जनप्रतिनिधि शिक्षा के सुधार से दूर

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ram-govind-chaudhari_r2_c2लखनऊ : प्रदेश में 51,914 ग्राम प्रधान, 821 ब्लाक प्रमुख, 74 जिला पंचायत अध्यक्ष, 404 विधायक, 100 विधान परिषद सदस्य, 80 लोकसभा सदस्य और 31 राज्य सभा सदस्य हैं। इनमें से किसी की दिलचस्पी अपने क्षेत्र के सरकारी स्कूलों अथवा आंगनबाड़ी केन्द्रों के निरीक्षण और उनकी बेहतरी में नहीं है।

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बेसिक शिक्षा और बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग मंत्री राम गोविन्द चौधरी ने बीते सात अगस्त को पहल करते हुए ग्राम प्रधानों, विधायकों, विधान परिषद सदस्यों व सांसदों से अपील की थी कि वे अपने क्षेत्रों में प्राथमिक विद्यालय और आंगनबाड़ी केन्द्रों का निरीक्षण करें और जो भी शिकायतें और सुझाव हों, उनसे उन्हें अवगत कराएं।
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पत्र में चौधरी ने माना था कि तमाम कोशिशों के बावजूद ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा के स्तर में अपेक्षित सुधार नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा था कि जन सामान्य में चर्चा होती है बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में प्राय: अध्यापक नहीं आते। उनकी रुचि भी अध्यापन कार्य में नहीं होती। यहां छात्रों की संख्या भी संतोषजनक नहीं होती।

उन्होंने आंगनबाड़ी केन्द्रों के बारे में कहा था कि लगातार शिकायतें आती हैं केन्द्र खुलते नहीं या कार्यकत्रियां आती नहीं। ऐसे में गर्भवती महिलाएं केन्द्रों पर नहीं पहुंचती और पोषाहार वितरण में भी अनियमितताओं की सूचनाएं मिलती रहती हैं। विभागीय मंत्री को अपेक्षा थी कि जनप्रतिनिधि अगर निरंतर प्राथमिक विद्यालयों और आंगनबाड़ी केन्द्रों का निरीक्षण करते रहें और अनियमितताओं का सरकार के संज्ञान में लाते रहें तो हालात में बेहतरी की उम्मीद की जा सकती है।

चौधरी की इस पहल पर अमल करने को कोई आगे नहीं आया, कम से कम इस हद तक कि वह मंत्री को लिखकर बताता कि उसने अमुक- अमुक प्राथमिक विद्यालयों औरआंगनबाड़ी केन्द्रों का निरीक्षण किया और फलां गड़बड़ियां पाई। सुझाव देता कि इस व्यवस्था में सुधार के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए। सूत्रों का कहना है कि एक साल पूरा होने को है और व्यापक स्तर पर मंत्री के पत्र लिखने के बाद भी किसी ने लिखापढ़ी में उन्हें जवाब देने की जहमत गवारा नहीं की।

राम गोविन्द चौधरी भी जनप्रतिनिधियोंके इस ‘रिस्पांस’ से हैरान व निराश हैं लेकिन वह पूरी कवायद को ‘फ्लाप’ नहीं मानते। उनका कहना है कुछ न कुछ तो हासिल ही हुआ है भले ही यह अपेक्षा से कहीं कम है।

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