प्रेक्षक ने की भाड़े की भीड़ और मुफ्त की रोटियों की जांच की तैयारी

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सिलाई मशीनों की खेप पहुंची, वार्ड मेंबरों का रेट 20 हजार खुला:

फर्रुखाबाद: विधान सभा चुनाव में धनबल व बाहुबल के दुरुपयोग की रणभेरी बज चुकी है। धन्ना सेठों ने थैलियों के मुंह खोल दिये हैं। चुनाव प्रचार के दौरान भाड़े की भीड़ मुफ्त के खाने के बाद अब प्रत्याशियों द्वारा लोगों में सिलाई मशीनों के वितरण की भी शिकायतें आने लगी हैं। चुनावी दलालों की मानें तो वार्ड मेंमबरों का रेट फिलहाल 20 हजार खुला है। मात्र 16 लाख रुपये की अधिकतम व्यय सीमा को धता बताकर अब तक चुनाव के मुख्य खिलाड़ी लगभग एक-एक करोड़ के आसपास खर्च कर चुके हैं।

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निर्वाचन आयोग ने यूं तो विधानसभा चुनाव में धनबल के दुरुपयोग को रोकने के लिये काफी कवायद की थी। कालेधन के दुरुपयोग को रोकने के लिये छापामारी व चेकिंग जैसे अभियान चले। इसका कुछ लाभ भी नजर आया परंतु राजनीति के दिग्गजों ने इनसे बचने के रास्ते भी तलाश लिये। महत्वपूर्ण लोगों की गाड़ियों व लाल-बत्ती वाहनों तक का इसके लिये दुरुपयोग किया गया। पैसा पानी की तरह बहना शुरू हो गया है।

 

निर्वाचन आयोग की कोशिशों को धता बता कर प्रत्याशियों ने इससे बचने के रास्ते ढूंड लिये हैं। नगदी पर लगाम लगने लगी तो मतदाताओं में वितरण के लिये फर्जी बिलों से सामान मंगवान की जुगत निकाल ली।  भाड़े की भीड़ व मुफ्त भोजन की शिकायतों के मीडिया में छपने के बाद व्यय प्रेक्षक एयास अहमद एम. ने जाचं की तैयारी कर दी है। इसी के साथ मतदाताओं में नगदी व उपहारों के वितरण का भी सिलसिला शुरू हो गया है। जानकारी के मुताबिक बुधवार रात्रि शहर की एक घनी बस्ती के बीच सिलाई मशीनों की एक खेंप पहुंच गयी है। जिसमें से लगभग एक दर्जन का वितरण भी हो गया है। इसके अतिरिक्त वार्ड व मोहल्ले वार चुनावी दलाल मतदाताओं के वोट डलवान का ठेका लेने में सक्रिय हैं। फिलहाल 20-20 हजार रुपये की पहली किस्त के वितरण की जानकारी आ रही है।

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