नगर निकाय चुनाव पर हाई कोर्ट की रोंक जारी

FARRUKHABAD NEWS

लखनऊ: हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच की ओर से प्रदेश के नगर निकाय चुनावों की अधिसूचना पर सोमवार को लगाई गई रोक कल तक जारी रहेगी। नगर निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण लागू करने में प्रक्रिया का पालन न करने का आरोप राज्य सरकार पर लगाते हुए, दाखिल जनहित याचिका पर न्यायमूर्ति डीके उपाध्याय की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने यह आदेश दिया है। आज हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से जवाब देने के लिए एक दिन का और समय देने की मांग की गई थी जिसे न्यायालय ने मंजूर कर लिया।
नगर निकाय चुनाव की अधिसूचना पर क्‍यों लगी रोक
वैभव पांडेय सहित कई याचीगणों ने अलग अलग याचिकायें दायर करके नगर निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण लागू करने में प्रक्रिया का पालन न करने का राज्य सरकार पर आरोप लगाया था। याचीगणों की ओर से दलील दी गई कि सुप्रीम कोर्ट ने इसी साल सुरेश महाजन के मामले में दिये गये निर्णय में स्पष्ट तौर पर आदेश दिया था कि स्थानीय निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण जारी करने से पहले ट्रिपल टेस्ट किया जाएगा और यदि ट्रिपल टेस्ट की औपचारिकता नहीं की जा सकी है तो एससी व एसटी सीटों के अलावा बाकी सभी सीटों को सामान्य सीट घोषित करते हुए, चुनाव कराए जाएंगे।ओबीसी के लिए आरक्षित सीटों को भी क‍िया गया शाम‍िल
आरोप लगाया गया कि शीर्ष अदालत के स्पष्ट दिशानिर्देशों के बावजूद राज्य सरकार ने बिना ट्रिपल टेस्ट के 5 दिसम्बर 2022 को ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया जिसमें ओबीसी के लिए आरक्षित सीटों को भी शामिल किया गया। याचिका का राज्य सरकार की ओर से विरोध करते हुए कहा गया कि इससे चुनाव कराने में देरी होगी। यह भी दलील दी गई कि 5 दिसम्बर का नोटिफिकेशन एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन है, याची या जो भी व्यक्ति इससे असन्तुष्ट हैं, वे आपत्तियां दाखिल कर सकते हैं।
राज्य सरकार दलील से संतुष्ट नहीं हुई कोर्ट
कोर्ट राज्य सरकार की इस दलील से संतुष्ट नहीं हुई और चुनावी अधिसूचना के साथ-साथ 5 दिसम्बर 2022 के उक्त ड्राफ्ट नोटिफिकेशन पर भी अंतरिम रोक लगा दी। कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया हमें लगता है कि यदि राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय की गई प्रक्रिया को अपनाने की मंशा रखती तो 5 दिसम्बर को जारी ड्राफ्ट नोटिफिकेशन में ओबीसी सीटों को शामिल नहीं किया जाता क्योंकि ओबीसी सीटों को तभी अधिसूचित किया जा सकता है जबकि ट्रिपल टेस्ट औपचारिकता को पूरा न कर लिया जाए।