दूसरी शादी भी रास न आयी तो कूद गयी ट्रेन के आगे रुकमा

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फर्रुखाबाद: थाना मऊदरवाजा क्षेत्र के ग्राम रसीदपुर निवासी स्व0 रामप्रकाश जाटव की 25 वर्षीय पुत्री रुकमादेवी ने बुधवार को सुबह छपरा एक्सप्रेस से फर्रुखाबाद रेलवे स्टेशन के पास अपने मासूम बच्ची सहित कटकर जान दे दी।

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कहते हैं समय से पहले और भाग्य से ज्यादा किसी को नहीं मिलता। रामप्रकाश जाटव ने तकरीबन पांच साल पहले अपनी बेटी रुकमा के हाथ पीले कर दिये। विवाह फतेहगढ़ क्षेत्र से पुलमण्डी निवासी जीतू पुत्र रमेश जाटव के साथ हुआ। रुकमा तकरीबन तब 20 वर्ष की थी। जीतू मजदूरी का काम करता था। शादी के कुछ समय के बाद ही रुकमा व जीतू के साथ आपसी विवाद शुरू हो गया। विवाद किस बात को लेकर यह रहस्य या तो जीतू जानता था या रुकमा।

पांच वर्ष जैसे तैसे कटे लेकिन पहाड़ जैसा जीवन एक दूसरे को साथ-साथ काटना मुस्किल हो गया। रुकमा ने इसी दौरान एक बच्ची को जन्म दिया। बच्ची को लेकर रुकमा अपने मायके रसीदपुर आ गयी। जहां रुकमा के पिता रामप्रकाश की मृत्यु कई वर्ष पहले ही हो चुकी थी। भाई यादराम विधवा मां शांतीदेवी के अलावा अपनी पत्नी शोभा के साथ रह रहा था। मामला बिगड़ते देख परिवार वालों ने रुकमा का विवाह रसूलपुर गुरसहायगंज निवासी मजदूर रामस्वरूप जाटव के साथ कर दिया।

दूसरी शादी को अभी मात्र डेढ़ माह ही बीता था कि रुकमा अपने पति रामस्वरूप जाटव के साथ घूमने के लिए तकरीबन तीन दिन पहले आयी थी। आज प्रातः रुकमा फर्रुखाबाद रेलवे स्टेशन पर तकरीबन साढ़े आठ बजे छपरा एक्सप्रेस के सामने अपनी दुधमुही तीन माह की बच्ची को लेकर कूद गयी और मौत को गले लगा लिया। मां बेटी की मौत की खबर जंगल की आग की तरह क्षेत्र में फैल गयी और मौके पर सैकड़ों की तादाद में भीड़ लग गयी। गांव से चंद कदमों की दूरी पर निकली रेलवे लाइन के पास रुकमा व उसकी बच्ची की लाश क्षतविक्षत अवस्था में पड़ी थी जहां परिजनों को सूचना मिली तो मौके पर रुकमा के परिजन पहुंचे। मौके से रुकमा का पति रामस्वरूप जाटव खिसक गया।

मऊदरवाजा थानाध्यक्ष ने मौके पर पहुंचकर घटना का निरीक्षण किया। एसआई गजेन्द्र सिंह ने शव का पंचनामा भरके पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

मानसिक रूप से ठीक नहीं थी रुकमा
मृतक रुकमा के शव पर विलाप कर रही उसकी मां शांतीदेवी ने बताया कि रुकमा बचपन से ही गुस्सैल स्वभाव की थी। शादी होते-होते उसकी मानसिक स्थिति कुछ बिगड़ गयी थी। जिससे अक्सर जरा-जरा सी बात पर वह लड़ाई करने पर आमादा हो जाती थी।

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