योगी सरकार ने डिंपल-शिवपाल-आजम की सुरक्षा घटाई

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने वीआईपी कल्चर को खत्म करने की ओर कदम बढ़ाते हुए पूर्व सरकार के कई मंत्रियों और विपक्षी नेताओं की सिक्योरिटी घटा दी है। जिनकी सिक्योरिटी कवर में कटौती की गई हैं, उनमें समाजवादी पार्टी की कन्नौज से सांसद और पूर्व सीएम अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव, पूर्व कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव, आजम खान, राज्यसभा सदस्य राम गोपाल यादव समेत कई नेता शामिल है। डिंपल, शिवपाल और आजम की ‘जेड’ श्रेणी की सिक्योरिटी को घटाकर ‘वाई’ श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की है। प्रदेश सरकार ने सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव, पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और बीएसपी प्रमुख मायावती की सुरक्षा बरकरार रखी है। वहीं, बीजेपी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य विनय कटियार की सुरक्षा ‘वाई’ श्रेणी से बढ़ाकर ‘जेड’ श्रेणी कर दी गई है।

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योगी सरकार ने सुरक्षा समिति की बैठक के बाद आशू मलिक, राकेश यादव, अभय सिंह और अतुल प्रधान समेत करीब 100 नेताओं की सुरक्षा वापस ले ली है। हाल ही में गृह विभाग की बैठक के बाद पूर्व सरकार में नेताओं और मंत्रियों को दी गई सुरक्षा के संबंध में रिपोर्ट मंगाई। जिसके बाद सुरक्षा घटाने का फैसला लिया गया। वीआईपी कल्चर खत्म करने के तहत सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रमुख सचिव गृह को सिर्फ जरूरत के मुताबिक सुरक्षा देने के निर्देश दिए थे। जिसके बाद सभी वीवीआईपी और वीआईपी को मिली श्रेणीवार सुरक्षा का रिव्यू किया गया। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल बत्ती का कल्चर खत्म करने की वकालत की थी। उसके बाद कई नेताओं ने स्वेच्छा से अपनी-अपनी गाड़ियों से लाल बत्ती उतार ली थी।

कैसे मिलती है सुरक्षा
किसी राजनीतिक या विशिष्ट व्यक्ति को वीआईपी सुरक्षा देने का फैसला खतरे के आकलन के बाद होता है। चार श्रेणियों में सुरक्षा प्रदान की जाती है, जिसे जेड प्लस, जेड, वाई एवं एक्स श्रेणी कहा जाता है। सुरक्षा हासिल करने के लिए सुरक्षा मांगने वाले आवेदक को संभावित खतरे के बारे में बता कर सरकार के समक्ष आवेदन करना होता है। राज्य सरकार व्यक्ति द्वारा बताए खतरे के आकलन पर खुफिया एजेंसियों से रिपोर्ट मांगती है। इसकी पुष्टि होने पर राज्य में गृह सचिव, महानिदेशक और मुख्य सचिव की एक समिति यह तय करती है कि उसे संभावित खतरे के मद्देनजर किस श्रेणी की सुरक्षा दी जाए। ऐसे व्यक्ति का ब्यौरा औपचारिक मंजूरी के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय को भी दिया जाता है।

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