पढ़ाना लिखाना दूर की बात, बच्चो का खाना तक चोरी कर रहे मास्टर साहब

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PS kankauli 1फर्रुखाबाद: जनता और सरकार चुनावो में व्यस्त रहे, मंचो पर विकास के दावे होते रहे और स्कूलों में गुरु जी सरकार से वेतन लेकर बच्चो को पढ़ाना लिखाना तो दूर बच्चो का मुफ्त बाटने वाला खाना और राशन चुराते रहे| वर्तमान समय में परीक्षाओ का दौर चल रहा है| बच्चे तो स्कूल में आ नहीं रहे मगर मास्टर साहब बड़ी ही बेशर्मी से मिड डे मील के रिकॉर्ड में रोज बच्चो की उपस्थिति दिखा कर सरकारी राशन चोरी करने में लगे है| बच्चे पढ़ाई की बेरुखी के कारण स्कूल में जाने की जगह चोर पुलिस खेल रहे है और जाँच करने वाले कर्मचारियों और अधिकारियो को उनका हिस्सा देकर गुरूजी चोर चोर का खेल रहे है| सिपाही उनके साथ ही मिला हुआ है|

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MDM registerदोपहर 11 बजे कमालगंज ब्लाक के प्राथमिक पाठशाला कनकौली| दो शिक्षा मित्र अनुराधा और धीरेन्द्र बिना बच्चो वाले स्कूल में टाइम पास कर रहे थे| हेड साहब अश्वनी सिंह स्कूल से नदारद| शनिवार से सोमवार तक उनके स्कूल में दर्शन नहीं हुए था| हाजिरी रजिस्टर में आखिरी बार शुक्रवार को दस्खत बने हुए थे| बच्चो की उपस्थिति रजिस्टर पर हाजिरी नहीं भरी गयी थी| परीक्षा का समय चल चल रहा है मगर स्कूल में बच्चे नहीं आये तो परीक्षा कौन दे| हाँ मिड डे मील के रजिस्टर पर खाना चुराने के लिए 30 बच्चे अंकित थे| कुल 60 बच्चो के स्कूल में बच्चो विहीन स्कूल पूरी प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था में चोरो की फ़ौज होने का दावा कर रही है|

PS KANKAULIस्कूल के हेड मास्टर अवनीश सिंह बीआरसी कमालगंज में पाये गए| पूछ दिया कि स्कूल गए थे तो झूठ ऐसे बोला जैसे घर में पैसा चोरी करते समय पकडे जाने पर बच्चे बोलते है| स्कूल से ही आ रहा हूँ| 30 बच्चे आये थे| ये अवनीश सिंह का पक्ष था| अब देखिये स्कूल के बच्चो की मुहजवानी हकीकत|

रिपोर्टर गाव में उन बच्चो से मिला जिनका नाम स्कूल में लिखा है| गौतम, देवसिंघ, ख़ुशी, लक्ष्मी, काब्य, भूपेंद्र गाव में पेड़ की छाव में खेलते मिल गए| बच्चो से पुछा कि स्कूल क्यों नहीं गए तो जबाब मिला- का करैं जाइ- पढ़ावत तो कोई है नाही| अवनीश सिंह की पोल खोलने के लिए बच्चो के व्यक्तव्य काफी है|
Students
बच्चे अगली कक्षा में पहुंच जायेंगे| इस साल का भी वेतन, वजीफा, ड्रेस, स्कूल मेंटेनेंस और मिड डे मील से काफी फायदा मैट्रो को हुआ है| एक मास्टर साहब तो कई महीने वेतन न मिलने पर प्रसन्न होते है| मिड डे मील के राशन से घर का पूरा खर्च चलता है| एक बढ़पुर ब्लाक के मास्टर साहब तो पोस्ट ऑफिस में 10000/- महीने की आर डी मिड डे मील से चला लेते है| बचपन में एक कहानी पढ़ी थी- अलीबाबा और चालीस चोर| बेसिक शिक्षा में चरितार्थ होते दिखाई पड़ जाती है| मुख्यालय पर बैठा इनका सरदार कार्यवाही करने की जगह सिर्फ अपना हिसाब किताब देखता है| परीक्षा जारी है….वोटो की गिनती तक पूरी हो जाएगी|

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