दाता एक राम भिखारी सारी दुनिया

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manas 1फर्रुखाबाद: मानस सम्मेलन के तीसरे दिन मानस विद्वानों ने पार्वती चरित्र, राम वनगमन तथा लक्ष्मण गीता प्रसंग की व्याख्या की। सुपुत्र को पिता की विरासत को बढ़ाने वाला तथा कुपुत्र को पिता की विरासत को बर्बाद करने वाला बताया।

मोहल्ला अढ़तियान स्थित मिर्चीलाल के फाटक में मानस विचार समिति के तत्वाधन में संयोजक डा0 रामबाबू पाठक के सानिध्य में ग्वालियर से आये डा0 मानस मनोहर दुबे ने ‘‘लक्ष्मण गीता‘‘ प्रसंग पर कहा कि भगवान श्रीराम व देवी सीता को वन में कुश के आसन पर सोते हुए देखकर लक्ष्मण जी दुखी है। वह निषादराज से कहते है कि श्री राम अयोध्या के युवराज एवं सीता जी राजा जनक की पुत्री है सभी राजसी ठाठ/बाट अयोध्या में थे फिर भी श्री राम सीता वनवासी की भाँति जीवन व्यतीत कर रहे है। डा0 दुबे ने कहा कि प्रम व राग द्वेष में काफी अन्तर है प्रेम केवल दूसरो को देना जानता है जबकि रागद्वेष दूसरों को कुछ देना नही बल्कि लेना ही चाहता है। अतः हम सक्रर्म करे हमारे राग द्वेष स्वतः मिट जायेगे। उन्होने कहा कि संक्रर्म हमेशा नही होते कभी न चाहते हुए भी दुष्कर्म हो जाता है जिसकी हमें सजा मिलती है।

झाँसी से आये मानस विद्वान अरुण गोस्वामी ने पार्वती चरित्र प्रसंग पर बोलते हुए कहा कि एक बार लक्ष्मी जी ने पार्वती से कहा कि आप हिमाचल राजा की पुत्री है और भोलेनाथ के साथ जंगल में रहती है तुम्हारे रहने के लिए एक मकान तो होना चाहिए। इस पर पार्वती ने भोलेलाथ से कहा कि मेरे लिए एक सुन्दर भवन का निर्माण कराओ। त्रिया हट तथा बाल हट काफी प्रबल होता है। पार्वती ने कहा अगर भवन नही बनवाओये तो मैं अन्न जल त्याग दूँगी। भोलेनाथ के काफी समझाने पर जब पार्वती नही मानी तो उन्होने ब्रहमा को बुलाकर सोने का भवन बनाने को कहा। ब्रहमा जी द्वारा निर्मित भवन में गृह प्रवेश के लिए राजा इन्द्र, विष्णु सहित करोड़ो देवताओं को नारद जी द्वारा आमंत्रित किया गया। जब लक्ष्मी जी ने बैकुंठ से सुन्दर सोने के भवन को देखा तो इच्छा प्रकट की वह विष्णु के साथ यही रह जाये। गृह प्रवेश के पूजन के लिए रावण के पिता विस्रवा मुनि को बुलाया गया। भोलेनाथ ने पार्वती से सोने के महल में रहने को कहा और स्वयं तो जंगल में धूनी रमाने की बात कही इस पर पार्वती अकेले रहने को तैयार नही हुई। भोलेनाथ ने विस्रवामुनि से दक्षिणा माँगने को कहा तो विस्रवा मुनि ने सोने के महल को ही दक्षिणा में मांग लिया और बाद में वह लंकापति रावण को मिला। उन्होने कहा भोलेनाथ से बढ़ा विश्व में कोई दानी नही है।

डा0 राम बाबू पाठक ने ‘‘धन्य जनम जगती तल तासू‘‘ प्रसंग पर कहा राम राज्याभिषेक को सन्तो के कल्याण के कारण विधाता ने टाल दिया था। माता कैकेयी और मन्त्री सुमन्त दोनो चाहते थे कि श्री राम सन्तो का उद्वार व राक्षसो का नाश करने के लिए वन को जाये और राजा दशरथ को भी रामवनगमन में मौन स्वीकृति थी। बिठूर कानपुर के स्वामी शिवचेतन ब्रहमचारी ‘‘दाता एक राम भिखारी सारी दुनिया‘‘ भजन प्रस्तुत कर कहा कि मीरा ने कृष्ण तथा कबीर ने भी कृष्ण को अपना आराध्य मानकर उसमें विलीन हो गये हमें एक ही प्रभु का केवल ध्यान करना चाहिए। तभी हमारा कल्याण सम्भव है।

‘अन्त में जालौन के ईश्वर दास ब्रहमचारी ने भजन प्रस्तुत किया – किसी दिन देख लेना तुझे कोई ऐसी नींद आयेगी, तू सोया फिर न जागेगा, तुझे दुनिया जगायेगी। संचालन पं0 रामेन्द्र नाथ मिश्र तथा तबले पर संगत मुन्ना सिंह चौहान ने की।इस मौके पर दिवाकर लाल अग्निहोत्री, अशोक रस्तोगी, भारत सिंह, आलोक गौड़, व्यवस्थापक सुजीत पाठक वन्टू, अमन चतुर्वेदी, अजीत, अदुभुत व अमन पाठक, लकी सक्सेना, रमेश चतुर्वेदी, मधु गौड़, विजय लक्ष्मी पाठक, रजनी सिन्धी सहित सैकड़ो श्रद्धालु मौजूद रहे।