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नारी का कन्या रूप पूजनीय क्यों ?

भारत त्योहारों का देश है। यहां वर्ष भर त्योहार मनाए जाते हैं। नवरात्र पर्व का हमारे यहां बहुत ज्यादा महत्व माना जाता है। नवरात्र में कन्या-पूजन का बडा महत्व है। सच तो यह है कि छोटी बालिकाओं में देवी दुर्गा का रूप देखने के कारण श्रद्धालु उनकी पूजा-अर्चना करते हैं।

हमारे धर्मग्रन्थों में कन्या-पूजन को नवरात्र-व्रतका अनिवार्य अंग बताया गया है। ऐसा माना जाता है कि दो से दस वर्ष तक की कन्या देवी के शक्ति स्वरूप की प्रतीक होती हैं।

हिंदु धर्म में दो वर्ष की कन्या को कुमारी कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि इसके पूजन से दुख और दरिद्रता समाप्त हो जाती है।

तीन वर्ष की कन्या त्रिमूर्ति मानी जाती है। त्रिमूर्ति के पूजन से धन-धान्य का आगमन और संपूर्ण परिवार का कल्याण होता है।

चार वर्ष की कन्या कल्याणी के नाम से संबोधित की जाती है। कल्याणी की पूजा से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

पांच वर्ष की कन्या रोहिणी कही जाती है। रोहिणी के पूजन से व्यक्ति रोग-मुक्त होता है।

छ:वर्ष की कन्या कालिका की अर्चना से विद्या, विजय, राजयोग की प्राप्ति होती है।

सात वर्ष की कन्या चण्डिका के पूजन से ऐश्वर्य मिलता है।

आठ वर्ष की कन्या शाम्भवी की पूजा से वाद-विवाद में विजय तथा लोकप्रियता प्राप्त होती है।

नौ वर्ष की कन्या दुर्गा की अर्चना से शत्रु का संहार होता है तथा असाध्य कार्य सिद्ध होते हैं।

दस वर्ष की कन्या सुभद्रा कही जाती है। सुभद्रा के पूजन से मनोरथ पूर्ण होता है तथा लोक-परलोक में सब सुख प्राप्त होते हैं।

अमेठी बना उत्‍तर प्रदेश का 72वां जिला

उत्तर प्रदेश सरकार ने कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र अमेठी को जिला घोषित कर दिया है और उसका नाम
अब छत्रपति शाहूजी महाराज नगर होगा। यह यूपी का 72 वां जिला घोषित कर दिया। मुख्यमंत्री मायावती की अध्यक्षता में हुई यूपी कैबिनेट की बैठक में कानपुर देहात का नाम भी बदलकर रमा बाई नगर कर दिया गया है।

इससे पहले भी बीएसपी की सरकार ने 17 दिसंबर 2002 को अमेठी को जिले का दर्जा देते हुए छत्रपति शाहूजी महाराज नगर का नाम दिया था, लेकिन तब भी इसका काफी विरोध हुआ था। इसके बाद मुलायम के नेतृत्व में बनी सरकार ने 7 अक्टूबर 2003 को इसका नाम फिर से अमेठी कर दिया। बीएसपी सरकार ने जब पहली बार अमेठी का नाम बदला था तो कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी वहां की सांसद थीं और अब राहुल गांधी वहां से सांसद हैं।

इसके साथ ही कैबिनेट ने आरक्षण प्रक्रिया जातिगत जनसंख्या के आधार पर करने और उसी के अनुरूप पदों को आरक्षित किए जाने को भी अपनी सहमति दे दी है। दोनों सदनों का मॉनूसन सत्र 6 जुलाई से बुलाने का भी फैसला हुआ है।

दूसरी तरफ, अमेठी का नाम बदलने पर एसपी ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश की बीएसपी सरकार बेवजह जिलों के नाम बदलकर एक वर्ग विशेष के महापुरुषों के नाम पर रख रही है। एसपी के राष्ट्रीय महासचिव राम गोपाल यादव ने कहा कि मायावती सरकार का अमेठी का नाम बदलकर छत्रपति शाहूजी महाराज और कानपुर देहात का रमाबाई नगर रखना संकीर्ण मानसिकता का परिचायक है। कानपुर की पहचान इंटरनैशनल लेवल पर है और अमेठी की भी इसी नाम से पहचान है। इन दोनों के नाम बदले जाने का फैसला अनुचित है।

