FARRUKHABAD : भाजपा नेता ठाकुर जयपाल सिंह की हत्या करने वाले सपा नेता कमल नरायन सिंह की जिला जेल में मौत हो गई। कमल जिला जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे थे। वह 9 माह पूर्व 6 माह के लिये पेरौल पर रेहा हुये थे। उनकों केंसर की
बीमारी थी, जेल के होमगार्ड शिशुपाल सिंह ने कमल को 1.55 बजें लोहिया अस्पताल पहुंचाया। डाक्टर ने उन्हे मृत घोषित कर दिया, उनको 30 मई 11 को आजीवन कारावास की सजा हुई थी।
कोतवाली मोहम्मदाबाद के ग्राम लखरौआ निवासी सेवानिवृत शिक्षक कमल नरायन सिंह सपा नेता थे,इसी गाँव के भाजपा नेता जयपाल सिंह अपनी बिक्की से भतीजे जगदीश सिंह को बिठाकर घर जा रहे थे। जब वह रोहिला के निकट ताजपुर मार्ग सांय काल गुजर रहे थे, उसी समय कमल नरायन सिंह ने कमांडर जीप से टक्कर मारने के बाद जयपाल सिंह को कुचल कर मार डाला था। पैर कट जाने पर जगदीश किसी तरह जान बचा कर भाग गये थे। इस मुकदमे में कमल के साथ उनके पुत्रों को भी सजा हुई है। आरएसएस से सम्बधित जयपाल सिंह भाजपा के जिलाध्यक्ष भी रहे थे।
जिला कारागार फतेहगढ़ में बीते 30 मई 2011 को कोतवाली मोहम्मदाबाद क्षेत्र के ग्राम लखरौआ निवासी 66 वर्षीय कमल नरायन पुत्र शिवनंदन सिंह को हत्या की धारा 302, 449, 447 में आजीवन कैद की सजा सुनायी गयी थी। तब से कमल नरायन जिला जेल में ही बंद था। तबियत खराब होने पर जिला जेल से लोहिया अस्पताल पहुंचाया गया। जहां उसकी मौत हो गयी। पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम कराया।
जिला जेल के अधीक्षक कैलाशचन्द्र ने बताया कि कैदी कमलनरायन जेल मे आने से पहले मुहं के कैंसर से परेशान था। जिसकी बजह से उसकी मौत हुई। मामले की सूचना परिजनों को दे दी गयी।
मार्ग दुर्घटना में जिला जेल का बंदी रक्षक घायल
फर्रुखाबाद: जिला कारागार फतेहगढ़ में बंदी रक्षक पद पर तैनात 45 वर्षीय धु्रव सिंह यादव अपनी बाइक से फर्रुखाबाद की तरफ जा रहा था। सामने से आ रही अनियंत्रित टैक्सी ने बंदी रक्षक की गाड़ी को टक्कर मार दी। जिससे अनियंत्रित होकर सड़क पर ही गिर गया और टैक्सी भी घटना स्थल पर खम्भे से टकरा गयी। घायल बंदी रक्षक को लोहिया अस्पताल पहुंचाया गया। जहां जेल अधीक्षक कैलाशचन्द्र घटना के सम्बंध में पूछताछ करने पहुंचे।
फर्रूखाबाद: जिला जेल में घटिया खाने को लेकर बन्दियों ने रोष व्यक्त किया। एक विचाराधीन बन्दी ने पानी जैसी पतली दाल परोसने की शिकायत की। इस पर बंदी ने बंदीरक्षकों ने लाठी डंडे चला दिये। जिससे एक बंदीरक्षक सहित दो विचाराधीन बंदी गम्भीर रूप से घायल हो गये। जिला कारागार अधीक्षक कैलाश चंद्र ने बंदीरक्षकों के विरुद्ध कार्रवाई तो दूर उल्टेी बंदी के ही विरुद्ध फतेहगढ़ कोतवाली में झगड़ा करने का मामला दर्ज कराने को तहरीर दी है।
