नियमों को धता बताकर एपी के दरोगा को टीएसआई का चार्ज

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Police 6FARRUKHABAD : समाज को नियम कानून का पाठ पढाने वाले पुलिस विभाग में ही विभागीय नियमों की खुले आम अनदेखी का नजारा आम है। पुलिस महानिदेशालय के निर्देशों को धता बताकर टीएसआई की कमाऊ सीट पर नियुक्‍ति के सम्‍बंध में शिकायत की गयी है।

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विदित है कि शहरों में ट्रैफिक व्‍यवस्‍था को एक सतत एंव महत्‍वपूर्ण विषय मानते हुए अपर पुलिस महानिदेशक के स्‍पष्‍ट निर्देश हैं कि जिन जनपदों में टीएसआई के पद पर सीधी नियुक्‍ति नहीं है, वहां पर केवल सिविल पुलिस (सीपी) के 40 वर्ष से कम आयु के किसी ऐसे उपनिरीक्षक की नियुक्‍ति कर दी जाये जो कि व्‍यवहाकुशल, मृदुभाषी व नेतृत्‍व क्षमता रखता हो। महानिदेशक कार्यालय का ट्रैफिक पुलिस की भूमिका कुछ भी हो, परंतु सब जानते हैं कि जनपद में ट्रैफिक व्‍यवस्‍था का मतलब यकजाई के नाम पर डग्‍गामार वाहनों, राज्‍यमार्गों से गुजरने वाले ट्रकों व शहर में चलने वाले टैंपू-टैक्‍सी आदि से लाखों की अवैध वसूली होता है। जाहिर है कि इसके लिये विभाग में ऊंची पहुंच या मोटी बख्‍शीश का खेल जरूरी होता है, और फिर नियम कायदे धरे रह जाते हैं।

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नमूने के तौर पर जनपद में तैनात टीएसआई राम सिंह बघेल को ही ले लें। श्री बघेल सशस्‍त्र पुलिस (एपी) से हैं। उम्र भी 40 से काफी अधिक है। पूर्व में कई प्रकार के आरोपों से घिरे भी रहे हैं, परंतु उनके पास जनपद के टीएसआई का चार्ज है। यह चार्ज उनकों दूसरी बार मिला है।

इस सम्‍बंध में टीएसआई श्री बघेल ने बताया कि उनके पास ट्रैफिक व्‍यवस्‍था की विशेष ट्रेनिंग की है। यह विभागीय कोर्स बाकायदा प्रशिक्षण व कठिन परीक्षा के बाद उपलब्‍ध कराया जाता है। उनहोंने बताया कि उनके विरुद्ध कोई जांच भी लंबित नहीं है। जबकि पूर्व टीएसआई को तत्‍कालीन पुलिस अधीक्षक ने रंगे हाथों पकड़ कर हटाया था।

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