प्राथमिक शिक्षा: वार्षिक रिपोर्ट कार्ड तक को तरसते नौनिहाल

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रिपोर्ट कार्ड स्कूल से मिलते ही सबसे पहले बच्चे का घर जाना और पास होने की ख़ुशी वाला कार्ड माँ को देना| फिर माँ का बच्चे के पास होने की खुशी का इजहार करने मोहल्ले में निकल जाना उत्तर प्रदेश के परिषदीय स्कूलों में पढ़ रहे बच्चो के नसीब में नहीं है| क्यूंकि इन बच्चो के लिए परीक्षा फल के कार्ड बनबाने का पैसा तो आता है मगर न जाने कौन और क्यूँ उस गरीब माँ और बच्चे की खुशियों के वो पल भी लूटने में लगा है| ये यकीन करने की बात नहीं कि फर्रुखाबाद में कक्षा 1 से 4 और कक्षा 6 व् 7 के सरकारी स्कूल के बच्चे रिपोर्ट कार्ड तक से वंचित रहेंगे|

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बचपन में जब स्कूल जाया करते थे तब वर्षांत में मिलने वाला रिपोर्ट कार्ड सबसे बड़ा तमगा होता था, उस रिपोर्ट कार्ड में नम्बर कुछ भी हो सहसा उसे कई बार पढ़ लेने की हसरत हर बच्चे की रहती है| कार्ड में नंबर कम क्यूँ आये या फिर इतने कैसे आ गए| कक्षा में किसकी क्या रैंक आई ये बात तो बाप बनने के बाद बच्चो को नसीहत देने के काम आज तक आती है- हम क्लास में फलां रैंक पाते थे|

यूपी में सर्व शिक्षा अभियान की दुर्दशा

उत्तर प्रदेश में सभी को अनिवार्य शिक्षा कानून लागू करना काफी मुश्किल लगता है| बात संसाधनो की कमी की नहीं है, कमी तो संवेदनाओ एवं इच्छाशक्ति की है| जनपद फर्रुखाबाद में करीब 1.5 लाख बच्चो को उनकी परीक्षा फल का रिपोर्ट कार्ड ही नसीब नहीं होता| प्रदेश सरकार के परिषदीय विद्यालयों में बच्चो की जैसी साल भर पढ़ाई होती हुई उस हालात को छुपाने के लिए वर्ष के अंत में नक़ल छाप परीक्षा करा कर फर्जी तरीके से सभी बच्चे अगली कक्षा में पास होकर आ जायेंगे मगर कक्षा 5 और 8 को छोड़कर किसी भी बच्चे को उसका वार्षिक परीक्षाफल का कार्ड भी नहीं मिलेगा|

समन्वयक तो नहीं डकार गए ये मद?

जहाँ केंद्र सरकार सरकार के इन स्कूलों को बेहतर से बेहतर शिक्षा व्यवस्था देने के लिए हर माह अरबो खरबों का खजाना खर्च करती है वहीँ प्रदेश में इस काम की जिम्मेदारी सम्भाले अधिकारी सिर्फ उस पैसे से जेब भरने का काम कर रहे हैं| फर्रुखाबाद में परिषदीय विद्यालयों में लगभग 2 लाख बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं| इनमे से कक्षा 5 में 28048 और कक्षा 8 में कुल 11217 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं| इन बच्चो को वर्षांत में 20 मई को इनके पास फेल का परीक्षा फल दिया जाना है| मगर हालात ये है कि परीक्षा फल का कार्ड केवल 39265 बच्चो को मिलेगा वाकी के बच्चे और उनके माँ बाप इस बात से अनजान रहेंगे कि उनका बच्चा कैसे पास हुआ| या फिर हर माँ बाप को स्कूल में जाकर परीक्षा फल देखना पड़ेगा| उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रो में जहाँ ग्रामीण इलाको में जागरूकता का अभी भी अभाव है वहां अभिभावक इतने जागरूक नहीं कि वे स्कूल में जाकर बच्चो के परीक्षा फल को देखें|

इस मद के खजाने में 15 लाख आया था

ऐसा नहीं कि परीक्षा फल के कार्ड छपवाने के लिए सरकार पैसा नहीं खर्च कर रही| सर्व शिक्षा अभियान के तहत सरकार ने खजाने खोल रखे हैं| फर्रुखाबाद जनपद में लगभग 15 लाख रुपया का बजट इस मद में था| दरअसल में बच्चो की परीक्षा से सम्बन्धित कामो के लिए शोध एवं मूल्याकन मद से पैसा खर्च करने के आदेश है| फर्रुखाबाद जनपद में इस मद में लगभग 15 लाख रुपया भी आया/रहा, फिर आखिर ऐसे कौन से कारण रहे कि 1.5 लाख बच्चे अपने पास होने की ख़ुशी का इजहार तक नहीं कर सकते|

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