों और युवाओं को तो छोडियें अब कम समय रखने वाले नेता लोगों को भी अपनी चपेट में ले लिया| जैसी ही आप कम्पूटर चालू कर सोशल साईट फेसबुक खोलेंगें वैसे ही आपके चहेते नेता आपकी कम्पूटर स्क्रीन पर अपनी पूरी काबलियत के साथ आपके सम्मुख हाजिर|

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विधान सभा चुनाव के नजदीक आते ही चौराहों, तिराहों, भीडभाड वाले इलाके बड़े-बड़े बैनरों व पोस्टरों से पटते चले जा रहे हैं| कुछ समय पहले की बात करें तो राजनीति प्रचार रिक्शे पर एक स्पीकर लादकर व माईक से चिल्लाकर किया जाता था| तत्पश्चात बैनरों, होर्डिंग का दौर चला, अखबार में बड़े-बड़े विज्ञापनों के जरिये आपको नेता जी के सच्चे, कर्मठ व ईमानदार होने का दावा करते नजर आ जाते हैं|

बताते चले कि आज के विधान सभा चुनाव में जन सम्पर्क में आन लाईन प्रचार भी जुड़ गया है| सभी पार्टियों के नेता अपनी-अपनी तस्वीरों के साथ जनता से बात करने को तैयार एक ई-मेल आईडी बनाकर सोशल साईटों पर अपनी जानकारी व पार्टी की स्लोगन डालकर तैयार हो गए|

मजे की बात तो यह है कि कंप्यूटर को हौवा व माउस को चूहा बताने वाले कई नेता भी इस इलेक्ट्रानिक प्रचार में दांव आजमा रहे हैं। उनमें से कई के लिये तो अंग्रेजी यदि काला अक्षर भैंस बराबन नहीं तो कम से कम अपना “यूजर नेम” व “पासवर्ड” तक याद रखना मुश्किल होगा। इन्होंने अपनी वेबसाइट मैनेजमेंट के लिये बाकायदा पेड समर्थक लगा रखे हैं। हो सकता है कि इन पेजों पर उपलब्ध जानकारी की जानकारी भी इन नेताओं को समय से न हो पाती हो, या आप इन पेजों पर जो कमेंट लिखें वह उनतक कभी पहुंच ही न सकें।

चलो कुछ भी हो इन नेताओं से अब इंटरनेट भी अछूता नहीं रहा, सभी नेता फ्रेंड( वोट ) निवेदन भेजने में लगे हैं| कहीं यह सोशल साईट राजनीति साईट न बन जाए| हाल ही में अन्ना के आंदोलन में सोशल नेटवर्किंग साइट पर चले प्रचार युद्ध से भी राजनैतिक प्रचार की इस विधा को बढ़ावा मिला है।

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