प्रदेश में शौचालय प्रयोग के लिए प्रेरित करने को बनेंगे 52 हजार स्वच्छता दूत

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सूबे की हर ग्राम पंचायत में एक स्वच्छता दूत की तैनाती होगी। इनके चयन में महिलाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। ये दूत गांवों में लोगों को शौचालय बनवाने और फिर उसके प्रयोग के लिए प्रेरित करेंगे। प्रदेश में केंद्र सरकार के सहयोग से लागू किए जा रहे निर्मल भारत अभियान कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदेश की सभी 52 हजार ग्राम पंचायतों में एक-एक स्वच्छता दूत नियुक्त करने का फैसला हुआ है।

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सोमवार को केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के पेयजल आपूर्ति विभाग के संयुक्त सचिव (स्वच्छता) जेएस माथुर की उपस्थिति में संपन्न एक उच्चस्तरीय बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगी। इसके अंतर्गत ग्राम पंचायतें स्वच्छता दूत के चयन में महिलाओं को प्राथमिकता देंगी।

निदेशक पंचायतीराज वीपी सिंह ने बताया कि यदि गांव में आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री, आशा बहू और गांव में निवास करने वाली एएनएम उपलब्ध हैं तो उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी।

चयनित स्वच्छता दूत को हर घर के लोगों को शौचालय बनवाने के लिए तैयार करना है। शौचालय बनवाने के बाद वहां उसके प्रयोग के लिए परिवारों को प्रेरित करने का भी काम करेंगे। इसके लिए उसे प्रोत्साहन स्वरूप प्रति शौचालय 75 रुपये मिलेंगे। आमतौर पर एक गांव में 500 से 800 परिवार होते हैं। शत प्रतिशत घरों में शौचालय बनने पर चयनित स्वच्छता दूत 32 हजार रुपये से 60 हजार रुपये तक शौचालय की संख्या के हिसाब से पा सकेंगे।

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