किशोरी की गर्दन में आपरेशन कर निकाली गांठ

0
524

फर्रुखाबाद:(जेएनआई ब्यूरो) किशोरी की गर्दन में एक बड़ी गांठ हो गयी थी, युवती दिल्ली तक उपचार करा चुकी थी लेकिन कोई सुधार नही हुआ| लेकिन लोहिया अस्पताल में उसका सफल आपरेशन कर गांठ निकाल दी गयी|
लोहिया अस्पताल के सर्जन मेजर रोहित तिवारी नें एक 17 वर्षीय किशोरी की गर्दन में बड़ी गांठ होनें पर उसको निकाल दिया| लोहिया में अपने तरह का एक पहला आपरेशन है| युवती नें बताया कि गर्दन के दाहिने पीछे हिस्से में विशाल गांठ थी, जो तेजी से बढ़ती जा रही थी। स्थानीय चिकित्सकों ने कई बार अल्ट्रासाउंड और सुई से तरल निकालने का प्रयास किया, लेकिन स्थिति बिगड़ती चली गई। इससे किशोरी की शारीरिक बनावट, मानसिक स्थिति और आत्मविश्वास पर गहरा असर पड़ा। जांच में पता चला कि यह सिस्टिक हाइग्रोमा (लिम्फैंगियोमा) हैं, लसीका तंत्र से जुड़ी एक दुर्लभ जन्मजात बीमारी। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए पहले कानपुर और सैफई मेडिकल कॉलेज से उसे सफदरजंग अस्पताल, दिल्ली तक रेफर किया गया। लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी पिता मनरेगा में मजदूरी करते हैं, जिससे बड़े निजी अस्पताल में इलाज संभव नहीं हो सका। मेजर डॉ. रोहित तिवारी ने दुर्लभ ऑपरेशन कर
फर्रुखाबाद में ही हुई बड़ी सफलता
परिवार की परिस्थितियों को देखते हुए फर्रुखाबाद में ही ऑपरेशन करने का निर्णय लिया गया। जनरल एनेस्थीसिया के तहत मेजर डॉ. रोहित तिवारी ने सावधानीपूर्वक ऑपरेशन कर पूरी गांठ को निकाल दिया। खास बात यह रही कि इस दौरान किसी नस या महत्वपूर्ण अंग को क्षति नहीं हुई।
पूरी तरह सफल रहा ऑपरेशन
सर्जरी पूरी तरह सफल रही और किशोरी अब स्वस्थ हो रही है। बड़ी गांठ हटने के बाद उसका आत्मविश्वास लौट आया है और परिवार ने राहत की सांस ली।
क्या बोले सर्जन
मेजर डॉ. रोहित तिवारी ने कहा यह केस इस बात का प्रमाण है कि यदि समय पर जांच और उचित इलाज मिले तो गंभीर और जटिल बीमारियों पर भी विजय पाई जा सकती है। फर्रुखाबाद में भी बड़े स्तर की सर्जरी संभव है।
क्या है सिस्टिक हाइग्रोमा?|
यह लसीका तंत्र की एक जन्मजात विकृति है। इसमें गर्दन या बगल में तरल से भरी बड़ी गांठ बन जाती है। अक्सर यह धीरे-धीरे आकार में बढ़ती रहती है। इलाज के लिए सर्जरी ही सबसे उपयुक्त विकल्प माना जाता है।

[adrotate banner="3"]

[adrotate banner="2"]