उन्होंने कहा कि इस सरकार का जनता की समस्याओं से कोई लेना-देना नहीं है। यह सरकार केवल पत्थर लगाने, वर्ग विशेष के महापुरुषों के नाम पर जिलों के नाम रखने, पार्क बनाने और मूतिर्यां लगवाने का ही काम कर रही है, जो चिंता का विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि विकास के नाम पर कोई पैसा खर्च नहीं हो रहा है, बल्कि जमकर पैसा बर्बाद किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नोएडा में चौतरफा नीली पन्नियों से बुत ढके हुए खड़े है, जो रात में प्रेत से नजर आते हैं। यादव ने कहा कि हो सकता है कि यह सरकार जाते-जाते कई जिलों के नाम मायावती के नाम पर भी रख दे।

अनुपम, बब्बन, मामा दोहरे हत्याकांड में फंसे

फर्रुखाबाद1july: दोहरे हत्याकांड में पूर्व बसपा नेता डॉ अनुपम दुबे उनके भाई बब्बन एवं मामा भी फंस गए हैं.

कोतवाली फतेहगढ़ पुलिस ने आज गिरफ्तार कर्नलगंज निवासी पप्पू सिंह व् कल्लू मिश्रा को अदालत में पेश किया. रिमांड मंजूर की कार्यवाही के दौरान खुलासा हुआ कि रज्जन व् विनय शर्मा सगे भाईयों के हत्याकांड में डॉ अनुपम दुबे उनके भाई बब्बन तथा मामा भी अभियुक्त बन गए हैं.

पुलिस अधीक्षक अखिलेश कुमार ने इस बात की पुष्टि की है. मालूम हो कि दवंगई को लेकर बीते दिनों दोनों पक्षों में गोली चली थी. रज्जन व् विनय की मौके पर ही मौत हो गयी थी.

बब्बन उर्फ़ अमित दुबे तथा अजय जाटव उर्फ़ बाबी घायल हो गए थे. अजय का लोहिया अस्पताल व् बब्बन का कानपुर में इलाज हो रहा है. बब्बन की हालत में सुधार है.

यूपी में अनिवार्य शिक्षा- न किताबे, न बस्ता, न मिड डे मील

फर्रुखाबाद: 40 दिन की गर्मियो की छुट्टी ख़त्म होते होते नौनिहालों के भविष्य के लिए केंद्र से लेकर राज्यों तक कई नियम बदल गए| अनिवार्य शिक्षा अधिनियम लागू हो गया, मिड डे मील पर निगाह रखने के लिए कंप्यूटर प्रणाली का प्रयोग कर मोबाइल पर सूचना लेने का तंत्र विकसित हो गया| शिक्षको के वेतनमान में विसंगति भी दूर हो गयी और सरकार ने सत्र शुरू होने से पहले ही जरूरत की सभी चीजे मुहैया कराने के लिए केंद्र से लेकर राज्य तक के सरकारी खजाने खोल दिए गए| हाँ कुछ नहीं बदला तो नौकरशाहों के काम का जज्बा, मास्टर साहब का स्कूल से गायब होना और कागजो में झूठी सूचनाएँ दर्ज करना| तभी तो सत्र के पहले दिन 1 जुलाई को प्रदेश के परिषदीय सरकारी स्कूलों में बच्चे बिना किताब के गए और भूखे लौट आये|

पहले ही दिन धडाम हो गया सर्व शिक्षा अभियान का नारा- सब पढ़े सब बढ़े

जनपद में प्रभारी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी जगरूप संखवार ने बताया कि उन्होंने सत्र के पहले दिन 8 स्कूलों का दौरा किया जिसमे केवल 1 स्कूल में मिड डे मील बनता मिला| खाने की गुणवत्ता की तारीफ किये बिना नहीं रह सके| बच्चों को मिलने वाली मुफ्त किताबों के बारे में बताया कि अभी किताबो का सत्यापन होना बाकी है 4 जुलाई को होगा|

