अखिलेश को झटका, मायाकाल के 791 वकीलों को ‘अभयदान’

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courtda1111_fडेस्क: हाईकोर्ट की खंडपीठ ने एक अहम फैसले में 791 सरकारी वकीलों को हटाने का आदेश रद्द कर दिया। इन्हें वर्ष 2008 और इसके बाद सूबे की बसपा सरकार के दौरान जिलों में बतौर सरकारी वकील नियुक्त किया गया था, जिन्हें मौजूदा सपा सरकार में हटाने के साथ ही इनके नवीनीकरण को खारिज कर दिया गया।

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वकीलों ने कुल 357 याचिकाएं दायर कर इसे कानून की मंशा के खिलाफ बताकर हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि इन याचिकाकर्ता वकीलों के नवीनीकरण या तैनाती के मामले में तीन माह में फिर से गौर कर पालन रिपोर्ट पेश की जाए।

कोर्ट ने सूबे में अभियोजन निदेशालय की स्थापना करने के निर्देश भी दिए हैं। साथ ही कहा कि अभियोजन निदेशक की नियुक्ति हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की सहमति से होनी चाहिए। न्यायमूर्ति देवी प्रसाद सिंह और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार त्रिपाठी द्वितीय की खंडपीठ ने बुधवार को यह सुरक्षित फैसला अजय कुमार शर्मा समेत 791 लोगों की ओर से दायर 357 याचिकाओं को मंजूर कर सुनाया।

कोर्ट ने इन याचियों के नवीनीकरण खारिज किए जाने के आदेशों को रद्द कर दिया तथा सरकार को तीन माह में इनके नवीनीकरण या नियुक्ति मामले में पुन: विचार करने के निर्देश दिए। साथ ही सरकार को कहा कि जिला शासकीय अधिवक्ताओं की तैनाती, नवीनीकरण व चयन प्रक्रिया को पटरी पर लाने के लिए समुचित कदम उठाए।

इस फैसले को सरकार के लिए एक और झटका माना जा रहा है। हालांकि सूबे के महाधिवक्ता विजयबहादुर सिंह ने इसे ऐतिहासिक निर्णय बताया है।
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