कवि सम्मेलन- ”हां में हां मिलाते रहो चक्क माल खाते रहो”

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फर्रुखाबाद: पूर्व ऊर्जा मंत्री ब्रहमदत्त द्विवेदी मंजुल को समर्पित पांचाल पर्व पर देर रात्रि तक चले कवि सम्मेलन में कवियों ने पांचाल पुरुष को काव्यांजलि अर्पित कर नमन निवेदित किया। इस मौके पर युवा कवियत्री सुश्री गरिमा पाण्डेय को इस वर्ष का मंजुल सम्मान दिया गया। इसके साथ ही प्रदेश सरकार से साहित्य भूषण सम्मान प्राप्त करने वाले डा0 शिवओम अंबर पर निकाले गए विशेषांक पत्रिका ”सृजन से” का विमोचन भी इस अवसर पर हुआ।
Garima Pandey Farrukhabad
देश की राजधानी दिल्ली से आईं कवियत्री श्रीमती कीर्ति काले ने वाणी वंदना करके कार्यक्रम का शुभारंभ किया। व्यापार मण्डल के प्रदेश मंत्री अरुण प्रकाश तिवारी की अध्यक्षता में हुए इस आयोजन का संचालन देश के ख्यातिलब्ध कवि एवं मंच संचालक डा0 शिवओम अंबर ने किया। कार्यक्रम को गति प्रदान करते हुए ओज के युवा कवि मनुव्रत वाजपेयी ने संकेत करती कविता पढ़ कर वाहवाही अर्जित की-
दुधमुंहे का दाल भात चाय-चीनी खा गए
आ गया चुनाव तो गरीब याद आ गए
व्यंगकार सुरेश अवस्थी ने पढ़ा-
काबिज हैं गोदाम पर मिस्टर सत्यानाश
सवा सेर गेहूं नहीं प्रेमचंद के पास
सुश्री गरिमा पाण्डेय के गीत व मुक्तक खूब सराहे गए-
मेरी हर सांस अपने अंक में तूफान रखती है
बवंडर में मेरी कश्ती दिशा का ध्यान रखती है
हाथरस से आए वरिष्ठ व्यंगकार पदम अलवेला ने पढ़ा-
हां में हां मिलाते रहो चक्क माल खाते रहो
वाणी में सहज हास्य व्यंग होना चाहिए
दिल्ली से आई कवियत्री कीर्ति काले के गीत सभी के मन को भाए-
मौसम ने आंख मार कर घोल दी हवाओं में अफीम
हरियाई सूखती लता गदराया ठूंठ हुआ नीम
ओज के हस्ताक्षर वेदव्रत वाजपेयी गहरे संकेत देती हुई रचना पढ़ कर सियासत पर तीखे प्रहार किए-
गांधारी ने कब देखा जनता के भूखे पेटों को
चाहत है कुर्सी मिल जाए उनके बेटी-बेटों को
लखनऊ के गीतकार रमेश रंजन मिश्र ने सांस्कृतिक प्रदूषण को रेखांकित करते हुए पढ़ा-
हुई सभ्यता निव्र्यसन कुंटुंबकम कमजोर
मेरे मांझी लौट चल फिर पूरब की ओर
मेजर सुनीलदत्त द्विवेदी की अनुज वधू रिचा द्विवेदी ने काव्यपाठ करके अपने ससुर स्वर्गीय ब्रहमदत्त द्विवेदी को नमन निवेदित किया। मेजर सुनीलदत्त द्विवेदी ने स्वर्गीय द्विवेदी की रचनाओं का पाठ किया। इस अवसर पर कार्यक्रम संयोजक रमेश चंद्र त्रिपाठी, सह संयोजक बृजकिशोर सिंह किशोर, डा0 हरिदत्त द्विवेदी, मीना पाण्डेय, कैलाश पाण्डेय, अनीता द्विवेदी, कुशला द्विवेदी, इंदिरा पाण्डेय, दीपा जोशी, हेमंत जोशी सहित सैकड़ों साहित्य प्रेमी मौजूद रहे।

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