एक अफसर के मुख्यालय पर न होने से बच्चे इस हफ्ते बिना किताब के पढ़ेंगे

यह भी यूपी सरकार की प्रशासनिक व्यवस्था का एक नमूना है, छापाखाना से आने वाली किताबो की गुणवत्ता और अन्य बिन्दुओ पर नियंत्रण रखने के लिए जिला स्तर पर एक प्रशासनिक कमेटी किताबो का सत्यापन करती है उसके बाद वो बच्चो को पढ़ने के लिए स्कूल में भेजी जाती है| यहाँ कमेटी के एक अफसर आज मुख्यालय पर नहीं थे लिहाजा सत्यापन नहीं हुआ और 4 जुलाई को नयी तिथि लगा दी गयी है| अगर उस दिन सब कुछ ठीक ठाक रहा तो सत्यापन हो सकता है| वैसे किताबों के प्रभारी बेसिक शिक्षा कार्यालय के बड़े बाबू पालीवाल ने स्पष्ट किया कि अभी तक 25 प्रतिशत से ज्यादा किताबे आ गयी है, मगर सत्यापन आज एसडीएम के न होने की वजह से न हो सका| यानि सत्र शुरू हो गया और किताबे भी अभी केवल नाम मात्र को आ पायी|

यहाँ सत्र के अंत तक किताबे आती है और कबाड़ी की दुकानों में बिकने की परम्परा है

बच्चो के बस्ते में किताबे सत्र के अंत तक पूरी नहीं हो पाती है, कुछ सत्र की आखिरी परीक्षा तक आती है ऐसी स्थिति में उनका वितरण कम कबाड़ी की गोदामों में पहुचना लाजिमी है| पिछले वर्ष कक्षा 3,4,5 के लिए वर्क बुक सत्र की आखिरी परीक्षा के एक सप्ताह पहले आई थी जो बच्चो को नहीं मिल पायी, संभव है इस साल उनका वितरण हो और भौतिक रूप में उन्हें न मंगाना पड़े और कागजो में ही नए सत्र की वर्क बुक का भुगतान हो जाये| वर्ष 2006-07 में एक ब्लाक में कबाड़ी में बिकते हुए लाखो किताबे पकड़ कर मुकदमा भी लिखाने का उदहारण है इस जिले में|

प्रधान के खातो में प्रयाप्त मिड डे मील की कन्वर्जन कास्ट है, केंद्र सरकार ने खाद्यान पहले ही भिजवा दिया है हाँ शर्म और हया प्रधानो और ग्राम सचिवो को साथ में भेज दी होती तो शायद मिड डे डे मील के चूल्हे जल जाते| बच्चे स्कूल गए बिना पढ़े, बिना खाए लौट आये|
सर्व शिक्षा अभियान का नारा यूपी के लिए हो गया- कम पढ़े कम बढ़े

खैर अनिवार्य शिक्षा का पहला दिन यूपी में धडाम हो गया|

आरती में कपूर का महत्व

हिंदू धर्म में किए जाने वाले विभिन्न धार्मिक कर्मकांडों तथा पूजन में उपयोग की जाने वाली सामग्री के पीछे सिर्फ धार्मिक कारण ही नहीं है इन सभी के पीछे कहीं न कहीं हमारे ऋषि-मुनियों की वैज्ञानिक सोच भी निहित है।

प्राचीन समय से ही हमारे देश में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों में कर्पूर का उपयोग किया जाता है। कर्पूर का सबसे अधिक उपयोग आरती में किया जाता है। प्राचीन काल से ही हमारे देश में देशी घी के दीपक व कर्पूर के देवी-देवताओं की आरती करने की परंपरा चली आ रही है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान आरती करने के प्रसन्न होते हैं व साधक की मनोकामना पूर्ण करते हैं। ऐसी भी मान्यता है कि कर्पूर जलाने से देवदोष व पितृदोष का शमन होता है। कर्पूर अति सुगंधित पदार्थ होता है। इसके दहन से वातावरण सुगंधित हो जाता है।

वैज्ञानिक शोधों से यह भी ज्ञात हुआ है कि इसकी सुगंध से जीवाणु, विषाणु आदि बीमारी फैलाने वाले जीव नष्ट हो जाते हैं जिससे वातावरण शुद्ध हो जाता है तथा बीमारी होने का भय भी नहीं रहता।यही कारण है कि पूजन, आरती आदि धार्मिक कर्मकांडों में कर्पूर का विशेष महत्व बताया गया है।

प्रदेश के सभी जिलों में लगेंगे पावर प्लांट, बनेगी बिजली

लखनऊ|1july: सूबे में वैकल्पिक ऊर्जा के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए हर जिले में सोलर पावर प्लांट लगाए जाएंगे। इतना ही नहीं प्रदेश में बिजली उत्पादन बढ़ाने के लिए पवन ऊर्जा प्लांट लगाने की संभावनाएं भी जल्द तलाशी जाएंगी।

