दलालों का दंस : जनपद में पच्चीस तो दूसरे जिले में पचास प्रतिशत मिलता मरीजो पर कमीशन

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फर्रुखाबाद: आम जनता को ना तो मोदी से मतलव है और न ही केजरीवाल से उसे बस दो जून की रोटी मिल जाये तो वह संतुष्ट हो जाती है| लेकिन जनपद में दालरोटी तो जनता जैसे तैसे जुटा लेती है लेकिन गरीब के गरीब के घर जब बीमारी घर कर जाती है तो वह सरकारी अस्पताल की तरफ भागता है| उसे यह नही मालूम की जहा वह जा रहा है वहा पर्चा तो एक रूपये का ही बनता है लेकिन बाद में उस एक के पीछे कितने जीरो लग जाये इसका भगवान हीं मालिक है| उसे यह भी नही मालूम की अस्पताल के अन्दर मीठी भाषा में बात करने बाला आदमी आखिर है कौन और वह इस तरह से उसे राय किस लिये दे रहा है| जनपद क्या शहर के जितने भी अस्पताल है अधिकतर सभी ने दलालों का एक बड़ा गैग बना रखा है , जो मरीज उनके अस्पताल में लाते ही हजारो रूपये का मालिक बन जाता है और प्याज मरीज की जेब पर कतरा जाता है| जनपद के अस्पतालों में बाहर से मरीज को लाकर निजी अस्पताल में भर्ती करने के बदले में दलाल को कुल बिल का पच्चीस प्रतिशत भुगतान होता है | जिससे दलालो का एक बड़ा समूह राम मनोहर लोहिया अस्पताल के अन्दर रात भर अपने शिकार की तलाश में बैठा रहता है|
Lohia Hospital
लोहिया अस्पताल दलालों के दंस से पूर्व से ही जकड़ा हुआ है| ना जाने कितने ही प्रयास किये गये की दलालों के प्रवेश पर रोक लगायी जाये| लेकिन प्रशासन के तरकस के तीर भी ख़त्म हो गये और कोई भी दलाल इसका शिकार नही हुआ| दरअसल लोहिया के आसपास में तकरीवन एक दर्जन अस्पताल है, मजे की बात यह है की जादा तर अस्पताल भी मानक के अनुरूप नही बने है हद तो तब पता चलती है जब आप देखेगे की किसी अस्पताल में डाक्टर तक नही है और उन अस्पतालों में मरीज सिर्फ पैसा हडपने के लिये ही भर्ती किये जाते है मजे की बात तो यह है की डाक्टर के पास डिग्री कोई है और अस्पताल के बोर्ड पर अंकित अन्य डिग्री कर रखी है|

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बाहर से आने बाले मरीजो को आपात कालीन कक्ष में भर्ती किया जाता है और पहले से ही घात लगाये बैठे निजी अस्पतालों के दलाल लोहिया अस्पताल में ठीक से इलाज ना हो पाने की बात कहते है बात करने में माहिर यह दलाल मरीज को यह यकीन दिला देते है की उनका बाहर के डाक्टर से अच्छा परिचय है और उसका कम बजट पर इलाज करा देगे| दलालों की बात पर मरीज का तीमारदार जल्द ही यकीन कर लेता है और फिर शुरु होता है उसकी जेब पर डाका|

भर्ती करते ही मरीज से एक मोटी रकम बसूल की जाती है और कुल बजट में से दस से पच्चीस प्रतिशत दलाल को थमा दिया जाता है| और आम आदमी कर्ज के बोझ टेल दब जाता है|

दुसरे जनपदों में कुल बिल के आलावा डाक्टर के पर्चे तक में मिलता है मोटा कमीशन

दलालों का जाल जनपद के आलावा दुसरे जनपदों में भी फैला है यहाँ दलालों को और भी अधिक कमीशन दिया जाता है |एक दलाल ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया की जब मरीज को कानपुर, लखनऊ,आगरा हम लोगो के जरिये ले जाया जाता है तो कुल बिल का पचास प्रतिशत रुपया तक हम लोगो को मिलता है| वही डाक्टर के पर्चे पर भी पचास प्रतिशत से अधिक का भुगतान हम लोगो को मिलता है यैसे में एक मरीज पर मोटी रकम हम लोगो को मिल जाती है|

रिफर करने बाले डाक्टर को मिलता है पैकट
जिस डाक्टर ने मरीज को एक अस्पताल का नाम बता कर भेज दिया तो वह अस्पताल उस डाक्टर को एक लिफाफा पहुचता है जिसमे एक तय दर के आधारके हिसाब से रकम होती है | कुल मिला कर सारा खर्च मरीज के ऊपर ही जोड़ दिया जाता है |

दलालों पर शिकंजा कसने के लिये जिलाधिकारी से लेकर ना जाने कितने लोगो ने प्रयास किये लेकिन सारे प्रयास असफल रहे और आज भी लोहिया अस्पताल दलालों की मंडी बना हुआ है | नहीं किसी पर रिपार्ट दर्ज की गयी न किसी को गिरफ्तार किया गया |