आपराधियों को चुनाव लड़ने से रोकने को बदलेगा कानून

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नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने शुक्रवार को कहा कि अपराधियों को चुनाव लड़ने से रोकने और अन्य मुद्दों पर प्रस्तावों में सरकार ने महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं।

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चुनाव सुधार पर महत्वपूर्ण विधेयक लाने में विलंब करने और उन्हें शीतकालीन सत्र में पारित नहीं करवाने पर ‘निराशा’ जताते हुए उन्होंने उम्मीद जताई कि संसद कम से कम बजट सत्र में शुरुआत करेगी।

कुरैशी ने एक साक्षात्कार में कहा, ‘हम निराश हैं कि ऐसा [चुनाव सुधार] शीतकालीन सत्र में नहीं हुआ। करीब 30-40 विधेयक आए लेकिन हमारा विधेयक नहीं आया।’ उन्होंने कहा, ‘इसी संदेह का लाभ देने की जरूरत है कि सरकार को सिर्फ लोकपाल पर ही व्यस्त रखा गया। मुझे उम्मीद है कि कम से कम बजट सत्र में सरकार अपना वादा निभाएगी और इस विधेयक को लाएगी।’

उन्होंने कहा कि कानून मंत्री सलमान खुर्शीद तीसरी बार आयोग आए और आश्वासन दिया कि सरकार शीत सत्र में बड़े बदलाव करेगी जिसमें अपराधियों को प्रतिबंधित करने और राजनीतिक कोष में पारदर्शिता बरतना भी शामिल है।

उन्होंने कहा, ‘और उन्होंने हमसे कहा कि क्या बाद में अन्य मुद्दों को लाएंगे तो उन्हें कोई परेशानी तो नहीं। हमने कहा कि हां ये मुद्दे काफी महत्वपूर्ण हैं। हम खुश होंगे अगर इन्हें लाया जाता है। उन्होंने हमारे प्रस्ताव में कुछ संशोधन किए हैं और हम उन संशोधनों के साथ भी खुश हैं।’

आयोग के प्रस्तावों में संशोधन करते हुए सरकार ने घृणित अपराधों में शामिल किसी उम्मीदवार को चुनाव लड़ने से रोकने के लिए उसके खिलाफ आरोप पत्र की अवधि को छह महीने से बढ़ाकर एक वर्ष कर दिया है।

आयोग ने सुझाव दिया था, ‘हमारा फा‌र्म्यूलेशन और कानून आयोग का भी है कि दुष्कर्म, हत्या, डकैती, अपहरण आदि जैसे घृणित प्रकृति के अपराध में अगर चुनाव से छह महीने पहले प्राथमिकी दर्ज हुई है और अदालत ने आरोप तय कर दिए हैं, ऐसे मामले में उम्मीदवारों को प्रतिबंधित किया जा सकता है।’

इसने कहा, ‘अदालत स्वतंत्र एवं न्यायिक संस्था है और आरोप तय करने की प्रक्रिया न्यायिक आवेदन को ध्यान में रखकर की जाती है। कम से कम उन मामलों में उन्हें प्रतिबंधित किया जाना चाहिए।’

सरकार के संशोधन पर उन्होंने कहा, ‘हमने कहा कि हमें कोई दिक्कत नहीं है। तब उन्होंने कहा कि प्राथमिकी दर्ज होने से छह महीने या एक वर्ष के बजाए यह आरोप पत्र तय करने से एक वर्ष का वक्त होना चाहिए। हमने कहा कि कोई समस्या नहीं है लेकिन शुरुआत कीजिए। लेकिन हम उम्मीद करते हैं कि बजट सत्र में यह आएगा।’

उन्होंने कहा कि सरकार कह रही है कि अपराधियों को रोकने पर राजनीतिक सहमति बनाना कठिन है और ऐसा है क्योंकि हर पार्टी में इस तरह के उम्मीदवार हैं। उन्होंने कहा, ‘और उन्होंने कहा कि राजनीति में प्रतिद्वंद्वी की ओर से गलत मामला दर्ज कराना आम बात है। इसलिए उन्हें संभावित गलत शिकायत के आधार पर रोकना सही नहीं है।’

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