कलयुगी मां ने बच्ची जन कर सड़क पर फेंकी, कुत्तों ने सिर नोचा

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फर्रुखाबाद: कहते हैं पुत्र कुपुत्र हो सकता है लेकिन माता कभी कुमाता नहीं हो सकती। मां एक ऐसा शब्द जिसमें पूरा ब्रह्मण्ड ही समां जाता है। जिससे सृष्टि की उत्पत्ति हुई। मां का दर्जा हर धर्म में चाहे हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई। हर एक समुदाय में मां का दर्जा सबसे ऊपर रखा गया। क्योंकि मां वह शक्ति है जो नौ महीने अपने गर्भ में रखने के बाद असहनीय प्रसव पीड़ा सहकर मानव शरीर को संसार में जन्म देती है। लेकिन एक कलयुगी मां ने एक मासूम सी बच्ची को जन्म देकर शहर क्षेत्र के रस्तोगी मोहल्ले की एक गली में फेंक दिया। जहां कुत्तों के खूनी जबड़ों ने मासूम बच्ची को जकड़कर मौत की नींद सुला दिया।

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वक्त बदल रहा है जिसका असर अब शायद मां के आंचल को छूकर निकल रहा है। नवजात शिशुओं को जन्म देने के पश्चात सड़क या तालाबों में फेंक देने की घटनाओं में आधुनिकता की दौड़ में वृद्वि होती दिख रही है। ऐसी मां या तो बच्चों को जन्म देना ही नहीं चाहतीं या चोरी छिपे गर्भवती हो जाने के बाद समाज के भय से अपना मुहं काला होने से बचाने के लिए उस नन्हीं सी जान को मौत की नींद सुला देते हैं।

घटना शहर क्षेत्र के रस्तोगी मोहल्ले की है जहां ज्यादातर व्यक्ति प्रतिष्ठित और धनाड्य परिवारों से हैं। रविवार को जब कुत्तों की भौंकने की आवाज सुनी तो निकलकर जो दृश्य देखा वह बाकई में आत्मा को झकझोर देने वाला था। कुछ आवारा कुत्ते एक मासूम सी बच्ची को अपनी -अपनी तरफ खींच रहे थे। बच्ची बुरी तरह से लहूलुहान थी। अनायास ही लोगों के मुहं से चीख पुकार निकली तो और भी लोग जमा हो गये। जो भी वह दृश्य देख रहा था उसके मुहं से उस कलयुगी मां के लिए श्राप के अलावा और कुछ नहीं निकल रहा था। जैसे तैसे लोगों ने आवारा कुत्तों को वहां से भगाया और घटना की सूचना कोतवाली पुलिस को दी। सूचना मिलते ही तिकोना चौकी इंचार्ज श्रीकृष्ण मौके पर पहुंचे और घटना के सम्बंध में जांच पड़ताल की। उसके बाद बच्ची को मोहल्लेवासियों की मदद से दफना दिया गया।

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