सोमवार देर शाम न्यायालय से लौटे कैदियों की गिनती हो जाने के बाद जिस वक्त बंदियों को रात का खाना परोसा जा रहा था तभी जिला जेल में निरूद्ध बंदी धीरज सिंह चौहान पुत्र देवेन्द्र सिंह ने यह कहकर वबाल मचा दिया कि उसे पानी बाली दाल नहीं खानी है। पहले तो बंदीरक्षक धीरज सिंह ने कैदियों के खाने पीने में किये जा रहे गोलमाल को छिपाने के लिये बंदी धीरज को समझाने का प्रयास किया जब बंदी नहीं माना तो उसने पुलिसिया रंग अपना लिया। इस दौरान बंदीरक्षक धीरज ने अपने हमनाम विचाराधीन बंदी धीरज को लाठी डंडों से मारना शुरू कर दिया उसके इस अमानवीय व्यवहार से अन्य बंदीरक्षक साथ हो गये। काफी देर तक साथी बंदी को पिटता देख रहे। साथी बंदी पर अत्याीचार देख अन्य बंदी भी बगावत पर उतर आये। यह देखकर कारागार अधीक्षक ने निहत्थे बंदियों पर लाठीचार्ज करने का फरमान जारी कर दिया। किसी तरह मामला काबू मे आने पर सभी बंदी एक एक कर बैरकों में भूखे ठूसकर बंद कर दिये गये। करागार अधीक्षक ने धीरज सिंह चौहान के खिलाफ सरकारी काम में बाधा डालने का अभियोग फतेहगढ़ कोतवाली में दर्ज कराया है।
Posted on : 15-05-2013 | By :
जेएनआई डेस्क | In :
Delhi, JAIL
संजय दत्त के सरेंडर करने में बस एक दिन और रह गया है। सजा के बचने के लिए संजय की पुनर्विचार याचिका भी खारिज हो चुकी है। बस अब ये तय होना है कि उन्हें कोर्ट में सरेंडर करना है या यरवडा जेल में। संजय दत्त कोर्ट की बजाय जेल में सरेंडर करना चाहते हैं।

अगर संजय दत्त पुणे की यरवडा जेल जाते हैं तो सूत्रों के मुताबिक बैरक तीन में रहेंगे, जहां पिछली बार भी रह चुके हैं। संजय दत्त ने पिछली बार जेल में मेज कुर्सी बनाने का काम किया था। यरवडा जेल में उन्होंने एक कुर्सी बनाई थी। इस बार वह खाना बनाने का काम करेंगे यानी रियल लाइफ में बावर्ची बनेंगे। इस बार उनकी रोज की कमाई 25 रुपए होगी।
हालांकि उन्हें अपने परिवार से हर महीने 1500 रुपए लेने की इजाजत होगी, जिससे वह सिगरेट खरीदकर पी सकते हैं। इसके अलावा हर संजय को हर महीने मात्र 5 लोगों से 20 मिनट तक मिलने की आजादी होगी।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 21 मार्च को गैरकानूनी रूप से हथियार रखने के लिए संजय दत्त की सजा बरकरार रखी थी। कोर्ट ने संजय दत्त को 5 साल कैद की सजा सुनाई थी। संजय पहले 18 महीने जेल में रह चुके हैं। अब उन्हें जेल में साढ़े तीन साल की और सजा काटनी है। लेकिन, दत्त ने अपनी निर्माणाधीन फिल्मों की शूटिंग खत्म करने के लिए कुछ वक्त मांगते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें समर्पण करने के लिए 4 हफ्ते की मोहलत दी थी।
लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने दलित युवती शशि की हत्या में आजीवन कारावास की सजा पाने वाले पूर्व मंत्री आनंद सेन और उनकी सहयोगी सीमा आजाद को बड़ी राहत देते हुए आज क्लीन चिट दे दी। फैजाबाद की एक अदालत ने 2007 में आनंद सेन और सीमा आजाद को शशि की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार अरोड़ा की खंडपीठ ने आनंद सेन और सीमा आजाद को न सिर्फ क्लीन चिट दी बल्कि उसके ड्राइवर विजय सेन यादव की आजीवन कारावास की सजा को दस साल की कैद में बदल दिया है।