नेडा अध्यक्ष व पावर कार्पोरेशन के सीएमडी नवनीत सहगल ने बुधवार को शक्ति भवन सभाकक्ष में नेडा के कार्यकलापों की समीक्षा की।

सहगल ने प्रदूषण मुक्त वैकल्पिक ऊर्जा के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सोलर पावर प्लांट लगाने के साथ ही पवन ऊर्जा, माइक्रोहाइडिल, चीनी मिलों एवं भूसी आदि से गैसी फायर लगाने की संभावनाएं तलाशने के निर्देश दिये।

निजी क्षेत्र के माध्यम से लगाए जाने वाले प्लांट के लिए उन्होंने निर्देश दिया कि वे इसके लिए सभी जिलों में सर्वे कराकर मुख्यालय को रिपोर्ट भेजें।

सहगल ने कहा प्रदेश के सभी जिलों में सोलर मिशन के तहत 20 मेगावाट बिजली उत्पादन को सौ किलोवाट से लेकर दो मेगावाट बिजली उत्पादन के पावर प्लांट लगाने का प्रस्ताव है। इसके लिए कंसल्टेंट नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है।

बैठक में उन्होंने बुंदेलखण्ड व सोनभद्र जिले में पवन ऊर्जा आधारित पावर प्लांट लगाने के लिए सर्वे का काम जल्द पूरा करने के निर्देश भी सम्बंधित अधिकारियों को दिये।

भुलक्कड़राम हो तो जरा सावधान हो लो

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यदि आप चीजों को इधर-उधर रखकर भूल जाते हैं या फिर किसी आदमी से मिलने के बाद उसे भूल जाते हैं तो जरा सावधान हो जाइये। हो सकता है कि भूल की यह आदत भविष्य में होने वाले स्मृति लोप या याददाश्त की कमी का संकेत हो।

दूसरी ओर, यह भी सच है कि ऐसा कोई इंसान नहीं होगा जो चीजों को इधर-उधर रखकर उन्हें कभी भूलता न हो। भूलने की यह बीमारी आदमी को बचपन से ही

भूल जाने की इस आदत के चलते ही दो जुलाई को ‘फोरगॉट डे’ मनाया जाता है। ज्यादातर दिवसों की तरह इस दिवस के अविष्कारक भी
अमेरिका के लोग हैं जो इस दिन किसी स्थान विशेष पर इकट्ठे होकर भूल जाने के अपने किस्से कहानियों को बड़े चाव से एक-दूसरे को सुनाते हैं।

भूल जाने वालों को घर में जहां भुलक्कड़राम की संज्ञा मिल जाती है वहीं कई बार भूल जाने की समस्या से ग्रस्त पति को पत्नी की जली-भुनी भी सुननी पड़ती है। यदि कोई कर्मचारी ऐसी भूल अपने ऑफिस में करता है तो उसे बॉस की डांट खानी पड़ती है।

मनोविज्ञानी आर. उपाध्याय के अनुसार भूल जाने की छोटी-मोटी घटनाएं अक्सर हर आदमी के साथ होती रहती हैं इसलिए इन्हें किसी विकार से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए लेकिन यदि इंसान जाने पहचाने रास्ते को भूल जाए या फिर भूल में अक्सर अपने घर से आगे निकल जाए तो सावधान हो जाने की जरूरत है।

उनका कहना है कि मनोचिकित्सकों के पास ऐसे कई मामले आते हैं जिनमें लोग जाने पहचाने रास्तों को भूल जाते हैं या फिर घर से निकलते हैं कहीं के लिए लेकिन पहुंच कहीं और जाते हैं। इस तरह की भूल याददाश्त की कमी या स्मृति लोप से संबंधित हो सकती है। इसलिए इसे कभी हल्के में नहीं लेना चाहिए।

सफेद चूहों व केंचुओं की नहीं होगी चीर-फाड़

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जीव विज्ञान की पढ़ाई के दौरान सफेद चूहों, खास किस्म की मछली और केंचुआ जैसे जन्तुओं की चीर-फाड़ पर रोक लगेगी। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की ओर से गठित विशेषज्ञों की कमेटी ने देश भर के जीव विज्ञान के प्रोफेसरों से राय-मशविरा करने के बाद इस आशय की सिफारिश की है। यूजीसी जल्द इस संबंध में अंतिम निर्णय लेकर आदेश जारी कर देगी।

