फर्रुखाबाद:(जेएनआई ब्यूरो) जनपद को वर्ष 2027 तक बाल श्रम मुक्त बनाने के लक्ष्य को लेकर प्रशासन ने अभियान को गति दे दी है। अब तक विकास खंड बढ़पुर की पांच और शमशाबाद की तीन ग्राम पंचायतों समेत कुल आठ ग्राम पंचायतों को बाल श्रम मुक्त घोषित किए जाने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। विशेष अभियान के दौरान 167 बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कराया गया है। सहायक श्रमायुक्त ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देश पर मुख्य विकास अधिकारी के नेतृत्व में विभिन्न विभागों की संयुक्त टीमों का गठन किया गया। इन टीमों ने संबंधित ग्राम पंचायतों में ग्राम बाल कल्याण एवं संरक्षण समितियों की बैठकें आयोजित कर प्रस्ताव पारित कराए, जिन्हें ब्लॉक एवं जिला स्तर पर अनुमोदन प्रदान किया गया। अगले एक वर्ष तक इन ग्राम पंचायतों की नियमित निगरानी भी की जाएगी। बाल श्रम उन्मूलन अभियान में शिक्षा, पंचायत राज, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास समेत विभिन्न विभाग सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। अन्य ग्राम पंचायतों को भी चरणबद्ध तरीके से बाल श्रम मुक्त बनाने की प्रक्रिया जारी है। जनजागरूकता बढ़ाने के लिए श्रम विभाग द्वारा लगातार कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। नगर पालिका परिषद फर्रुखाबाद के वार्ड सदस्यों के साथ गोष्ठी आयोजित की गई, जबकि उद्योग व्यापार मंडल के सहयोग से व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर बाल श्रम न कराने के संबंध में जागरूकता अभियान चलाया गया। भोजपुर विधायक नागेन्द्र राठौर ने लोगों से बच्चों को शिक्षा से जोड़ने और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने में सहयोग की अपील की। वहीं ईंट निर्माता समिति के अध्यक्ष कृष्ण दत्त द्विवेदी ने सभी भट्ठा संचालकों से 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों से कार्य न लेने का आह्वान किया। अभियान के प्रभावी संचालन के लिए जिला समन्वयक जीशान अंसारी को जनपद में तैनात किया गया है, जो श्रम विभाग को तकनीकी एवं मैदानी सहयोग प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि कहीं भी बाल श्रमिक दिखाई देने पर इसकी सूचना टोल फ्री नंबर 1098, 1800-102-7222 अथवा PENCIL पोर्टल के माध्यम से दें। अंतर्राष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर 12 जून को लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित होगा। इसमें बाल श्रम मुक्त घोषित क्षेत्रों के ग्राम प्रधानों को सम्मानित किया जाएगा। फर्रुखाबाद से विभिन्न विभागों और सामाजिक संगठनों के लगभग 50 प्रतिनिधि कार्यक्रम में शामिल होंगे। सहायक श्रमायुक्त के अनुसार बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम के तहत 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को किसी भी प्रतिष्ठान में रोजगार देना पूरी तरह प्रतिबंधित है। उल्लंघन करने वाले सेवायोजकों के विरुद्ध आर्थिक दंड और कारावास का प्रावधान है। वहीं 14 से 18 वर्ष आयु वर्ग के किशोरों को खतरनाक उद्योगों में नियोजित करना भी कानूनन अपराध है। उन्होंने बताया कि 1 अप्रैल 2024 से 31 मई 2026 तक चलाए गए विशेष निरीक्षण अभियानों में 142 निरीक्षण किए गए, जिनमें 167 बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कराया गया। संबंधित प्रतिष्ठान स्वामियों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई भी की गई। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि फर्रुखाबाद को पूर्णतः बाल श्रम मुक्त बनाना सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए जनपद स्तरीय टास्क फोर्स का पुनर्गठन किया गया है, जो नियमित निरीक्षण कर दोषी प्रतिष्ठानों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करेगी। साथ ही नागरिकों, व्यापारियों, उद्योगों और ईंट भट्ठा संचालकों से अभियान में सहयोग की अपील की गई है, ताकि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित बचपन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा सके।
फर्रुखाबाद को बाल श्रम मुक्त बनाने की मुहिम तेज, 167 बच्चों को कराया गया मुक्त
[adrotate banner="3"]
[adrotate banner="2"]