फैजाबाद की अदालत ने 17 मई 2011 को तत्कालीन बीएसपी विधायक और पूर्व मंत्री आनंद सेन उनकी सहयोगी सीमा आजाद और ड्राइवर विजय सेन यादव को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। फैजाबाद की विशेष अदालत ने आनंद सेन और उसके ड्राईवर पर 20 हजार और सीमा आजाद पर 15 हजार रूपये का जुर्माना भी लगाया था।
लखनऊ : नैनी जेल से कचहरी इलाहाबाद पेशी के लिए ले जाये जा रहे दस बंदियों के फरार होने के बाद उप निरीक्षक संजय कुमार, आरक्षी विजय सिंह, कृष्णपाल सरोह, अजय कुमार पाण्डेय समेत पांच पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। पुलिस महानिरीक्षक कानून-व्यवस्था राजकुमार विश्वकर्मा ने बताया कि पेशी के लिए ले जाये जा रहे वाहन में चार पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगी थी, लेकिन एक ही आरक्षी वाहन में बैठा था। यह अक्षम्य लापरवाही है और जांच के बाद इन्हें भी बर्खास्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस मामले में प्रतिसार निरीक्षक की भूमिका की भी जांच होगी और सख्त से सख्त कार्रवाई की जायेगी।
नैनी केंद्रीय कारागार में बंद कै
दियों को आज पुलिस अभिरक्षा में जिला अदालत पेशी के लिए जेल वाहन से ले जाया रहा था। तभी शहर के बालसन चौराहे के पास दस कैदी पुलिसकर्मियों को चकमा देकर वाहन से कूदकर फरार हो गए।
इलाहाबाद के पुलिस अधीक्षक (शहर) शैलेश कुमार यादव ने बताया कि जो कैदी भागे हैं, उसमें से अधिकतर हत्या के आरोप थे। कुछ तो कुख्यात अपराधी थे, जिन पर एक दर्जन से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज थे। उन्होंने कहा कि पुलिस की टीमें गठित कर फरार कैदियों को पकड़ने के लिए अभियान शुरू कर दिया गया है।
यादव ने कहा कि निश्चित तौर पर यह घोर लापरवाही का मामला है। जो पुलिसकर्मी कैदियों को पेशी के लिए लेकर आ रहे थे, उनके खिलाफ कारवाई होगी। घटना की जांच के आदेश दे दिए गए हैं।
FARRUKHABAD : इसे कुदरत का कहर कहें या एक विडम्बना, महज कुछ शारीरिक संरचना में फेरबदल की बजह से किन्नरों को समाज में अलग नजरिये से देखा जाता है। बधाई देकर नेग की कमाई करने वाले किन्नर समाज के लिए कानून तो मर्दों और औरतों जैसा ही है लेकिन इसके बाद की प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों को यह भी नहीं मालूम कि आखिर अदालत से सजा पाये किन्नरों को कारागार में किस जगह रखा जायेगा। किन्नरों पर हुई एफआईआर के बाद जनपद की जेल प्रशासन के हाथ पैर फूल गये हैं। जेल प्रशासन यह नहीं समझ पा रहा कि आखिर इन समाज के प्रथक लोगों को जेल में आने के बाद रखा कहां जायेगा। किन्नर जेल प्रशासन के ही नहीं वल्कि पुलिस प्रशासन के गले की हड्डी बन गये हैं।