ज्ञात हो कि जीव विज्ञान विषय में उच्च शिक्षा के दौरान प्रायोगिक अध्ययन के लिए विभिन्न जन्तुओं की चीर-फाड़ की जाती है। इस चीर-फाड़ के विकल्प तलाशने के लिए बनाई गई कोर कमेटी ने दो समूह में विभाजित होकर कार्य किया।

आरएल सहेरिया गवर्नमेंट पीजी कॉलेज काला डेरा जयपुर,जूलोजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर और कोर कमेटी के मेम्बर डॉ. बीके शर्मा ने बताया कि नई दिल्ली में यूजीसी ने 25 और 26 जून को कोर कमेटी की बैठक बुलाई थी। बैठक में देशभर के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के जूलोजी विभाग के 30 प्रोफेसर्स को राय लेने के लिए बुलाया गया था।

डॉ.शर्मा ने बताया कि 26 जून को विषय विशेषज्ञों की आम राय के बाद कोर कमेटी मेम्बर्स ने स्नातक स्तर पर जन्तुओं के विच्छेदन पर पूर्ण रोक लगाने के लिए प्रस्ताव तैयार कर यूजीसी को सौंप दिया है। कमेटी की सिफारिश लागू करने के बाद लैब में केवल फैकल्टी ही आसानी से उपलब्ध किसी प्रजाति के जन्तुओं का विच्छेदन कर छात्रों को दिखा सकेंगे, वहीं स्नातकोत्तर स्तर पर भी जो छात्र विच्छेदन नहीं करना चाहें, उन्हें इसके स्थान पर जैव विविधता (बायोडायवर्सिटी) से जुड़े प्रोजेक्ट करने का विकल्प दिया गया है। इस स्तर पर केवल चूहों के विच्छेदन की ही अनुमति दी गई है।

फर्रुखाबाद: 1JULY : अपराध, दुर्घटनाएं

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गरीबी से दुखी दलित ने जान दी

फर्रुखाबाद: गरीब बृद्ध दलित हरीराम ने जहर खाकर जान दे दी.

कोतवाली मोहम्दाबाद के ग्राम गौसपुर निवासी ६० बर्षीय हरीराम कठेरिया ने सुवह जहर पी लिया. उनकी बेटी श्रीमती मनीषा व श्रीमती विकलेश ने दोपहर को लोहिया अस्पताल पहुंचाया. डा० ने बृद्ध को उल्टी करवायी परन्तु १५ मिनट बाद उसने दम तोड़ दिया.

मनीषा ने बताया कि पिता सुवह डीजल खरीद कर लाये. उसी दौरान कीटनाशक जहर भी लाये. जिसको घर पर आ कर पी लिया. ४ बर्ष पूर्व एकलौते भाई राजकुमार की टीवी बीमारी से मौत हो गयी थी. भाई के ३ बेटे व २ बेटी है. भाई के मर जाने के बाद से पिता दुखी रहते थे.घर में और कोई कमाने वाला नहीं है. माँ रामश्री विकलांग है.

गर्मी ने बिकलांग की जान ली

फर्रुखाबाद: मुख्या चिकित्साधिकारी कार्यलय में विकलांग प्रमाण पत्र बनवाने गए गरीब ग्रामीण की गर्मी के कारण मौत हो गयी.

बीते दिन सीएमओ कार्यालय परिसर में ६५ वर्षीय वृद्ध राजवीर सिंह ने कर्मचारी सफ़दर हुसैन से बेहोश व्यक्ति को लोहिया अस्पताल भिजबाया. रात में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गयी. आज दोपहर बाद जब ग्रामीण को शव गृह से निकाला गया तो उसकी नाक से खून बहते देखा गया. बताया गया कि अज्ञात होने के कारण वृद्ध बेड पर बेहोश पडा रहा.

किसी ने उसके बेहतर इलाज तथा देखभाल नहीं की. जिसके कारण ही वह चल बसा. वृद्ध लालरंग का अंडरबियर, हल्की आसमानी रंग की बाजारू हाफ शर्ट व् सफ़ेद पेंट पहने था.

इलाज के अभाव में बालिका मरी

फर्रुखाबाद: इलाज के अभाव में सामुदायिक स्वास्थय केंद्र कमालगंज में ५ बर्ष की बीमार नसरीन की मौत हो गयी. गुस्साए लोग शव को थाना कमालगंज ले गये.

