भारत रत्‍‌न : चरण स्पर्श से रोका, कर्म करने की दी सीख

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atal-bihariलखनऊ: पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी जात-पात और धर्म से बढ़कर मानवता और मानव को महत्व देते थे। 25 साल पहले अटल जी से हुई मुलाकात और 15 मिनट के उस अनुभव की यादकर कानपुर के वरिष्ठ अधिवक्ता कौशल किशोर शर्मा फिलहाल यही कहते हैं। अटल जी से तब मिली प्रेरणा को उन्होंने जीवन का मूलमंत्र बनाया और आज भी ज्यादातर वक्त किताबों में ही गुजारते हैं।

बात 1989 की है। परेड में रहने वाले स्व.संतोष शुक्ला कानपुर देहात की राजपुर विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़े थे। कई बूथों पर मतदान को लेकर उन्हें धांधली की शिकायत थी, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही थी। जिसके बाद तय किया कि वह अटल जी से शिकायत कर पुर्नमतदान की अपील करेंगे। आरएसएस कार्यकर्ता कौशल किशोर शर्मा के साथ वह दिल्ली गये। यहां सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता डा.एनएस घटाटे के साथ दोनों अटल जी के अशोक रोड दिल्ली स्थित घर पहुंचे। अटल जी को सामने देखकर संतोष पैर छूने के लिए आगे बढ़े तो अटल जी पीछे हट गये। इस पर संतोष ने कहा कि मान्यवर ब्राह्माण आशीर्वाद देगा और लेगा नहीं तो काम कैसे चलेगा। अटल जी ने नाम पूछने के बाद बैठने के लिए कहा।

इसके बाद उन्होंने कहा कि ब्राह्माण तब पूजा जाता था जब वह अध्ययन और अध्यापन कार्य करता था। राजा बनने के लिए नहीं बल्कि बनाने का कार्य करता था। इस मूल कर्म को छोड़कर एजेंसी चलाने वालें अपेक्षा करते हैं कि लोग आशीर्वाद लें, यह गलत है। मूल कर्म की ओर लौट जाइये, अध्ययन अध्यापन का कार्य कीजिए, सम्मान अपने आप होने लगेगा। अधिवक्ता कौशल जी उनकी इस बात को उन्ही के शब्दों में बयां करते हुए कहते हैं कि वह संस्मरण आज भी उनकी यादों में ताजा है। इस संस्मरण ने उनके अधिवक्ता बनने की राह तैयार की।

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हटिया खुली बजाजा बंद, झाडे़ रहो कलक्टरगंज

अटल जी का कानपुर से गहरा जुड़ाव रहा। वह यहां की मौज मस्ती, लोगों के मस्तमौला अंदाज, बाजारों की रौनक आदि से खूब वाकिफ हो गये थे। कानपुर की इन सारी खूबियों को करीब 1981 में फूलबाग मैदान में हुई जनसभा में उन्होंने अपने अंदाज में कहा ‘हटिया खुली बजाजा बंद, झाडे़ रहो कलक्टरगंज’।

उनके मुख से निकले इन शब्दों को आज भी लोगों के मुंह से कहते हुए सुना जा सकता है। लोग बात बात में झाड़े रहो कलक्टरगंज बोलते हैं। उनसे जुड़े हुए कई सारे संस्मरण अटल जी से जुड़े पुराने लोगों के जेहन में कौंध गये। वरिष्ठ भाजपा नेता व पूर्व जिलाध्यक्ष गोपाल अवस्थी ने एक संस्मरण सुनाते हुए कहा कि वर्ष 1982 में एक कार्यकर्ता सम्मेलन करवाया था। सम्मेलन चुन्नीगंज में था। सुबह जब स्टेशन पर अटल जी को लेने के लिए पहुंचे तो उन्होंने कहा इस भीषण सर्दी में तुम सम्मेलन करवा रहे हो कोई आएगा कि नहीं। इसके बाद उन्हें लेकर मैं सर्किट हाउस पहुंचा। वहां पर अटल जी ने नींबू वाली चाय मंगवाई। मैनें पूछा यह चाय पीते हैं आप तो बोले तुम्हारी तोंद निकल रही है यही पिया करो और मिठाई भी कम खाओ तुम ठीक हो जाओगे। शाम को जब कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे तो कार्यकर्ताओं की भीड़ देखकर उत्साहित हुए। महिला कार्यकर्ताओं ने अटल जी से कहा कि आप बहुत दुबले हो गये हैं तो उन्होंने फिर से कहा मैं फिट हूं मैं तो गोपाल जी से कह रहा था नींबू वाली चाय पिया करो तोंद नहीं निकलेगी।