अले दीदी तो आईं नहीं पंदीरी कौन देदा……अंतल दी

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फर्रुखाबाद: शनिवार थाना नवाबगंज क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय रसीदपुर मई के आंगनबाडी केंद्र पर जब छोटे-छोटे मासूम बच्चे पहुंचे तो केंद्र पर ताला लटका देख केंद्र के बाहर मैडम के इन्तजार में कई घंटे बैठे रहे|

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आंगनबाडी केंद्र पर जे ऍन आई टीम का रिपोर्टर पहुंचा और बच्चों से पूंछा कि तुम लोग यहाँ क्यों बैठे हो तो बच्चे अपनी तोतली आवाज में बोले “हम लोद दीदी ता इन्तजार तर रहे हैं औल पंदीरी लेने आये हैं|”

अब हाल आंगनबाडी केंद्र का केंद्र तो बना है लेकिन कब खुले यह तो भगवान् जानते है कि नहीं पता नहीं लेकिन मैडम जरूर जानती है कि कब खोलना है ? बच्चों ने जब केंद्र पर ताला लटका देखा तो बच्चे मैडम के इन्तजार में आगनबाडी केंद्र के सामने धूप में मासूम कई घंटों तक वर्तन लिए मैडम जी की राह देखते रहे| लेकिन मैडम की कहीं तक दूर दूर तक परछाईं नहीं|

केंद्र सरकार द्वारा चलाये जा रहे सर्व शिक्षा अभियान के तहत आगनबाडी केन्द्रों की स्थापना की गयी है| जिनके अंतर्गत गाँव के छोटे-छोटे बच्चों को केंद्र पर बुलाकर उनका मानसिक विकास व देखभाल करना था व बच्चों को एक तय मात्रा के हिसाब से पंजीरी ( पुष्टाहार) तथा मध्यान्ह भोजन की व्यवस्था सरकार ने इस मकसद से शुरू कराई थी| कि गरीब तबके के बच्चे जिनको पर्याप्त मात्रा में पोषण नहीं मिल पाता है उन्हें आगनबाडी केंद्र पर बुलाकर एक प्रशिक्षित कर्मचारी के द्वारा देखभाल की जाए|

लेकिन अधिकारी व प्रशासन की अनदेखी के चलते बच्चों को ये सारी सुविधाएं मिल तो रही हैं लेकिन सरकारी रजिस्टर में और पंजीरी खा रहे है क्षेत्र के जानवर|

आगनबाडी केन्द्रों पर कार्यकत्रियों की उपस्थित के हिसाब से महीनों केंद्र नहीं खुलते लेकिन कार्यकत्रियां अपने हुनर का इस्तेमाल करते हुए और बाबू जी की कृपा से उपस्थित रजिस्टर में उपस्थित पूरी दर्ज रहती है| इस बात को अनपढ़ गाँव वाले व बच्चों के माँ-वाप नहीं समझ पाते| अगर विभाग की तरफ से कोई कार्रवाई की भी जाती है तो अभिलेख में उपस्थित व मीनू के हिसाब से मिड डे मील व पंजीरी का लेखा जोखा बाकायदा मेंतेंस रहता है|

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