मोहल्ला नई बस्ती निवासी गरीब हनीफ ने बताया कि बेटी नसरीन को खसरा हो गया था. उसे दिखने के लिये५:४५ बजे अस्पताल ले गये. वहां डाक्टर व् कम्पाउंडर मौजूद नहीं थे. इलाज के अभाव में बच्ची मर गयी. उसके बाद प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ श्री प्रकाश पहुंचे. उन्होंने जेऍनआई को बताया कि वह फार्मासिष्ट पीसी राजपूत के साथ कल्लू नगला में बीमार लक्ष्मण की पुत्री नीलम को देखने गये थे.

उन्होंने बताया कि तेज बुखार के कारण बच्ची की मौत हुयी है. एसओ एमपी सिंह ने बताया कि एसडीएम, एसपी व् सीएमओ से बातचीत करने के बाद तय किया गया कि बच्ची के शव का पोस्टमार्टम कराया जाएगा. सीएमओ जांच कर डाक्टर के विरुद्ध कार्यवाही करेंगे.

इस घटना में डाक्टर को दोषी ठहराने के बजे सीएमओ डॉ पीसी पोरवाल ने बताया कि मरने वाली बच्ची ३ दिनों से खसरे के बुखार से पीड़ित थी. तब उसे ८ से २ बजे के बीच अस्पताल क्यों नहीं ले जाया गया. कमी के कारण वहां एक ही डाक्टर है. जो मरीज को ही देखने उसके घर गया था.

दलित के हत्यारे भूसे के ढेर में छिपे

फर्रुखाबाद: पट्टा भूमि हथियाने की रंजिस में दलित की गोली मार कर ह्त्या कर दी गयी. गुस्साए दलितों ने हमलावरों के मकान में आग लगाने की कोशिश की तो वे भूसा के ढेर में छिप गए.

यह सनसनी खेज घटना थाना कम्पिल के गाँव साहपुर की है. विजयी धोवी का ३५ वर्षीय पुत्री जगराम ने रात ७ बजे गाँव के संजू के घर जाकर उससे कहा कि अब मेरी पट्टा भूमि को हाँथ न लगाना. इसी बात को लेकर उसकी संजू से मारपीट हो गयी.

संजू का भाई बबलू घर से अधिया बन्दूक लाया और जगराम के गोली मार दी. उसकी तुरंत ही मौत हो गयी. गुस्साए परिवार वालों ने हमलावरों का मकान घेर लिया और आग लगाकर फूंकने की कोशिश करने लगे. पुलिस ने उत्तेजित लोगों को शांत किया.

तलाशी लेने पर राजवीर सिंह के बेटे संजू व् बब्लू भूसे ढेर में छिपे मिले जिन्होंने ह्त्या में प्रयोग की गयी अधिया बन्दूक पुलिस को सौंप दी.

बाप ने बेटी को अगवा किया

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फर्रुखाबाद1july: बाइक चुराने के संदेह में बाप ने बेटी के घर हमलाबोलकर ५ परिवार वालों को पीट कर घायल कर दिया. तथा बेटी को अगवा करने का प्रयास करने पर ४ लोगो को गाँव वालों ने पकड़ लिया.

खून के रिश्तों को तार-तार करने वाली यह घटना थाना कमालगंज के ग्राम गांधीनगर की है १३ जून को कन्नौज थाना सौरिख के ग्राम रेरी रामपुर निवासी रामशंकर लोधी राजपूत अपनी बाइक नम्बर डीएल ४५ एएफ/३५८९ को लेकर समधी रामशंकर के बेटे के तिलक समारोह में आये थे. घर के दरवाजे से बाइक चोरी हो जाने पर जागेश्वर ने समधी के परिजनों पर संदेह किया.

बीती रात जागेश्वर ने अपने बेटे औसान सिंह आदि एक दर्जन लोगों के सहयोग से रामशंकर के घर हमला बोल दिया. लाठी डंडों व तमंचों की वट से हमला करके रामशंकर उनकी पत्नी अमर कुमारी बेटा संदीप व अनूप को घायल कर दिया.

अपनी बेटी सरस्वती को मार्सल में डालकर जबरन ले जाने लगे, ग्रामीणों ने पथराव व घेराबंदी कर सरस्वती को छुडा लिया. तथा सरस्वती के भाई औसान तथा गाँव के जितेन्द्र, पुष्पेन्द्र, अरबिन्द को पकड़ लिया तथा पिटाई करने के बाद पुलिस के हवाले कर दिया.