बीते दिन आवास विकास निवासी शीतल उर्फ परवेज किन्नर द्वारा कोतवाली में जबर्दस्ती किन्नर बनाने के प्रयास के मामले में शिकायत करने के बाद पुलिस ने तीन किन्नरों पर एफआईआर दर्ज की। एफआईआर दर्ज होने से पहले जब किन्नरों को पुलिस की लापरवाही की भनक लगी तो वादी पक्ष के किन्नर कोतवाली आ धमके और जमकर नंगनाच किया। बाद में पुलिस के समझाने बुझाने पर किन्नर शांत हुए। जिस पर शहर कोतवाल रूम सिंह यादव से पूछा गया कि अगर किन्नर और उग्र हो जाते हैं तो आप कौन सी पुलिस बुलाते- महिला या पुरुष? पीछे से बैठे एक सज्जन ने मजाकिया अंदाज में कहा- किन्नर पुलिस। जिस पर कोतवाल ने कहा कि मैं किसी को नहीं बुलाता खुद लाठी लेकर किन्नरों को खदेड़ देता। इस पर फिर प्रतिक्रिया हुई कि मानवाधिकार का क्या? जिसके बाद कोतवाल साहब खोपड़ी खुजलाने लगे। यहां तक तो मामला ठीक था। लेकिन अब एफआईआर दर्ज होने के बाद जेल प्रशासन के माथे पर पसीने की बूंदें छलकती नजर आ रहीं हैं।
इस सम्बंध में जिला जेल अधीक्षक कैलाशचन्द्र से पूछा गया कि किन्नरों को जेल में रखने के लिए क्या व्यवस्था है और क्या पहले से कोई कानून आपकी नजर में है। जिस पर जिला जेल अधीक्षक ने तत्काल बगल में बैठे जेलर से पूछा क्यों भाई जेलर साहब किन्नर अगर जेल में आते हैं तो कहां रखोगे। काफी देर विचार विमर्श करने के बाद जेल अधीक्षक ने कहा कि वैसे इस सम्बंध में हमें कोई विशेष जानकारी नहीं है। मेरे सेवाकाल में कोई भी किन्नर जेल में नहीं आया है, फिर भी उन्हें प्रथक रखा जायेगा।
वहीं केन्द्रीय कारागार के अधीक्षक यादवेन्द्र शुक्ला ने इस सम्बंध में बताया कि उनके 50 साल के सेवाकाल में कोई भी किन्नर जेल में सजा काटने नहीं आया। उन्होंने कहा कि किन्नरों के आने पर यह समस्या तो खड़ी ही होगी कि उन्हें पुरुष बैरक में रखा जाये या महिला बैरक में। किसी भी जेल में यही समस्या आयेगी। फिर काफी दिमाग लगाने के बाद श्री शुक्ला ने कहा कि नहीं अगर महिला किन्नर है तो उसे महिलाओं के साथ और पुरुष किन्नर है तो पुरुषों के साथ रखा जायेगा। लेकिन फिर अधीक्षक महोदय चकरा गये। नहीं नहीं पुरुष किन्नर भी महिलाओं जैसे सेक्सी कपड़े इत्यादि पहनते हैं। जिससे कोई भी घटना घट सकती है। फिलहाल अगर किन्नर आते हैं तो उन्हें अलग बैरक में रखने की व्यवस्था करायी जायेगी।
पंजाब के पटिलया की दो वर्ष पुरानी घटना है जहां डेरा बस्सी पुलिस की तरफ से सुभाष पुरी निवासी डेरा बस्सी के खिलाफ एक मामले में उसे सजा होने के बाद उसका डाक्टरी मुआयना करवा कर पटियाला की महिला जेल भेज दिया। इसके उपरांत 10 /4/2010 को पुरी को लुधियाना स्थित महिला जेल में भेज दिया गया, जहां उसकी फिर से मैडीकल जांच की गई। परन्तु इस के बावजूद उपरोक्त एड्ज पीडि़त पुरुष की पहचान करने वाले डाक्टरों ने आंखें बंद रखीं और सुभाष पुरी नाम का यह पुरुष नकली किन्नर के रूप में 7 जुलाई, 2010 (करीब चार महीने) तक महिलाओं के साथ दिन-रात लुधियाना की जेल में बंद रहा। इस बात का पता तब लगा जब जेल में बंद महिलाओं ने उसकी पोल खोली। इस मामले में जेल मैनुअल के रूल 147 की उल्लंघना हुई।
