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सत्ता की चौखट पर नतमस्तक ब्यूरोक्रेसी

सम्पादक की कलम से- लोकतंत्र में लोकप्रशासन, सरकार और न्यायालय एक दूसरे के पूरक है या पुजारी? ये यक्ष प्रश्न है| सविधान की परिभाषा इन तीनो को एक दूसरे से नीचे होने का आभास नहीं कराता जाहिर है, तो ये एक दूसरे की चौखट पर नतमस्तक जैसी स्थिति में भी नहीं है| मगर पिछले कई दशक से उत्तर प्रदेश में जो देखने को मिल रहा है उससे तो आभास यही होता है कि कम से कम लोकप्रशासन सरकार के आगे न केवल नतमस्तक है बल्कि सरकार के एजेंट जैसी भूमिका में नजर आता है|
राजनाथ सरकार से लेकर मुलायम और मायावती तीनो की सरकार में देश की ब्यूरोक्रेसी खासकर उत्तर प्रदेश में तब टिक पायी है जब वो सरकार की चौखट पर नतमस्तक होकर चाकिरी करती दिखी| कभी (उस समय के) आईजी रिजवान अहमद को वावर्दी मुख्यमंत्री के आगे चाय की ट्रे लेकर फोटो खीचने का मौका हाथ लगा तो कभी वावर्दी आईपीएस राहुल अस्थाना मुलायम के विधायक समधी के पैर छूते कैमरे में कैद हो गए| ये अलग बात है कि प्रदेश में आई एशोसियेशन के पदाधिकारी अपनी वेबसाइट में नतमस्तक होने की बात नकार कर चुनी हुई सरकार के अजेंडो को लागू करना अपनी नौकरी का भाग बताते हैं| मगर सत्ता की कुर्सिओं पर बैठे मंत्री और नेता कैसे कैसे गैरकानूनी आदेश मौखिक रूप से इन ब्यूरोक्रेट्स को देते है और उसे पूरा करने के लिए ये (मन से या बेमन से) ब्यूरोक्रेट खुद कानून की या धज्जियाँ उड़ाते है, इस बात को आम आदमी भले ही न जानता हो मगर कुछ ब्यूरोक्रेट इस बात को भी इन्टरनेट पर सार्वजनिक करने लगे है| आज नहीं तो कल देश के गाँव तक ये बात पहुचेगी जरूर|
एक प्रकरण को बानगी के तौर पर पेश कर बात पूरी करूंगा-
१- मायावती के जन्मदिन पर प्रदेश मुख्यालय लखनऊ में जनता का बड़ा प्रदर्शन हुआ, लाखों की भीड़ जुटी| वो भीड़ आई नहीं थी लायी गयी थी| १५ जनवरी के उस कार्यक्रम के लिए फर्रुखाबाद जनपद में एक हफ्ते पहले जिले के सभी बसपा विधायक और स्वास्थ्य मंत्री अनंत कुमार मिश्र भीड़ जुटाने के लिए लगे थे जो कि पार्टी के नाते इनका फर्ज और जिम्मेदारी थी| उसी दौरान एक वाकया जो देखने को मिला तो था सरकारी मशीनरी पर दबाब बनाकर भीड़ को लखनऊ लाने के लिए बस आदि का इंतजाम|

(विडियो मौजूद है) जिले के जिला विद्यालय निरीक्षक कई स्कूलों को फ़ोन कर बता रहे थे कि उन पर सरकार का दबाब है उन्हें बसे देनी ही देनी है लिहाजा स्कूल वाले मदद करे और बस भेजे और भले ही इसके लिए वो कैसी भी फ़ाइल (कानूनी या गैरकानूनी काम) पर अग्रिम उनके हस्ताक्षर करा लें| साथ ही साथ उन्हें हड़का भी रहे थे कि अगर बसे नहीं भेजी तो फिर देख लेंगे| उसी दौरान सरकार के मंत्री से मैंने पूछा कि क्या रेली के लिए सरकारी मशीनरी का दुरूपयोग किया जा रहा है उन्होंने साफ़ इंकार किया|
माया की करोडो की माला वाली रेली में भीड़ में जिले से हजारो की भीड़ गयी और जिले में वही जिला विद्यालय निरीक्षक की नौकरी सुरक्षित रही| नक़ल माफियों पर कोई शिकंजा नहीं कस पाया| नैनिहालो के भविष्य को कुचलते हुए जमकर नक़ल करायी गयी, जिले की शैक्षिक गुणवत्ता कागजो पर सुधर गयी| अलबत्ता वास्तविक शिक्षा सुधारने का कोई काम उक्त महोदय द्वारा नजर नहीं आया| अगले सत्र की बोर्ड परीक्षा की फिर तैयारी हो रही है फिर वही होगा जमकर नक़ल और कागजो पर शिक्षा सुधार| इस पूरे प्रकरण को आप क्या कहेंगे लोकसेवको द्वारा जिम्मेदारियो का निर्वहन या सत्ता की चौखट पर दंडवत प्रणाम| हाँ ये वही भीड़ थी जिनके नौनिहालों को शिक्षा देने की जगह नक़लछाप वाले परीक्षा पास के प्रमाण पत्र मिले| क्या ये साजिश इसलिए तो नहीं हो रही ताकि ये नयी पौध भी आने वाले समय में भी मूढ़ बनकर इसी तरह राजनेताओ के बुलावे पर भीड़ बढाने लखनऊ पहुचती रहे और पौआ पीकर जिंदाबाद के नारे लगाती रहे|
अपनी प्रतिक्रिया जरूर लिखे|

