फर्रुखाबाद के 300 वर्ष: रामलीला मण्डल ने जमायी थी दूसरे जिलों में भी धाक

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FARRUKHABAD : जनपद में रामलीला का भी महत्वपूर्ण इतिहास रहा है। जिला हो या दूसरे जनपद, पुराने समय में रामलीला मण्डल ने अन्य जनपदों में भी खूद धाक जमायी थी। कलाकार बाहर जाकर रंगमंच पर अपनी कला का प्रदर्शन कर लोगों को भावुक और भक्तिमय कर देते थे। जानें क्या है जनपद में रामलीला मण्डल का इतिहास-Ramlila

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फर्रुखाबाद में रामलीला का प्रचार पण्डित कृपाशंकर निवासी खड़िहाई ने शुरू किया। यह रामलीला मण्डल इस कदर प्रचारित हुआ कि मथुरा, गोला, शाहजहांपुर, अयोध्या आदि अनेक स्थानों पर रामलीला खेलने के लिए गया। या यूं कहिए कि रामलीला मण्डल के काफी दीवाने लोग खुद उन्हें अपने यहां कार्यक्रम करने के लिए आमंत्रित किया करते थे। कृपाशंकर मिश्रा के साथ पण्डित श्यामाचरन, पण्डित करुणाशंकर, पण्डित दयाशंकर, पण्डित रामशरन, सियाराम, जगदीश, पण्डित बृजमोहन आदि नाम शामिल हैं।

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जिसमें लाला पुत्तूलाल (रावण) पण्डित रामस्वरूप, पण्डित स्वरूप नारायण रामायणी, माधौराम नारी अभिनय व नृत्य, पण्डित श्यामसुन्दर हरमोनियम, पुत्तूलाल तबला, विशेश्वर हरमोनियम व ढोलक आदि पर अपना जलवा बिखेरते थे। पण्डित चन्द्रशेखर शुक्ल ने 1971 में आदर्श रामलीला मण्डल बनाया और मानस मंच पर रामलीला शुरू की। वह परम्परा अभी तक चली आ रही है। पण्डित चन्द्रशेखर के साथ पण्डित रामशरण, पण्डित श्याम चरण व पण्डित रामकृपाल, प्रभाकांत गेहरी, गेंदनलाल शुक्ला, जगदीश, विशेश्वर दयाल, प्रेम पण्डा, दिनेश दीक्षित, संतोष, रमेश दीक्षित, पुरुषोत्तम शर्मा आदि रहते थे। शहर में आदर्श रामलीला मण्डल की रामबारात आदि भी अपनी अलग पहचान बनाये है। खुद पण्डित चन्द्रशेखर, रावण, दशरथ, केवट, कुम्भकरण के अभिनय में महारत हासिल किये थे। पण्डित कृपाशंकर कीर्तन के लिए प्रसिद्ध थे।

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