कानूनी सलाहकारों की मानें तो जेल अधिकारियों को यह अधिकार होता है कि वह किसी अलग बैरंग में किन्नरों को रख सकते हैं। लेकिन एक लम्बे काल से कोई किन्नर जेल में नहीं गया है इसलिए जेल अधिकारी इस तरह की व्यवस्था से अनभिज्ञ हो सकते हैं।
FARRUKHABAD : जनपद में कैदियों को पेशी पर लाने के लिए पुलिस प्रशासन चकरघिन्नी बना हुआ है। प्रति दिन एक नई मांग कर कैदी हंगामा खड़े कर रहे हैं। बीते दिनों ही कैदियों ने हवालात में साफ सफाई का रोना रोया था जिसको लेकर काफी हंगामा किया गया था लेकिन मंगलवार को कैदियों ने मात्र इसलिए हंगामा कर पेशी पर जाने से ही इंकार कर दिया कि हवालात में 63 कैदी भरे गये थे।
विदित हो कि जनपद में कैदियों के पुलिस हिरासत से भागने एवं शेशन हवालात से भागने का पुराना इतिहास रहा है। पिछले दिनों शेशन हवालात से ही 8 कैदी दीवार काटकर भाग गये थे। जिससे पुलिस कैदियों को लेकर काफी चौकसी बरत रही है। वहीं कैदी आये दिन किसी न किसी बात को लेकर हंगामा खड़ा कर रहे हैं। बीते दिनों ही कैदियों की सुरक्षा के मद्देनजर जिला जज ने हवालात में ही कोर्ट मोहर्रिर व पुलिस को मौजूद रहने के निर्देश दिये गये थे। लेकिन इससे भी कैदी संतुष्ट दिखायी नहीं दे रहे हैं।
बीते दिनों कैदियों ने हवालात में गंदगी होने की भी शिकायत की थी। जिसके बाद हवालात में साफ सफाई के साथ ही रंगाई पुताई भी करवा दी गयी। हवालात में पानी इत्यादि की भी व्यवस्था की गयी है। लेकिन मंगलवार को शेशन हवालात में बंद कैदियों ने फिर हंगामा करना शुरू कर दिया। हंगामे की सूचना पर क्षेत्राधिकारी नगर योगेन्द्र सिंह एवं फतेहगढ़ कोतवाल जितेन्द्र सिंह परिहार मौके पर पहुंचे। जिस पर कैदियों ने कहा कि शेशन हवालात में 63 कैदियों को बंद किया गया है। जिससे वह लोग पेशी पर नहीं जायेंगे। जिस पर क्षेत्राधिकारी व फतेहगढ़ कोतवाल ने कैदियों को काफी समझाने का प्रयास किया। सीओ ने कहा कि यदि वह लोग पेशी पर नहीं जायेंगे तो उनके मुकदमें लंबित पड़े रहेंगे। जिससे उन्हें पेशी पर जाना चाहिए। लेकिन कैदियों ने उनकी एक नहीं सुनी।
फर्रुखाबाद: जनपद में कैदियों के पेशी पर लाने के लिए पुलिस को भारी मसक्कत करनी पड़ रही है। आये दिन पेशी पर आने वाले कैदियों द्वारा बबाल के साथ ही पुलिस गिरफ्त से भागने की घटनायें हो रहीं हैं। शनिवार को पुलिस द्वारा कचहरी स्थित शेशन हवालात में 52 कैदी बंद करने के बाद दूसरी गाड़ी में लाये गये कैदियों को भरना चाहा तो कैदियों ने हंगामा काटना शुरू कर दिया।