धूम-धाम से निकली गुरुग्रंथ साहेव की शोभायात्रा

फर्रुखाबाद: नगर में आज सिख समाज के लोगों ने अपने धर्म गुरू नानक देव प्रकाशोत्सव के उपलक्ष में गुरु ग्रन्थ साहेव जी की शोभा यात्रा बड़े धूम-धाम व हर्षोल्लास के साथ निकाली गयी|

सुबह फतेहगढ़ चौराहे से कर्नलगंज गुरुद्वारा तक तथा सायं यहाँ से कुदरत धाम तक शोभा यात्रा निकाली गयी| जिसमे ज्ञानी गुरुवचन सिंह, बाबू सिंह गिल, सूर्यप्रताप सिंह एडवोकेट, हरविंदर सिंह, रघुवीर सिंह आदि मौजोद रहे| यहाँ से पैदल निकली शोभा यात्रा में समाज के लोगों ने सडक पर पानी छिड़कर, झाडू लगाकर सेवा की|

कानपुर से आये अखाड़ा के निहंगों ने तल्वार्वाजी के कर्तव् दिखाए| शोभा यात्रा के आगे घोंड़ो पर सवार पंच प्यारे सवार थे| महिलाओं ने सवद कीर्तन किया| गुरु द्वारा पहुँचने पर अरदास लगाई गयी लोगों ने जमकर लंगर छका|

इन्स्पेक्टर व एसएसआई में गाली-गलौज

फर्रुखाबाद: शहर क्षेत्र की कोतवाली के इन्स्पेक्टर व एसएसआई के बीच हुयी जमकर गाली-गलौज| पुलिस विभाग में जबर्दस्त चर्चा का विषय बनी है| दोपहर के समय इन्स्पेक्टर व एसएसआई कार्यालय में मौजूद थे|

गाय काटने के मामले में रिपोर्ट दर्ज करने के वजाय लीपा-पोती की गयी| इस बात की शिकायत मिलने पर एसपी ने इंस्पेक्टर को हड़काया था| इसी बात से भन्नाए इन्स्पेक्टर ने पूरा गुस्सा एसएसआई पर निकालते हुए रुपये लेने तक का आरोप लगा दिया|

विवाद यहीं तक होता तो गनीमत थी, गाली देने के लिए विख्यात इंस्पेक्टर ने एसएसआई को भी गरियाया| बेइजत्ती होती देख एसएसआई ने भी इंस्पेक्टर को गाली की उसी भाषा में करारा जवाव दिया| इस दौरान वहां बसपा के जिला स्तर के नेता भी मौजूद थे| अभी तक इंस्पेक्टर सिपाही , दीवान व दरोगाओं पर गुस्सा उतारते रहे जो जवाव न देकर खामोश रहते थे| परन्तु आज एसएसआई ने इंस्पेक्टर की भी धो डाली|

डेंगू ने ली नए प्रधान की जान

फर्रुखाबाद: नौगांव ग्राम पंचायत के नए प्रधान रघुनाथ की डेंगू से कानपुर हैलट में मौत हो गई। वह कोरम के अभाव में प्रधान पद की शपथ भी नहीं ले सके थे।

मृत प्रधान के पुत्र अरविंद ने बताया कि पिता तीन दिन से डेंगू बीमारी से पीड़ित थे। सुधार न होने पर उन्हें कानपुर हैलट अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उन्हें डेंगू की पुष्टि हुयी| सोमवार की रात उपचार के दौरान अस्पताल में मौत हो गई। प्रधानी चुनाव जीतने के बावजूद सदस्यों का कोरम पूरा न होने के कारण शपथ नहीं ले सके थे।

भंडाफोड़- जेल में करोडो का खेल!

