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यूपी: मुद्दा विकास का-निशाना वोटर पर

उत्तर प्रदेश में विकास में आड़े आ रही समस्याएं खुद प्रशसनिक अमले द्वारा पैदा की गयी है| राजनैतिक वर्चस्व को लेकर केंद्र और प्रदेश सरकार में आरोप प्रत्यारोप अब लगातार विकास के मुद्दे पर हो रहा है| मायावती कहती हैं कि उन्हें केंद्र उत्तर प्रदेश में पैसा समय से और पूरा नहीं देता तो सोनिया और राहुल प्रदेश सरकार पर केंद्र के पैसे के दुरूपयोग का आरोप लगते हैं| ऐसा क्यूँ हो रहा पीछे कोई नहीं जाना चाहता|

आये दिन प्राथमिक शिक्षा में कभी मिड डे मील में गड़बड़ तो कहीं शिक्षा गुणवत्ता का कचरा, कहीं शिक्षक गायब तो कहीं सरकार द्वारा मुफ्त उपलब्ध कराई जा रही पुस्तको में गड़बड़| नरेगा के हाल का तो जैसा बेहाल उत्तर प्रदेश में हुआ शायद कहीं नहीं| कागजों की हकीकत और गाँव के विकास की हकीकत में जमीन आस्मां का अंतर| यही हाल स्वास्थ्य का है| न प्रयाप्त डॉक्टर हैं और न दवाएं|

आखिर इन सबके लिए कौन जिम्मेदार है| नेता, नौकरशाह या फिर योजना|

दरअसल प्रदेश में स्वास्थ्य शिक्षा और अन्य विकास झूठ का पुलिंदा है| मायावती को खुश रखने के लिए नौकरशाह बढ़िया आंकड़े पेश कर रहे है| मसलन मिड डे मील में कई जनपदों में ८० प्रतिशत तक दलित रसोइये काम करते दिखा दिए पढ़े:- मिड डे मील में दलित रसोइये: इलाहाबाद में 2892 तो फर्रुखाबाद में केवल 15 |

मिड डे मील के लिए केंद्र से आवंटन होने वाले खाद्यान और कन्वर्जन कास्ट में बेहतर आंकड़ेबाजी कर रिपोर्ट पेश कर दी| ये रिपोर्ट उत्तर प्रदेश के नौकरशाहों द्वारा केंद्र को भेजी गयी रिपोर्ट थी| इसका मिलान और अनुरक्षण हुआ तो चौकाने वाले तथ्य पकड़ में आ गए| कहीं कन्वर्जन कास्ट खाद्यान से ज्यादा खर्च हो गयी तो कहीं खाद्यान ज्यादा खर्च हो गया और कन्वर्जन कास्ट बच गयी| जितने दिन स्कूल में अध्ययन कार्य हुआ उमीद डे मील उससे ज्यादा दिन बन गया|- देखें रिपोर्ट – MDM WRITE UP

दरअसल ये सब फर्जी आंकड़े पेश करने का नतीजा है| प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में उपस्थिति का औसत काफी कम है जबकि एमडीएम की रिपोर्ट में उपभोग बढ़ा चढ़ा कर दिखाने के चक्कर में नौकरशाह खुद जनपदीय अधिकारिओं पर दबाब बनाते है| जनपदीय अधिकारी भी खाऊ कम्यु कुर्सी पर जमे रहने लिए ये कारनामा करते है| फिर जब मामला पकड़ा जाता है तब केंद्र और प्रदेश के नौकरशाह एक दुसरे का मुह ताकते है|

    मुद्दा विकास का होता है निशाना वोटर

कुछ कारवाही होती है तो नया बजट करने से पहले केंद्र पिछला उपभोग सही करके मांगती है, नहीं मिलता है तो पैसा रुकता है| पैसा रुकता है तो प्रदेश सरकार चिल्लाती है| और लगे हाथ आये मुद्दे को पाकर खोयी सत्ता पाने को कांग्रेस चिल्लाती है| मुद्दा विकास का होता है निशाना वोटर| जनता कहीं नहीं दिखती|

