घायल बच्चों के परिजनों ने दी बीएसए व डीसी के विरुद्ध तहरीर

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bsa bhagwat sharan patel (1)फर्रुखाबाद: रविवार को गणतंत्र दिवस के अवसर पर प्रातः तकरीबन 8 बजे ग्राम पंचायत ढिलावल के ग्राम गढ़िया आरमपुर के नव निर्मित पूर्व माध्यमिक विद्यालय भवन का छज्जा अचानक गिरने से प्रभारी प्रधानाध्यापिका के पति सहित पांच बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गये थे।इस संबंध में बीएसए ने रविवार को भवन प्रभारी के विरुद्ध तहरीर तो दे दी थी परंतु उसमें अनेक तकनीकी त्रुटियां थीं। जिसको देखते हुए घायल बच्चों के परिजनों ने बीएसए को आरोपी बनाते हुए उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के सम्बंध में थाना मऊदरवाजा में तहरीर दी है। [bannergarden id=”8″]

विदित है कि गणतंत्र दिवस पर झण्डारोहण कार्यक्रम में शामिल होने के लिए प्रभारी प्रधानाध्यापिका विनीता राठौर के पति महेश राठौर भी पहुंचे थे। झण्डारोहण के लिए झण्डा टांगने के लिए जैसे ही विद्यालय भवन की छत पर चढ़े वैसे ही छज्जा भरभराकर गिर गया था। जिसमें महेश राठौर सहित विपिन पुत्र नन्हें निवासी गढ़िया, 6 वर्षीय शिवम पुत्र राकेश, टिंकू पुत्र संतोष निवासी आरमपुर, 5 वर्षीय अरुण पुत्र किशनपाल, 5 वर्षीय रानू पुत्र मनोज गंभीर रूप से घायल हो गये थे।

इस सम्बंध में घायल के परिजन जयसिंह पुत्र रामा निवासी नगला नट, राकेश पुत्र प्यारेलाल, किशन पुत्र मुन्शीलाल निवासी नगला नट, मनोज पुत्र रामपाल निवासी आरमपुर, बीरवती पत्नी संतोष निवासी आरमपुर ने बीएसए को दोषी बताते हुए तहरीर में लिखा है कि अगर समय रहते बेसिक शिक्षा अधिकारी भगवत पटेल अवर अभियंता पीएसी कमेटी श्रीचंद्र जिला समन्वयक निर्माण प्रभारी एस एन मिश्रा व भवन प्रभारी प्रदीप सेंगर पर पहले ही कार्यवाही करते तो यह दुर्घटना नहीं घटती। परिजनों ने घटना में बीएस को भी दोषी ठहराते हुए रिपोर्ट दर्ज कर कानूनी कार्यवाही करने के सम्बंध में थाना मऊदरवाजा में तहरीर दी है।

इस सम्बंध में थानाध्यक्ष मऊदरवाजा हरपाल सिंह यादव ने बताया कि स्कूल का छज्जा गिरने के मामले में पहले ही भवन प्रभारी व प्रधान के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत किया जा चुका है। अब एक ही मामले के दस मुकदमें नहीं लिखे जा सकते। इस तहरीर को पूर्व में हुए मुकदमें में ही शामिल कर आवश्यक कार्यवाही की जायेगी।

लेकिन कानूनी जानकारों की मानें तो अगर एक ही घटना में अलग अलग वादी अलग अलग आरोपियों के विरुद्ध तहरीर देते हैं तो मुकदमा अलग अलग ही पंजीकृत होना चाहिए। यहां तो पूर्व में दर्ज एफआईआर के वादी को ही मुल्‍जिम बनाया जा रहा है। पहले दर्ज किये गये मुकदमें में जो वादी था वही परिजनों की तहरीर में आरोपी है। इसलिए मुकदमा कानूनी तौर पर लिखने में कोई समस्या नहीं है।