अब शादियों में युवा उठा रहे हुक्का पीने का लुत्फ

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फर्रुखाबाद: जमाना कितना बदल गया, पुराने जमाने में जहां बारात को दूध दही मट्ठा आदि लाकर पिलाया जाता था और उनकी आवभगत कई कई दिनों तक की जाती थी। बारात जनवासे में पहुंचकर कई दिनों तक रुकती थी, तो प्रति दिन बारातियों को कुछ नया व्यंजन दिया जाता था। विशेषता यह थी कि खाना बनाने का काम बाराती खुद किया करते थे। धीरे धीरे जमाने ने करवट ली तो मामला पत्तलों पर आ गया और समाज और बदला तो बफर सिस्टम ने पत्तलों की जगह छीन ली। अब कोई किसी से खाने की नहीं पूछता, जिसे जो मर्जी हो वह खाये, जिसे मर्जी हो मुहं पोंछ कर चला आये। शादियों में ज्यादातर प्रतिष्ठित घरों में पूड़ियां ही बनायीं जाती थीं लेकिन अब हाई प्रोफाइल समाज में रोटी दाल भी पहुंच गयी है। जहां बारात की आवभगत में रोटी दाल भी परोसी जाती है। जनपद में अब एक नया चलन और शुरू हो गया है, हुक्का और स्टेचू का जहां एक ओर लोग हुक्का पीकर अपने पाचन क्रिया को ठीक करते हैं और दिमाग को नशे में झूम जाने को मजबूर तो वहीं स्टेचू बने लोगों को देखकर भीड़ अपना मनोरंजन करती है।

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बढ़पुर स्थित एक गेस्टहाउस में शहर के एक प्रतिष्ठित व्यक्ति की पुत्री की बारात ठहरी तो गेस्टहाउस की व्यवस्था देखने लायक थी। हर तरफ नया लुक। गेट पर घुसते ही तीन जेट श्रेणी के कमांडो अपनी कारवाइन लिये खड़े थे। दिमाग में आया कि शायद कोई बड़ा मंत्री आया होगा। बारात में और अंदर गया तो पहले ही सामने नबाव साहब को मरजीना शराब पिलाती नजर आयी। थोड़ी देर रुक कर देखा तो समझ में आया कि वह स्टेचू था। ऐसे ही भगवान शंकर बर्फ पर खड़े हुए स्टेचू को सजाया गया था। जिसके ऊपर जीवित सांप आकर्षण का केन्द्र बना हुआ था। बगल में राधा कृष्ण का स्टेचू भी देखने लायक था। बाराती और जनाती यही नहीं समझ पा रहे थे कि यह पत्थर के हैं या असली। खैर छोड़िये आगे चले तो आंखें फटी की फटी रह गयीं। बिलकुल नई चीज बारात में देखने को मिली। एक तरफ पूड़ी सब्जी, पुलाव, पनीर, पानी के बतासे, चाऊमीन, इडली, डोसा के बड़े बड़े स्टाल लगे थे तो वहीं दूसरी तरफ एक काउंटर से काफी धुआं उठता दिखायी दिया। समझ में यह आया कि शायद कोई बहुत ही गरम चीज बन रही है जिससे धुआं निकल रहा है। मगर पास जाकर देखा तो एक स्टाल पर तीन चार आकर्षक हुक्के लगाये गये थे। जिन्हें पीकर बारात में आये युवा अपने आपको मस्त करने के साथ साथ मुहं से धुआं निकाल रहे थे। यह अजीब व्यवस्था देखकर मन में एक सवाल जागा कि अब और क्या चाहिए। फिलहाल जेएनआई की तरफ से नव दम्पत्ति को परिणय सूत्र में बंधने की हार्दिक बधाई।

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