एमडीएम- दलित रसोइये के हाथ का बना खाना खाने से इंकार

कानपुर देहात। उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूल में बच्चों ने गांव की दलित महिला के हाथ का बना मिड-डे-मील खाने से इंकार कर दिया। मंडलायुक्त ने मामले की जांच अपर जिलाधिकारी (एडीएम) से कराने को कहा है।

दूसरी तरफ कन्नौज जनपद के छिबरामऊ क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय मोहद्दीनगर सकरावा में भी दलित महिला के हाथ का बना मिड डे मील खाने से बच्चों ने इनकार कर दिया। बच्चों ने जब अभिभावकों को यह मामला बताया तो वे भी स्कूल पहुंचे और महिला कुक को हटाने की मांग करने लगे। हालाँकि यहाँ एबीएसए ने घटना की जानकारी से ही इनकार किया है।

संदलपुर ब्लाक के प्राथमिक विद्यालय जसापुर स्कूल में 135 बच्चे पंजीकृत हैं। इनमें 31 बच्चे दलित, 19 पिछड़े व 85 सामान्य वर्ग के हैं। पिछले सत्र में यहां मिड-डे-मील बनाने के लिये दो सवर्ण महिलाओं मीरा व सुमन की तैनाती थी। हाल ही में यहां पर दलित वर्ग की महारानी व शांती को भी खाना बनाने के लिये ग्राम पंचायत द्वारा अधिकृत किया गया। उक्त दलित महिलाओं द्वारा खाना बनाने से यहां के 85 सवर्ण बच्चों ने मंगलवार से मिड-डे-मील लेने से इंकार कर दिया। बुधवार को भी इन बच्चों द्वारा भोजन नहीं लेने पर शिक्षामित्र आरती सिंह व शैलेंद्र सिंह तथा जूनियर विद्यालय के प्रधानाध्यापक शहरुद्दीन सिद्दीकी ने एबीएसए के साथ-साथ बीआरसी तथा एनपीआरसी प्रभारी को प्रकरण से अवगत कराया। एबीएसए अनिल रावत के निर्देश पर बीआरसी प्रभारी बीडी सिंह व एनपीआरसी प्रभारी मान सिंह सेंगर ने गांव पहुंचकर बच्चों के परिजनों को समझाने प्रयास किया, किंतु देर शाम तक इनकी कवायद बेनतीजा रही।

इस मामले में मंडलायुक्त अमित कुमार घोष ने मामले को गंभीरता से लिया है। मामले की जांच अपर जिलाधिकारी स्तर के अधिकारी से करायी जायेगी। जिलाधिकारी सरोज कुमार तिवारी ने बताया, एसडीएम सिकंदरा को प्रारंभिक जांच करते हुए 24 घंटे में रिपोर्ट देने को कहा गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई होगी। मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक राकेश कुमार ने कहा कि रमाबाई नगर (पूर्व नाम कानपुर देहात) के बीएसए संजय शुक्ला विभागीय जांच करेंगे।

