आज भी हत्या के मामले में सजायाफ्ता अपराधी जेल से चला रहा है बेसिक शिक्षा की यूआरसी

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corruptionFARRUKHABAD : बेसिक शिक्षा विभाग में नगर क्षेत्र के अध्यापकों पर आज भी बीएसए का नहीं वल्कि जिला जेल में हत्या के आरोप में सजा काट रहे एक अपराधी का आदेश चलता है। यह साम्राज्य सजायाफ्ता कैदी के एक गुर्गे की मदद से आज भी कायम है। विदित है कि यह सजायाफ्ता कैदी कभी इसी शहर में यूआरसी के पद पर तैनात था। हत्या के एक मामले में सजा के बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी ने दर्जनों शिकायतों और सूचना अधिकार अधिनियम के अन्तर्गत मांगी सूचनाओं के दबाव में तत्कालीन एयूईआरसी (नगरीय शिक्षा संशाधन केन्द्र सह समन्वयक) रमाकांत तिवारी को बर्खास्त तो कर दिया परन्तु उसके स्थान पर पूर्णतः नियम विरुद्व ढंग से तिवारी के ही एक गुर्गे सुशील मिश्रा को बिना किसी नियमित चयन प्रक्रिया के कार्य सौंप दिया। रविवार को एक लेखपाल की पत्नी की राशन कार्ड सत्यापन में अनियमित रूप से ड्यूटी लगाये जाने पर हुए विवाद के बाद यह बात भी निकल कर आयी है कि विवाद वास्तव में सम्बद्धीकरण के दौरान शिक्षिका से मासिक अवैध वसूली के बकाये की खुन्नस का था।

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बेसिक शिक्षा विभाग में अनियमित सम्बद्धीकरण या अनुपस्थिति के दौरान स्कूलों में शिक्षण कार्य किये बिना ही वेतन निकालने का एक स्थापित उद्योग चल रहा है। उच्चाधिकारियों की अनुमति तो दूर जानकारी तक के बिना खण्ड स्तर के अधिकारी शिक्षकों को 5 से 10 हजार तक की एक निर्धारित मासिक वसूली के आधार पर स्कूल जाये बिना ही वेतन आहरण का ठेका लेते हैं। नगर क्षेत्र में भी यह कारोबार जोर शोर से चल रहा है। नाम के लिए तो नगर शिक्षा अधिकारी का चार्ज खण्ड शिक्षा अधिकारी बढ़पुर प्रवीन शुक्ला के पास है परन्तु इसका वास्तविक कर्ता धर्ता सुशील मिश्रा नाम का प्राथमिक विद्यालय का एक सहायक अध्यापक है, जोकि मृतक आश्रित के तौर पर नियुक्त अप्रशिक्षित अध्यापक है। जिसको कि नगरीय शिक्षा संशाधन केन्द्र सह समन्वयक का चार्ज दे दिया गया है। जबकि नियमानुसार इस पद पर नियुक्ति के लिए बाकायदा विज्ञापन निकालकर आवेदन आमंत्रित कर विभागीय परीक्षा के उपरांत ही नियुक्ति की जा सकती है। जिसके लिए न्यूनतम अर्हता प्राथमिक विद्यालय का प्रधानाध्यापक अथवा पूर्व माध्यमिक विद्यालय का सहायक अध्यापक होना अनिवार्य है। सवाल यह उठता है कि आखिर बेसिक शिक्षा अधिकारी ने तमाम नियम कायदों की धज्जियां उड़ाकर एक अनट्रेंड शिक्षक को इतनी बड़ी जिम्मेदारी कैसे दे दी।

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आइये इसकी कहानी हम आपको सुनाते हैं- वास्तव में सुशील मिश्रा हत्या के मामले में एक सजायाफ्ता अपराधी का एक गुर्गा मात्र है। उसकी इस पद के लिए एक मात्र योग्यता यह है की उसने वर्षों तक पूर्व यूआरसी रमाकांत तिवारी को मोटरसाइकिल पर लाद कर घुमाया है|लगभग तीन वर्ष पूर्व हत्या के एक मामले में सजा सुना दिये जाने से पूर्व  तक रमाकांत तिवारी इस पद पर विगत कई वर्षों से तैनात थे। उनकी तैनाती भी बस यूं ही हुई थी। उनके जेल जाने के बाद से  नगर क्षेत्र का वास्तविक कार्यभार आज भी जिला जेल की चाहरदीवारी के पीछे से ही चल रहा है। यही कारण है कि बहाना चाहे कुछ भी बना लें, परन्तु आज भी बेसिक शिक्षा अधिकारी में इस पद पर नियमानुसार किसी अन्य अर्ह शिक्षक की नियुक्ति की हिम्मत नहीं है।

रविवार को एक लेखपाल की पत्नी की ड्यूटी राशनकार्ड सत्यापन में लगा दिये जाने के बाद हुए विवाद के बाद सुशील मिश्रा अचानक चर्चा में आ गये हैं। पता चला है कि लेखपाल की पत्नी को उसकी मूल तैनाती से हटाकर उसके आवास के पीछे स्थित एक नव निर्मित निर्माणाधीन विद्यालय से सम्बद्ध कर दिया गया है। इस विद्यालय के भवन निर्माण प्रभारी भी सुशील मिश्रा ही हैं। बताते हैं कि इस सुविधा के लिए शिक्षिका से पांच हजार रुपये की नियमित मासिक वसूली की जाती रही। इस दौरान शिक्षिका ने अवैध वसूली की धौंस में विद्यालय का मुहं तक देखना बंद कर दिया। बताते हैं कि विद्यालय की प्रधानाध्यापिका ने इस बात का उल्लेख उपस्थिति रजिस्टर में भी किया परन्तु रिश्वत की पट्टी बांधे अधिकारी उसका वेतन नियमित रूप से आहरित करते रहे। बाद में लेनदेन के कुछ विवाद में शिक्षिका का सम्बद्धीकरण समाप्त कर दिया गया।  बकाया धनराशि न मिलने की खुन्नस में ही लेखपाल की बीमार चल रही पत्नी को किसी अन्य शिक्षिका की ड्यूटी काटकर उसके स्थान पर ड्यूटी लगा दी गयी। जब मामला चौड़े में आया तो ये सारे राज खुलकर सामने आ गये।