जिसकी जैसी पसंद,उसकी वैसी पतंग

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फर्रुखाबाद: शहर की छतों पर बसंत पंचमी को लेकर युवा पेंच लड़ाते नजर आ रहे हैं बाजार में जिसकी जैसी पसंद उसकी वैसी पतंग को लेकर दुकानें सजी हुई हैं| बसंत पंचमी का त्यौहार नगर में पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया गया| शहर में पतंगबाजी का अपना ही एक इतिहास रहा है शहर की पतंग है अन्य जनपदों में सप्लाई की जाती थी लेकिन समय के साथ-साथ और इंटरनेट के युवाओं पर हावी होने के चलते अब यह सब धीरे-धीरे नगर से पलायन कर रहा है|
शहर की कागजी पतंग अपने आप में कारीगरी मानी जाती थी तकरीबन 1 सैकड़ा कारीगर पतंग बनाने का कारोबार कर अपना पेट पाल कर पतंगबाजों का शौक पूरा करते थे लेकिन धीरे धीरे यह भी सिमट रहा है| जेएनआई टीम ने बाजार का दौरा किया तो पतंग साज शिवकुमार,जुल्फकार,दीपक कुमार,राहुल,उमेश, पक्का पुल निवासी पतंग विक्रेता शिवम ने बताया कि सरकार ने कागज की पतंग पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगा दी है जिससे कागज की पतंग बनाने में काफी समस्या हो गई है वही लोग पन्नी की पतंग पसंद कर रहे हैं जिसकी कीमत वर्तमान में1 से लेकर 50 तक है|
जनपद में गुजरात से लाई गई पन्नी की पतंग की खास डिमांड है वैसे जयपुर रामपुर अहमदाबाद कानपुर दिल्ली बरेली आज से पन्नी की पतंगों की सप्लाई होती है दुकानदार पसंद को देखते हुए जिसकी जैसी पतंग उसकी वैसी पसंद का फॉर्मूला अपना लिया बाजार में बच्चों के लिए मोटू पतलू छोटा भीम, स्पाइडर मैंन छपी पतंग उपलब्ध रही| वही राजनीतिक लोगों के लिए राहुल और मोदी, योगी-मोदी, मुलायम और अखिलेश के चित्रों से बनी पतंगे भी सजाई गई हैं जिन्हें लोग पसंद कर रहे है| (प्रमोद द्विवेदी भोले)

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