शनिवार को लगभग एक सैकड़ा कैदियों को तारीख पर लाया गया था। सुबह लाये गये 52 कैदियों को शेशन हवालात में भूसे की तरह ठूंस दिया गया। 52 कैदी एक ही हवालात में बंद होने से पहले ही कुलबुला रहे थे। तभी पुलिस एक गाड़ी में भरकर कुछ और कैदी लायी और उसी शेशन हवालात में ठूंसने जा रही थी। तभी कैदियों ने हंगामा करना शुरू कर दिया। कैदियों ने एक साथ मांग रखी कि उन लोगों को गाड़ी में ही रखा जाये और वहीं से पेशी पर ले जाया जाये। जिसके बाद जैसे तैसे कैदियों को शांत किया जा सका।
फर्रुखाबाद: जिला जेल में बलात्कार के आरोपी बंदी द्वारा शुक्रवार की सुबह पीपल के पेड़ से फांसी पर लटक जाने की खबर पर डीआईजी शरद कुलश्रेष्ठ ने जिला जेल व लोहिया अस्पताल पहुंचकर जांच पड़ताल की। उन्होंने इस सम्बंध में जेल अधिकारियों से बातचीत की। बातचीत के दौरान जेल अधिकारियों के तर्कों से डीआईजी संतुष्ट दिखायी नहीं दिये।
विदित हो कि जिला जेल के बंदी सुनील उर्फ चंकी निवासी मेरापुर बीते दो वर्ष से बलात्कार के आरोप में जिला जेल की बैरक नम्बर 7ए में बंद है। शुक्रवार को सुबह सुनील ने बैरक के पीछे खड़े पीपल के पेड़ से अपने ही अंगोछे से लटक कर फांसी लगा ली। जब यह दृश्य साथ के अन्य कैदियों को दिखा तो जेल में हंगामा हो गया। घटना की सूचना जेल अधिकारियों को लगते ही अधिकारियों के हाथ पांव फूल गये व सूचना उच्चाधिकारियों को भी दी गयी। गंभीर अवस्था में कैदी को लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया।
कैदी द्वारा फांसी लगा लेने की सूचना डीआईजी शरद कुलश्रेष्ठ को दी गयी। डीआईजी ने जिला जेल पहुंचकर जेल अधिकारियों से बातचीत की। बातचीत के दौरान जब डीआईजी संतुष्ट नहीं हुए तो उन्होंने लोहिया अस्पताल पहुंचकर कैदी सुनील के हालचाल लिये। उन्होंने कैदी सुनील से भी आत्महत्या की बजह पूछी लेकिन कोई भी मामला साफ नहीं हो सका।
इस सम्बंध में उन्होंने कहा कि वह कल शनिवार को यहां रुककर मामले की जांच करेंगे। साफ तौर पर वह जेल अधिकारियों द्वारा घटना के सम्बंध में किये गये तर्कों से संतुष्ट नजर नहीं आये।
Posted on : 22-02-2013 | By :
जेएनआई डेस्क | In :
JAIL
फर्रुखाबाद- जिला में बंद विचाराधीन बंदी सुनील उर्फ चंकी निवासी मेरापुर ने शुक्रवार को जिला जेल में पीपल के पेड़ से लटक फांसी लगा ली। अन्य बंदियों द्वारा देखे जाने पर शोर मचाने के बाद चंकी को उतारकर गंभीर अवस्था में लोहिया अस्पताल भेजा गया।
थाना मेरापुर क्षेत्र का निवासी 22 वर्षीय सुनील उर्फ चंकी विगत दो वर्षों से बलात्कार के आरोप में जिला जेल में बंद है। शुक्रवार को दोपहर लगभग 3 बजे सुनील ने बैरिक नंबर 7-ए के पीछे खड़े पीपल के पेड़ पर अपने अगौछे का फंदा बना कर फांसी लगा ली। इसी दौरान अन्य कैदियों ने उसे फांसी पर झूलते देख शोर मचाया तो बाकी कैदियों व बंदी रक्षकों ने दौड़कर उसे फंदे से नीचे उतारा। आनन फानन में सुनील को लोहिया अस्पताल भेजा गया। सूचना मिलने पर नगर मजिस्ट्रेट मनोज कुमार व क्षेत्राधिकारी नगर योगेंद्र कुमार सिंह ने लोहिया अस्पताल पहुंचकर पूंछ तांछ शुरू कर दी है।
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