आलू किसानों की समस्याओं को लेकर 7 सितंबर को फर्रुखाबाद में प्रदर्शन

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फर्रुखाबाद:(जेएनआई ब्यूरो) एशिया की सबसे बड़ी आलू मंडियों में शामिल सातनपुर फर्रुखाबाद में आलू किसानों की समस्याओं और लगातार हो रहे नुकसान को लेकर किसानों, शीतगृह स्वामियों, आलू व्यापारियों, आढ़तियों एवं आलू निर्यातकों की संयुक्त बैठक हुई। बैठक में सभी ने किसानों के हित में सरकार से तत्काल प्रभाव से आलू नीति बनाए जाने की मांग उठाई। बैठक में मांग की गई कि जब तक आलू नीति तैयार नहीं होती, तब तक शीतगृहों में भंडारित आलू के भाड़े का भुगतान सरकार करे तथा आलू पर मंडी शुल्क तत्काल समाप्त किया जाए। इसके साथ ही न्यूनतम हाईब्रिड आलू का मूल्य 1000 रुपये प्रति क्विंटल और चिप्सोना, हॉलैंड व 3797 (प्रोसेसिंग वैरायटी) का न्यूनतम मूल्य 1500 रुपये प्रति क्विंटल तय करने की मांग रखी गई। किसानों को नुकसान होने की स्थिति में मूल्य अंतर की धनराशि सरकार द्वारा दिए जाने, आलू को बाहर भेजने के लिए ट्रेन का भाड़ा निशुल्क करने तथा आलू निर्यात पर सड़क परिवहन अनुदान को 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने की मांग भी उठी।बैठक में बताया गया कि इन मांगों को लेकर प्रदेश व्यापी आलू आंदोलन की घोषणा की गई है। आगामी 7 सितंबर को किसान, व्यापारी, कोल्ड स्टोरेज स्वामी और आढ़ती कलेक्ट्रेट फतेहगढ़ पर प्रदर्शन करेंगे। किसान आलू की माला पहनकर अपनी समस्याओं के प्रति सरकार का ध्यान आकर्षित करेंगे।किसान आंदोलन के प्रदेश अध्यक्ष अजय अनमोल ने कहा कि जब आलू महंगा होता है तो राजनीतिक दलों के नेता आलू और प्याज की माला पहनकर प्रदर्शन करते हैं, लेकिन आज किसान बर्बादी के दौर से गुजर रहा है और सरकार किसानों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रही है। उन्होंने कहा कि अब किसान स्वयं आलू की माला पहनकर अपनी बर्बादी का प्रदर्शन करेंगे और अपनी मांगें पूरी कराने के लिए आंदोलन को तेज करेंगे।उन्होंने बताया कि 7 सितंबर 2026 को फर्रुखाबाद फतेहगढ़ कलेक्ट्रेट पर आंदोलन किया जाएगा। इसके बाद अन्य जनपदों में भी प्रदर्शन होंगे और राजधानी लखनऊ में आंदोलन किया जाएगा। बैठक में यह भी कहा गया कि जब तक किसानों की सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा।किसान आंदोलन के प्रदेश प्रभारी अशोक कटियार ने सरकार से आंदोलन को गंभीरता से लेते हुए तत्काल किसानों और आलू व्यापारियों की समस्याओं का समाधान करने की मांग की। वहीं आलू निर्यातक एवं कार्यक्रम संयोजक सुधीर कुमार शुक्ला ने स्पष्ट किया कि मांगें पूरी होने तक संघर्ष जारी रहेगा।शीतगृह संघ के महासचिव मनोज कुमार रस्तोगी ने कहा कि किसानों और शीतगृह स्वामियों के सामने आलू की जो स्थिति वर्तमान में है, ऐसी स्थिति पहले कभी नहीं देखी गई। यदि किसानों की मांगें पूरी नहीं हुईं तो किसान भुखमरी की कगार पर पहुंच जाएंगे और आलू से जुड़े शीतगृह सहित अन्य कारोबार पूरी तरह प्रभावित होंगे।व्यापार मंडल के अध्यक्ष सर्वेश अग्रवाल एवं वरिष्ठ पदाधिकारी सुभाष बंसल ने कहा कि फर्रुखाबाद का आर्थिक आधार आलू है। आलू के सस्ता होने से बाजार में मंदी का असर दिखाई दे रहा है। उन्होंने सरकार से संयुक्त रूप से उठाई गई मांगों को जल्द पूरा करने की अपील की।बैठक में आलू आढ़ती एवं किसान नेता अरविंद राजपूत, सुरेंद्र सिंह पाल, अजय राजपूत, रामलड़ैते, पुरुषोत्तम, बंधेलाल वर्मा, हर्ष सिंह, वीरेंद्र दीक्षित, देवकीनंदन, मनोज राजपूत, अविनाश कुशवाहा, प्रवीण कुमार कटियार समेत बड़ी संख्या में किसान नेता, व्यापारी और शीतगृह स्वामी मौजूद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता राधेलाल राजपूत ने की। प्रदेश प्रभारी अशोक कटियार ने बताया कि 21 अगस्त 2026 को प्रातः 11 बजे कमौज, कपू्रपुर, मानिकमजरा तथा बिल्हौर के बकोंटी में किसानों की सभाएं आयोजित की जाएंगी।

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