गैंगरेप के आरोपी सपा के राज्यमंत्री को सुप्रीम कोर्ट का झटका

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MANOJ PARASबिजनौर| सुप्रीम कोर्ट ने बिजनौर के बहुचर्चित गैंगरेप में शामिल सपा सरकार में राज्यमंत्री मनोज पारस को झटका देते हुए पीडि़ता की याचिका को निस्तारित करते हुए जस्टिस बीएस चौहान व एसए बोब्डे की पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट को निर्देश देते हुए कहा कि सामूहिक बलात्कार के इस मामले को शीघ्र निपटाये ताकि अभियुक्तों पर ट्रायल कोर्ट में मुकदमा चल सके। सुप्रीम कोंर्ट द्वारा किये गये इस आदेश से राज्यमंत्री की मुश्किले बढ सकती हैं।

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सपा सरकार के राज्य मंत्री मनोज पारस व उसके साथियों पर उसी की गांव की एक (34 वर्षीय) दलित महिला ने उसके पति के नाम राशन की दुकान दिलाने के बहाने घर पर बुलाकर 8 दिसम्बर 2006 की दोपहर गैंगरेप किये जाने का आरोप लगाया था। राज्यमंत्री मनोज पारस ने इस बहुचर्चित मामले को अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर कानूनी दांव पेचों में फंसाकर मामले को दबाने का पूरा पूरा प्रयास किया लेकिन महिला ने हिम्मत न हारते हुए कोर्ट की शरण ली और 13 जून 2007 को न्यायालय के आदेश पर थाना नगीना में मनोज पारस समेत चारों आरोपियों के खिलाफ धारा 376जी, 506 आईपीसी व धारा 3 (1) (12) एससी एसटी एक्ट के तहत मुकदमा पंजीकृत हुआ था जिसमें एसीजेएम ने इस मामले में राज्यमंत्री मनोज पारस व उसके साथियों के विरूद्ध 21 नवम्बर 2011 को गैर जमानती वारंट जारी कर दिये थे जिसके विरूद्ध मनोज पारस ने रिवीजन याचिका दायर की थी| जिस पर एक अक्टूबर 2013 को न्यायालय ने राज्यमंत्री की याचिका को खारिज करते हुए राज्यमंत्री मनोज पारस समेत चारों आरोपियों को 18 अक्टूबर को अदालत में पेश होने के आदेश दिये थे लेकिन सत्ता के नशे में चूर राज्यमंत्री ने गैर जमानती वारंट जारी होने के बावजूद कोर्ट में पेश होना अपनी तौहीन समझा|

जिस पर न्यायालय ने कार्रवाई करते हुए गैर जमानती वारंट के साथ साथ 82 सीआरपीसी की कार्रवाही के तहत राज्य मंत्री को भगोड़ा घोषित कर दिया था और नोटिस उनके आवास पर चस्पा किये जाने के नगीना पुलिस को आदेश दिये थे| इसके बाद मंत्री मनोज पारस ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की जिसमें अधिवक्ता ने अपनी दलील में कहा कि मनोज पारस व जयपाल आपस में चाचा भतीजे हैं तथा एकसाथ गैंगरेप जैसे कृत्य को अंजाम नही दे सकते याचिका पर हाईकोर्ट ने 6 नवम्बर 2013 मुकदमें की कार्रवाही पर अंतरिम रोक लगा दी थी। जिसके विरूद्ध पीडि़ता ने न्याय पाने के लिये सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जिसमें पीडि़ता के अधिवक्ता संजीव भटनागर ने जोरदार तर्क देते हुए कहा कि माननीय हाईकोर्ट को गुमराह करके चाचा भतीजे बताया है जबकि जयपाल और मनोज पारस शजरे के अनुसार चाचा भतीजे नहीं है| सीके अलावा अन्य आरोपी कुंवर सैनी तो अलग ही बिरादरी का है|
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मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस बीएस चौहान व एसए बोब्डे की पीठ ने मंगलवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट को निर्देश देते हुए कहा कि सामूहिक बलात्कार के इस मामले में शीघ्र निपटाये ताकि अभियुक्तों पर ट्रायल कोर्ट में मुकदमा चल सके। सुप्रीम कोंर्ट द्वारा किये गये इस आदेश से जहां राज्यमंत्री मनोज पारस की मुश्किले बढ सकती हैं। वहीं गैंगरेप जैसे इस गंभीर मामले में सपा राज्यमंत्री मनोज पारस का नाम जुड़ना सरकार की छवि धूमिल करता दिखाई दे रहा है। अब देखना यह है कि सरकार अपनी छवि दुरूस्त करती है या गैंगरेप के आरोपी राज्यमंत्री को बाहर का रास्ता दिखाती है।

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