डरपोक बहादुर मंत्री

लोकतंत्र में विधायिका की कुर्सी पर बैठने के लिए जनता की परिक्रमा करने वाले नेता सत्ता मिल जाने के बाद अपना रंग बदल लेते हैं| मंच माला और माइक के शौक़ीन नेता कुर्सी पर बैठने के बाद जनता के प्रति जबाबदेह हो जाते हैं और उस वक़्त कौन कितना जनता से मिलता है यही पैमाना तय करता है कि अमुक नेता कितना डरपोक या निर्भीक है|
यहाँ कुछ नेताओं के निजी गुण दिए जा रहे है अवलोकन करें कि कौन कितना डरपोक/बहादुर हुआ-
१- मुलायम सिंह यादव:
ग्रामीण परिवेश से निकल कर आये मुलायम सिंह डॉ राम मनोहर लोहिया के पद चिन्हों पर चलने का दावा करते करते समाजवादी हुए और जातीय समीकरण बिठा कर उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री और केंद्र में रक्षा मंत्री तक पहुचे.
मुलायम सिंह यादव आमतौर पर अपने कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद करते हैं, सत्ता में रहते और सत्ता जाने के बाद भी उनका कार्यकर्ताओं और जनता से मिलने जुलने का नजरिया नहीं बदलता| अलबत्ता सत्ता होने पर काम बढ़ जाने पर ये दूरी थोड़ी बढ़ जाती है|
मीडिया से संवाद:
मीडिया कर्मी के सवालों का जबाब देने से बचते हुए मुलायम सिंह बहुत कम देखे गए| टीवी और प्रिंट मीडिया का पत्रकार उन तक पहुच पाए बस| अगर सामना हुआ तो जबाब मिलेगा| हाँ अगर सवाल अगर पसंदीदा न हुआ तो कभी कभी पत्रकारों से खुद भी सवाल करते देखे गए|
सत्ता में रहते जनता दरबार लगते थे| और सत्ता से बाहर हो तब खुद ही अपने वोटर जनता के दरबार में पहुच जाते थे|

२- कद्दावर नेताओं में कलराज मिश्र, राजनाथ सिंह, विनय कटियार, केसरी नाथ त्रिपाठी, माता प्रसाद पाण्डेय, लालजी टंडन, रविन्द्र शुक्ल, शिवपाल सिंह यादव, सलमान खुर्शीद, श्री प्रकाशशुक्ल आदि नेता मीडिया प्रेमी रहे| जनपदीय दौरों पर मीडिया से मिलना और उनके तीखे और मीठे सवालों के बेबाकी से जबाब देना उनकी आदत में रहा| सत्ता में होने पर दौरों के दौरान जनता से सीधे संबाद करने में कभी परेशान नहीं दिखे| हाँ माता प्रसाद पाण्डेय जो की मुलायम सिंह सरकार के दौरान प्रदेश में विधान सभा अध्यक्ष के पद पर रहे पत्रकारों के सवालों में उलझे नहीं उल्टा उलझाते देखे गए|

३- उमा भारती, विनय कटियार, शिवपाल यादव का तो जनपद दौरों में खाना ही तब हजम होता था जब पत्रकारों से बात हो जाती थी| अगर रात्रि विश्राम उसी जनपद में हुआ तो अगले दिन अपनी छपास देख कर ही आगे बढ़ते थे|

राजनाथ सिंह

४- मुख्यमंत्री के तौर पर मुलायम के बाद जनता से संवाद और मीडिया से रुख के साथ मिलने का नो राजनाथ सिंह का आता है| जनपदीय दौरों में ब्लैक कैट कमांडो से घिरे मुख्यमंत्री हेलीकाप्टर से मंच और मंच से हेलीकाप्टर की पद यात्रा के दौरान यदि कोई जोर से चिल्लाया तो उसी तरफ मुड़ने की आदत मुलायम और राजनाथ दोनों की रही|

मायावती

५- ४ बार मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठ चुकी मायावती को जनता और पत्रकार दोनों के सवालों से नफरत है| पक्ष में हो या विपक्ष में बिना उनकी मर्जी के मीडिया और जनता उनसे नहीं मिल सकती| कभी जनपदीय दौरों के दौरान उन्हें जनता और मीडिया से मिलते शायद ही कभी किसी ने देखा हो (देखा हो तो जूर लिखियेगा)| वैसे ये बसपा का कल्चर है काशीराम ने भी एक पत्रकार को सवाल करने पर थप्पड़ जड़ दिया था, सौभाग्य से वो पत्रकार अब देश के शक्तिशाली टी चेनल का पत्रकार बन गया| मगर हर किसी के मुकद्दर में बसपा के बड़े नेताओं का थप्पड़ नहीं है| जनता इन्हें डरपोक सत्ताधारी नेता कहती है मगर इनके मुताबिक ये बसपा के अनुशासन का भाग है| केवल इनकी सुनो, करो चाहे मन हो वो|

