लखनऊ : इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने राज्य सरकार द्वारा अपने चहेतों को मंत्री का दर्जा देकर लालबत्ती से नवाजे जाने को चुनौती देने वाली जनहित याचिका की सुनवाई के लिए पीठ नामित करने के लिए मुख्य न्यायाधीश के समक्ष पेश किए जाने के आदेश दिए हैं। मामले में सुनवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश पीठ तय करेंगे।
याची सच्चिदानंद गुप्ता ने जनहित याचिका प्रस्तुत कर अखिलेश सरकार द्वारा 61 लोगों को विभिन्न विभागों में राज्य या कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिए जाने के मामले को चुनौती दी है। जनहित याचिका में कहा गया है कि अखिलेश सरकार द्वारा मंत्री का दर्जा दिए जाने संबंधी आदेशों को खारिज किया जाए। जनहित याचिका दायर कर डॉ. गोपाल दास नीरज, सतीश दीक्षित अनुराधा चौधरी, नरेंद्र सिंह, राजपाल कश्यप, हाजी इकबाल कुरैशी, नावेद सिद्दीकी, रामसिंह राणा, सुनील कुमार सिंह सहित सभी 61 लोगों को विपक्षी पक्षकार बनाया गया है। मांग की गई है कि राज्य सरकार के यह सभी निर्णय असंवैधानिक व विधि विरुद्ध है। इसलिए इनको खारिज किया जाए।
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याचिका में कहा गया है कि प्रदेश में 403 विधायक हैं इसमें 15 प्रतिशत के हिसाब से ही संख्या तय की जाती है। वर्तमान में प्रदेश के मुख्यमंत्री को मिलाकर 58 मंत्री हैं। राज्य सरकार संविधान की मंशा के विपरीत अधिक संख्या में लोगों की नियुक्ति कर राज्यमंत्री व कैबिनेट मंत्री का दर्जा दे रही है। यह सरकार का मनमाना आदेश है।
चहेतों को मंत्री पद का दर्जा देने के खिलाफ याचिका
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