खंड शिक्षा अधिकारी को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में नही मिली राहत, 18 नवम्बर को आरोप सृजन की तारीख तय

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फर्रुखाबाद:(जेएनआई ब्यूरो) सहायक अध्यापक अनिल कुमार त्रिपाठी को आत्महत्या के लिए उकसाने के बहुचर्चित मामले में जनपद न्यायालय की अदालत से खंड शिक्षा अधिकारी गिर्राज सिंह को राहत नहीं मिल सकी है।
सत्र न्यायाधीश नीरज कुमार की अदालत ने अभियुक्त का प्रार्थनापत्र खारिज करते हुए आरोप सृजन की तारीख 18 नवम्बर 2025 निर्धारित की है।
गुरुवार को सुनवाई के दौरान अभियुक्त सुरेन्द्र नाथ अवस्थी व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित रहे, जबकि अभियुक्त गिर्राज सिंह एवं निर्देश गंगवार की उपस्थिति उनके अधिवक्ताओं के माध्यम से स्वीकार की गई| अभियुक्त गिर्राज सिंह की ओर से यह दलील दी गई कि वे घटना के समय खंड शिक्षा अधिकारी, कायमगंज के पद पर कार्यरत थे, इसलिए उनके विरुद्ध आरोपपत्र पर विचार करने से पहले सरकारी अनुमति आवश्यक थी।
इस पर जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) ने आपत्ति दर्ज कराई और कहा कि आरोपित ने मृतक शिक्षक को गाली-गलौज कर अपमानित करते हुए आत्महत्या के लिए उकसाया, जो किसी भी अधिकारी के वैधानिक कार्यक्षेत्र का हिस्सा नहीं है। वादी पक्ष की ओर से भी तर्क दिया गया कि आत्महत्या के लिए उकसाना न तो किसी पद का कर्तव्य है और न ही विभागीय कार्यवाही का हिस्सा, बल्कि यह दंडनीय अपराध है। अभियोजन पक्ष ने केस डायरी का हवाला देते हुए बताया कि विवेचना के दौरान भी अभियोजन स्वीकृति के संबंध में अधिकारियों के बीच पत्राचार का उल्लेख किया गया है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पत्रावली के अवलोकन के बाद अदालत ने माना कि-“किसी अधीनस्थ कर्मचारी को गालीगलौज कर अपमानित करना एवं आत्महत्या के लिए उकसाना किसी खंड शिक्षा अधिकारी के पद के निर्वहन का हिस्सा नहीं है।” अदालत ने इस आधार पर अभियुक्त एबीएसए गिर्राज सिंह का प्रार्थनापत्र खारिज करते हुए उन्हें किसी भी प्रकार की राहत देने से इंकार कर दिया। साथ ही मामले की पत्रावली आरोप सृजन हेतु 18 नवम्बर 2025 को प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।

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