मायावती के मंत्री

६- मायावती की तरह ही इनके मंत्रिमंडल में मौजूद सत्ता का मजा लूट रहे मंत्रियो को भी बहनजी की तरह बनना पड़ा| रामवीर उपाध्याय पहले मंत्री बने तो जनता से मिलते थे जनपदीय दौरों में प्रेस का आयोजन होता था, कुर्सी से चिपके रहने के लिए पार्टी बदल ली फिर मंत्री बन गए, अब अपना कैमरामेन साथ लेकर चलते है, मंच से सीधे उतर कार में सरक जाते हैं, जनता के प्रार्थना पत्र अपने निजी सहयोगियो से मंगवाते है, शायद डरते हैं किसी जिला अध्यक्ष या बसपा के केडर के सदस्य ने बहिन जी तक चुगली कर दी तो फिर क्या होगा..

अनंत कुमार मिश्र प्रदेश के कद्दावर नेता मंत्री है, पार्टी बदल बदल के चार बार चुनावी नैया डूबने के बाद पांचवी बार अपने मामा सतीश मिश्र की कृपा से बहिन जी सरकार में स्वस्थ्य मंत्री बनने के बाद चुनावी नैया पार हुई और विधान सभा का चुनाव जीत पाए| शुरू शुरू में तो जनता से मिले, जनता दरबार भी लगाया, मीडिया के सवालों के जबाब भी मुस्करा कर दिए, मगर धीरे धीरे बसपाई होने लगे| अब सिर्फ मंच माला माइक शिलान्यास और उदघाटन तक सीमित हो गए|

वैसे उत्तर प्रदेश के इतिहास में ये पहली बार हो रहा है जब सत्ता जनता के सवालों का जबाब देने की जगह उल्टा जनता से ही सवाल करती रही है| ये उनकी बहादुरी है और मिशाल भी है| लगभग सभी मंत्री पार्टी से सम्बंधित या फिर अपने विभाग के सवालों के जबाब देने से बचते है, देना भी पड़े तो बिना बहिन जी कृपा का शब्द लगाये कुछ नहीं बोलते| वैसे बसपा जनता से सीधे संवाद करने का दावा भी करती है, मीडिया उन्हें दाल भात में मुसरचंद नजर आता है तो गलत भी नहीं है, दलित राजनीती पर मीडिया ने कभी इन्साफ नहीं किया ये बुद्धजीवियो की राय है|

नोट:- यहाँ संपादक ने था का इस्तेमाल किया है, रंग बदलते देर नहीं लगती इसीलिए|

आप भी अपनी राय दे सकते है-

चुम्बन लेने वाले प्रेमी युगल पुलिस शिकंजे में

फर्रुखाबाद7july: चुम्बन लेने वाले छात्र छात्रा पुलिस शिकंजे में फंस गए. छात्र सुबोध यादव व उसका दोस्त सुनील उर्फ़ बन्टू आज सुवह बाइक से प्रेमिका अर्चना को टाउनहाल के पीछे काशीराम कालौनी में ले गए. प्रेम का इजहार करने के लिए एक दूसरे का चूमा-चाटी कर रहे थे.

जिससे वहां से गुजरने वालीं महिलायें शर्मशार हो रहीं थीं. बजरिया चौकी प्रभारी राजवीर सिंह ने गिरफ्तार कर उनके विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई. नगर के मोहल्ला सर्वोदय नगर निवासी शिक्षक सोबरन सिंह यादव के पुत्र सुबोध ने बताया कि उसने मेजर एसडी कालेज से बीए किया है.

विर्राबाग़ में रहने वाली अर्चना थाना मेरा पुर के ग्राम गणेशपुर की मूल निवासी है. उसने कनोडिया स्कूल से हाईस्कूल पास किया है. जब कि सुबोध के पड़ोस में रहने वाला सुनील उर्फ़ बन्टू कठेरिया टैम्पो ड्राइवर है.

