ईद के विषय में विवादित पोस्टर से मुस्लिमों में असमंजस

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फर्रुखाबाद: भाईचारे और मोहब्बत के त्यौहार ईद को भी मसलकी जंग ने विवाद के दायरे में लाकर खड़ा कर दिया है। ईद की तारीख को लेकर शहर में जगह-जगह चिपके विवादित पोस्टर जहां एक ओर चर्चा का विषय बने हुए हैं वहीं इस मसलकी जंग से नावाकिफ आम मुसलमान असमंजस में है।

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मौलाना शमशाद चतुर्वेदी की ओर से छपे इन पोस्टरों में बजाहिर तो ईदगाह में नमाज के वख्त ही सूचना दी गयी। परन्तु इसी पोस्टर में बड़ी चालाकी से एक विवाद की गुंजाइस पैदा कर दी गयी है। नमाज के वख्त की सूचना के नीचे छापा गया है कि यदि चांद 29 का हुआ तो ईद सोमवार की अन्यथा मंगल की होगी। इस वाक्य का सीधा मतलब यह है कि मौलाना मोअज्जम अली ने जो पहले रोजे का ऐलान रात के 12 बजे किया था वह गलत था। क्योंकि मोअज्जम अली के ऐलान के मुताबिक आज शनिवार को 29 तारीख है और यदि आज चांद होता है तो ईद रविवार की अन्यथा सोमवार की होनी चाहिए। परन्तु मौलाना शमशाद चतुर्वेदी के पोस्टर के अनुसार रविवार को रमजान की 29 तारीख है।

जाहिर है इस पूरे विवाद के पीछे कहीं न कहीं वर्चस्व की की लड़ाई साफ नजर आती है। इस पूरे विवाद को फैलाकर कम से कम शहर में ईद एक दिन, एक साथ न होने देने की मंशा साफ है और इसके पीछे अपने-अपने फिरके के अनुयायियों के संख्या बल के प्रदर्शन की आकांक्षा छुपी हुई है।

हालांकि ईद का होना या न होना चांद दिखने पर निर्भर करेगा। यदि किन्हीं कारणों से चांद नजर नहीं आता है तो आस पास के शहरों की सूचना और शहादत के आधार पर इसका निर्णय होना है। फिर भी विवाद की कोशिश तो कर ही ली गयी है।

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