जीवन के अस्तित्व का आधार है पर्यावरण

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डेस्क: मानव प्रकृति का हिस्सा है,प्रकृति व मानव एक दूसरे के पूरक हैं प्रकृति के बिना मानव की परिकल्पना नहीं की जा सकती| प्रकृति दो शब्दों से मिलकर बनी है – प्र और कृति प्र अर्थात प्रकृष्टि (श्रेष्ठ/उत्तम) और कृति का अर्थ है रचना,ईश्वर की श्रेष्ठ रचना अर्थात सृष्टि|

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देश और समाज का विकास समय की मांग है लेकिन विकास की यह सीढ़ी हमें प्रकृति से बिना छेड़छाड़ किए तय करनी होगी,गौरतलब है कि प्रकृति का अस्तित्व बसता है पेड़-पौधे, नदियों, जंगल और पहाड़ों में क्या हमने उन्हें सुरक्षित रखा है? या क्या सुरक्षित रखने की कभी कोशिश की है? नदियों पर बांध, वृक्षों की अवैध कटाई और जंगल एवं पहाड़ों पर गगनचुंबी इमारतें खड़ी कर क्या हम पर्यावरण के साथ खिलवाड़ नहीं कर रहे हैं? बदले में हमें प्रकृति के प्रकोप स्वरूप कभी भूस्खलन, कभी भूकंप और कभी जल प्रलय जैसी विभीषिकाएं झेलनी पड़ती है, जो पल भर में हजारों-लाखों लोगों की जिंदगियां बर्बाद कर देती है, महानगरों में बढ़ते प्रदूषण के कारण हर किसी का सांस लेना दूभर हो गया है.पर्यावरण की स्थिति दिन-ब-दिन बद से बदतर होती जा रही है निरंतर बिगड़ते पर्यावरण पर नियंत्रण रखने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ ने प्रत्येक वर्ष 5 जून को पर्यावरण दिवस मनाने का फैसला किया|

साल 1972 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में विश्व पर्यावरण सम्मेलन का आयोजन किया गया था इस सम्मेलन में लगभग 119 देशों ने हिस्सा लिया था सभी सदस्य देशों ने पृथ्वी के मूल सिद्धांतों को मान्यता देते हुए शपथ पत्र पर हस्ताक्षर किया था इसके पश्चात 5 जून 1974 को पहली बार विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया इसके बाद से ही प्रत्येक वर्ष 5 जून को पर्यावरण दिवस मनाने की परंपरा जारी है भारत में 19 नवंबर 1986 से पर्यावरण संरक्षण अधिनियम लागू हुआ,भारत में भी इस दिवस को पूरे उत्साह के साथ मनाया जाता प्रकृति के बिना मानव जीवन की कल्पना बेमानी है इसलिए हमें पेड़-पौधे, जंगल, नदियों, झीलों जमीन, और पहाड़ों के महत्व को समझना चाहिए हमें ऐसा कोई भी कार्य नहीं करना चाहिए,जिससे प्रकृति के खौफ का सामना करना पड़े पर्यावरण की सुरक्षा के प्रति जन जागरण के उद्देश्य से संयुक्त राष्ट्र ने विश्व पर्यावरण दिवस मनाने का फैसला किया|

इस दिवस विशेष को मनाने के लिए प्रत्येक वर्ष एक थीम का निश्चय किया जाता है इस बार विश्व पर्यावरण दिवस 2023 की थीम ‘Solutions to Plastic Pollution’ है. यह थीम प्लास्टिक प्रदूषण के समाधान पर आधारित है|

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