एक डाक्टर नहीं दे सके स्वास्थ्य मंत्री

फर्रुखाबाद7july: सूवे के स्वास्थ्य मंत्री अनंत कुमार मिश्र उर्फ़ अन्टू आज यहाँ जिले में एक मात्र रेडियोलाजिस्ट को तैनात किये जाने की मांग पूरी नहीं कर सके. ५० शैया युक्त संयुक्त चिकित्सालय लिंजीगंज के लोकार्पण समारोह के दौरान बसपा के पूर्व जिलाध्यक्ष रामानंद प्रजापति ने श्री मिश्र से जनता की बेहद मांग रेडियोलाजिस्ट की नियुक्ति किये जाने की मांग की.

पूर्व जिलाध्यक्ष रामनरेश गौतम ने भी कुछ अच्छे डाक्टरों की तैनाती किये जाने की फ़रियाद की. मुख्यमंत्री व स्वयं की शान में कसीदें पड़ने वाले स्वास्थ्य मंत्री श्री मिश्र ने अपनी ही पार्टी के लोगों की मांग के बारे में एक शब्द तक नहीं कहा. बल्कि केंद्र सरकार को चेतावनी दी कि जब तक ९०% बिजली देने का वायदा नहीं किया जायेगा तब तक उनकी किसी भी विधुत परियोजना को मंजूरी नहीं दी जायेगी.

श्री मिश्र के २ घंटा विलम्व से पहुँचने के कारण लोग भीषण गर्मी में काफी परेशान रहे भीड़ जुटाने के लिए जादूगर ने करतब दिखाए.कर्मचारी नेता अखिलेश अग्निहोत्री शिकायती पत्रों को लेकर कई बार मंच पर जाकर मंत्री से मिले. वहीं गिडगिडाने के बाबजूद भी बृद्ध शिवनरायण अग्निहोत्री, श्रीमती रमला राठौर आदि को मंच पर नहीं चढ़ने दिया.

श्री मिश्र ने लिंजीगंज लोहिया अस्पताल में आयुर्वेदिक अस्पताल का भी लोकार्पण किया. जिलाधिकारी के धन लक्ष्मी सीएम्ओ डा० पीके पोरवाल एएसपी वीके मिश्र बसपा नेता गंगाराम जाटव, महेंद्र सिंह कटियार मंत्री प्रतिनिधि जितेन्द्र ओझा मौजूद रहे. संचालन अंजुम दुवे ने किया.

यूपी: फर्रुखाबाद के 93% स्कूलों में मिड डे मील बंद

फर्रुखाबाद: क्या यूपी में अदालतों के आदेशो के कोई मायने नहीं है| आये दिन किसी न किसी मुद्दे पर फटकार खाने के बाद भी बड़ी बेशर्मी से अदालतों के आदेशो के अवहेलना हो रही है भले ही वो देश की शीर्ष अदालत हो| मध्याह भोजन योजना यानि की मिड डे मील योजना देश की शीर्ष अदालत सुप्रीम कोर्ट के आदेशो का परिणाम है| मगर यूपी में राजनैतिक बर्चस्व में उलझी सरकार और उनकी उलझन को सुलझाने में चाकरी करते नौकरशाह, किसी को सुप्रीम कोर्ट के आदेशो की चिंता नहीं है|

शर्मनाक: भूखे पेट लौट गए नौनिहाल

सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले कक्षा १ से ८ तक के हर बच्चे को स्कूल में दोपहर के समय मिड डे मील का पौष्टिक भोजन खिलाने का आदेश दिया गया था| मगर यूपी के स्कूलों में मिड डे मील की बुरी स्थिति है आज ६ जुलाई को हुए सर्वेक्षण में जनपद फर्रुखाबाद में ९३ प्रतिशत स्कूलों में मिड डे का चूल्हा नहीं जला| बच्चे भूखे घर लौट गए|

    फर्रुखाबाद में सात ब्लाक हैं सातों ब्लाकों में हुए सर्वेक्षण में जो आंकड़े आये वो इस प्रकार है-

राजेपुर

राजेपुर ब्लाक में हुए सर्वेक्षण में प्रभारी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी जगरूप शंखवार ने बताया कि उन्हें किसी स्कूल में मिड डे बनता नहीं मिला. जे एन आई ने एसएमएस द्वारा जो रिपोर्ट राजेपुर के ग्रामीणों और स्कूलों में कार्यरत अध्यापको से ली उस आंकड़ो के मुताबिक 67 स्कूलों में से 61 स्कूलों में मिड डे नहीं बनने की रिपोर्ट प्राप्त हुई|

शमसाबाद:

शमसाबाद ब्लाक से केवल 7 स्कूलों में मिड डे बनने का मेसेज आया, वहीँ कई विद्यालाओं के अध्यापको ने फ़ोन पर मिड डे मील न बनने की रिपोर्ट दर्ज करायी| कायमगंज और शमसाबाद के सहायक बेसिक शिक्षा अधिकारी पुष्पराज के मुताबिक उन्हें सर्कार द्वारा सर्वेक्षण कराये जाने की कोई जानकारी नहीं दी गयी और उन्होंने बृहत स्तर पर ६ जुलाई को कोई सर्वेक्षण नहीं कराया|

कमालगंज:

कमालगंज ब्लाक में केवल 8 स्कूलों में मिड डे बनने की रिपोर्ट प्राप्त हुई| कई प्रधानो और कोटेदारो ने विशेष रूप से एसएमएस के साथ साथ फ़ोन कर सूचना दर्ज करायी कि मिड डे मील बना लेकिन ग्रामीणों को क्रास फ़ोन करने पर स्थिति उलटी पाई गयी|

मोहम्दाबाद:

सबसे ख़राब स्थिति मोहम्दाबाद की रही यहाँ केवल ८ स्कूलों में खाना बना जिसमे भी चावल परोसे गए| हालाँकि सहायक बेसिक शिक्षा अधिकारी मोहम्दाबाद का पक्ष लेते हुए एमडीएम कि जिला समन्वयक नीलू मिश्र ने बताया की जी पी पाल ने मोहम्दाबाद में बढ़िया मीनू सहित खाना बनने की रिपोर्ट दी है| इसी ब्लाक से एक प्रधान ने आज अरहर की दाल और चावल बनने का मेसेज ६ बार दर्ज कराया|

नवाबगंज:

जे एन आई के पास आये एसएमएस के मुताबिक नवाबगंज में केवल ८० में से ४ विद्यालयों में खाना बनता मिला| इस बात की पुष्टि सहायक बेसिक शिक्षा अधिकारी नवाबगंज नागेन्द्र चौधरी ने भी की| यानि की नवाबगंज में ९५ प्रतिशत स्कूलों में खाना नहीं बना| हालाँकि नागेन्द्र चौधरी ने बताया कि उन्हें ६ जुलाई को प्रदेश स्तरीय सर्वेक्षण की कोई जानकारी नहीं है और न ही उन्होंने कराया|

बढ़पुर:

नगर क्षेत्र से लगा हुआ ब्लाक है बढ़पुर यहाँ हुए सर्वेक्षण में जेएनआई को केवल 7 स्कूलों में खाना बनने का सन्देश आया| वहीँ ब्लाक समन्वयक बढ़पुर नानकचंद ने बताया कि उन्होंने 82 स्कूलों से रिपोर्ट प्राप्त की जिसमे से केवल 6 स्कूलों में खाना बना था बाकी 76 स्कूलों के बच्चे भूखे घर लौट गए|

कायमगंज:

ब्लाक कायमगंज जो की मुख्यालय से सबसे दूर का ब्लाक है, यहाँ केवल ९ स्कूलों में खाना बना बाकी स्कूलों के बच्चे भूख से बिलबिलाकर घर लौट गए|

नगर के सरकारी आंकड़ो पर सवालिया निशान?
फर्रुखाबाद नगर:

पूरे जनपद में मिड डे मील बनने का पैमाना फर्रुखाबाद नगर क्षेत्र के स्कूलों को बनाया मिड डे मील की समन्वयक नीलू मिश्र ने| उन्होंने फ़ोन पर बताया कि उन्हें किसी भी स्कूल में मिड डे मील बंद नहीं मिला, हालाँकि उन्होंने केवल ८ स्कूलों का सर्वेक्षण किया था| नगर क्षेत्र एनजीओ के हवाले है, और एनजीओ सामूहिक चूल्हा जलाकर एक जगह खाना बनवाते है और उसे स्कूलों में स्तरहीन पैकिंग (बाल्टी भगोने में खाना खुला लेकर स्कूल स्कूल बाटते है) और ठंडा खाना बच्चो को मुहैया करा रहा है| ऐसी स्थिति में समन्वयक को शत प्रतिशत खाना बनते कैसे मिला गया सवालिया निशान है| वैसे जे एन आई को मिले संदेशो के मुताबिक प्राप्त १६ विद्यालयों में से केवल २ ने मिड डे मील बनने की सूचना दी|
नीलू मिश्र ने बताया कि उन्होंने बाकायदा सभी सहायक बेसिक अधिकारिओ को पत्र द्वारा सूचित करा दिया था. अब मेरे पास तो डाक रजिस्टर पर चढ़ी कारवाही है और सरकार कागज को मांगती है|

नोट: ये सर्वेक्षण जेएनआई ने फर्रुखाबाद की 62256 की संख्या में जनता को एसएमएस भेज कर कराया है| साथ ही साथ कुछ शिक्षा विभाग के कर्मठ कर्मिओं ने भी आंकड़े उपलब्ध कराये|

चुनाव खर्चे की तैयारी में मिड डे मील बंद

फर्रुखाबाद:(उमाकांत गुप्ता की रिपोर्ट) ब्लाक कमालगंज के अधिकांस स्कूलों में अभी तक मिड डे मील चालू नहीं हुआ है.

प्रधान अब चुनाव खर्चे के लिए मिड डे मील न बनवाकर अधिक से अधिक धन जुटाने में लगे हैं. निजी स्वार्थ के कारण प्रधानाध्यापक जुबान नहीं खोल रहे हैं. मिड डे मील चालू न होने वाले स्कूलों के नाम इस प्रकार हैं.

बलीपुर के दोनों स्कूल रसूलपुर, लतीफपुर, जहानगंज के पांचो स्कूल रागोल नगला, अदमापुर, बहोरिकपुर के तीनो स्कूल दिपीन नुसरातपुर, नौगावां के तीनो स्कूल, नारायणपुर गढ़िया के तीनो स्कूल, पूरनपुर, सिन्धुली, प्रायमरी पाठशाला गढ़ाखेरा.

शोध: देर से स्कूल जाना बच्‍चों के विकास के लिए अच्‍छा

यह एक अहम सवाल है कि बच्चे को एक आदर्श छात्र बनाने के लिए क्या करना चाहिए? और शोधकर्ता इसका एक आसान सा जवाब ढूँढ़ कर लाए हैं कि उन्हें आधे घंटे और सोने देना चाहिए और इसके लिए उनके स्कूल खुलने का समय आधे घंटे आगे बढ़ा देना चाहिए.

अमरीका में हुए एक शोध में कहा गया है कि अगर स्कूल आधे घंटे देर से खुलें तो किशोरवय के या टीनएजर बच्चों की थकावट और अवसाद ठीक हो जाते हैं और वे उनमें स्कूल जाने के प्रति उत्साह बढ़ता है.

इस अमरीकी शोध में कहा गया है कि सेना की तरह का अनुशासन भूल जाइए क्योंकि बच्चों को बिस्तर पर आधे घंटे अधिक बिताने देने से वे ज़्यादा ख़ुश होते हैं. इस शोध में हाईस्कूल के 200 बच्चों ने भाग लिया जिनके स्कूल का समय आठ बजे की बजाय साढ़े आठ बजे कर दिया गया था.

इस शोध में पाया गया कि देर स्कूल जाने वाले बच्चों में महत्वपूर्ण बदलाव आए. उदाहरण के तौर पर उदासी और अवसाद की शिकायत करने वाले बच्चों में से 30 प्रतिशत ने कहा कि उनकी यह शिकायत दूर हो गई है. जबकि 25 प्रतिशत बच्चों ने कहा कि उनमें चिड़चिड़ाहट कम हो गई है और लगभग इतने ही बच्चों ने कहा कि उनमें थकावट से जुड़े लक्षण कम हो गए हैं.

इससे पहले हुए शोध से साबित हो चुका है कि बच्चे जब किशोरावस्था में या टीन एज में पहुँचते हैं तो उनके सोकर उठने का समय कम से कम दो घंटे आगे बढ़ जाता है. शोधकर्ताओं का कहना है कि आदर्श स्थिति में किशोरों को नौ से साढ़े नौ घंटों की नींद चाहिए होती है.

जरा सी बरसात, बेशर्म नगर पालिका, नाला सफाई के दावे फेल

फर्रुखाबाद|5july: आज सूबे में हुयी मानसून की पहली बरसात से ही नगरपालिका के बड़े-बड़े दावे हुयी बरसात से नालियों में बहते नजर आ गए.

बरसात से पहले ही नाला सफाई की योजना नगर पालिका के ठन्डे बस्ते में नजर आर ही है. मानसून की पहली ही बरसात ने चरमराती नाला सफाई अभियान की पोल खोल दी है. बरसात के कारण कई जगहों पर नाला जाम होने के कारण बरसात व् नाले का गंदा पानी घरों व् दुकानों में घुस गया.

लोगों की जुबान पर बस यही था कि पहली बरसात में ही ये हाल है नगर पालिका क्या सो गयी है ? लोगों को बरसात होने से गर्मी से जहां राहत मिली वहीं नाले उफनाने से परेशानी भी हो रही है. फतेहगढ़ में स्थित एक दुकान में नाले का पानी से घुस जाने से बेचारा बाल्टी से ही पानी को बाहर निकाल रहा है. ये तो अभी शुरूआत है, अगर समय रहते नगर पालिका नहीं चेती तो लोगों को आगे चलकर काफी परेशानी झेलनी पड़ेगी.

सपाईयों ने प्रदूषण फैलाने वालों को मुर्गा बनाया

फर्रुखाबाद|4july: समाजबादी पार्टी के कार्यकताओं ने गंगा तट पर सफाई अभियान के दौरान गंगा नदी में कपडे धोने वाले मजदूरों के साथ बदसलूकी की तथा मुर्गा बना दिया.

जब मजदूरों ने भबिष्य में गंगा को गंदा न करने की फ़रियाद की तो उन्हें चेतावनी देकर छोड़ दिया. इस दौरान महिलायें भी कपडे धो रही थी. फिलहाल उन्हें भबिष्य के लिए चेतावनी दी गयी. हानिकारक केमिकल से छपे हुए कपडे साफ़ कर रहे थे.

जिससे गंगा का पानी भी रंगीन हो गया था. रेती में गड्डे करके केमिकल भरकर छिपाया गया था. दर्जनों खाली केमिकलों के डिब्बे भी मौजूद थे. इनको देखते ही सपाईयों में रोष व्याप्त हो गया और उन्होंने मजदूरों पर हल्ला बोल दिया. सूख रहे कपड़ों को भी फाड़ दिया.

सफाई अभियान में सपा के जिलाध्यक्ष चंद्रपाल यादव, नगर अध्यक्ष चाँद मोहम्मद खां, पूर्व नगर अध्यक्ष विस्वास गुप्ता, विक्रांत अवस्थी आदि मौजूद रहे.
नीवलपुर से कचड़ा उठाकर सफाई अभियान की शुरूआत की गयी.