फर्रुखाबाद: क्या राजा क्या रंक, सब जनता के धन को लूट रहे है| कभी जेल जाने का मौका मिले तो हकीकत देखिये मगर यहाँ हम आपको कुछ कागजात पर अंकित सफ़ेद और स्याह घोटाला की बानगी दिखाते है जो बड़े जतन से (सूचना के अधिकार) जेल की सलाखों से बाहर आ सके है|
कैदियो/बन्दियो को दिया जाने वाला खाना कितना शुद्ध और स्वादिष्ट होता है ये तो वही जान पाया जिसे जेल यात्रा का अनुभव प्राप्त हुआ है मगर जो दस्ताबेज हमें मिले उसे देख कर यही लगता है कि जेल में बड़ा ही लजीज, पौष्टिक और स्वादिष्ट खाना मिलता होगा|
फर्रुखाबाद की जेल में कैदियो/बन्दियो के लिए खरीदा जाने वाला खाद्य पदार्थ जैसे अरहर, मसूर, मूंग और चने की दाल, चना, वनस्पति घी, चीनी आदि पूरे प्रदेश में सबसे महगा होता है| कानपुर के मुकाबले ये भाव डेढ़ से दुगुने तक होते हैं| मगर पाठक इस भ्रम में न रहे कि महगा है तो लजीज भी होगा| हाँ करोडो के वारे न्यारे जरूर होते है|
जरा गौर करे कानपूर जेल और फर्रुखाबाद जेल में खरीद के बाजार भाव अंतर पर-
*(1-9-2009) भाव कानपुर जेल में खरीद के-
अरहर दाल- 6900.00 प्रति कुंतल
चना साबुत- 2400.00 प्रति कुंतल
वनस्पति घी (15kg) 570 प्रति टीन
#(5-9-2009) भाव फर्रुखाबाद जेल में खरीद के-
अरहर दाल- 8200.00 प्रति कुंतल
चना साबुत- 5500.00 प्रति कुंतल
वनस्पति घी (15kg) 1380 प्रति टीन
————–
*(1-10-2009) भाव कानपुर जेल में खरीद के-
उरद दाल- 4500.00 प्रति कुंतल
अरहर दाल- 7000.00 प्रति कुंतल
#(3-10-2009) भाव फर्रुखाबाद जेल में खरीद के-
उरद दाल- 6200.00 प्रति कुंतल
अरहर दाल- 8000.00 प्रति कुंतल
पूरी सूची की बानगी यू देखें-

दोषी कौन कौन हो सकता है?
इस खेल में जेल के अधिकारिओ पर सारा दोष डालना गलत होगा क्यूंकि असल कहानी शुरू होती है प्रदेश के खाद्य विपणन विभाग से| इस विभाग पर जिम्मेदारी है कि वो जेल को बाजार भाव उपलब्ध कराये| और उसी बाजार भाव की दर पर जेल खरीददारी करता है| खाद्य विपणन विभाग वही विभाग है जिले में सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों वाले कोटेदारो को और मिड डे मील के लिए राशन उपलब्ध करता है| इस लिहाज से इस बंदरबाट में दोनों की मिलीभगत से इंकार नहीं किया जा सकता|
सूचना का अधिकार बन सकता है गले की फांस-
दरअसल आर टी आई कार्यकर्ता धीरेन्द्र द्वारा फतेहगढ़ जिला जेल व कानपुर जिला जेल द्वारा बंदियों को उपलब्ध कराये जाने वाले खाद्यान के बाजार भाव सूचना के अधिकार के तहत मांगे थे. यह बाजार भाव जिले के विपणन निरीक्षक कार्यालय द्वारा उपलब्ध कराए जाते हैं| कानपुर और फर्रुखाबाद दोनों जेलों से प्राप्त सूचनाओं में खाद्यान के बाजार भाव में काफी अंतर पाया गया| अगर सही से जाँच हो जाये तो ये रकम करोडो तक पहुच सकती है|
घोटाले की शुरुआत विपणन विभाग से-
दरअसल विपणन निरीक्षक कार्यालय फर्रुखाबाद से जेल विभाग के कर्मचारियों द्वारा मिलीभगत कर खादान्य के बाजार भाव अपने मुताबिक रजिस्टर में भरवाए . इसी रजिस्टर में अंकित बाजार भाव के हिसाब से सरकार खरीदे गए खाद्यान का भुगतान करती है|
खाद्य विपणन विभाग के बड़े बड़े है शामिल इस खेल में-
यह खेल अभी से नहीं काफी लम्बे समय से खेला जा रहा है| आरटीआई के तहत जिला खाद्य विपणन अधिकारी फर्रुखाबाद से भी फतेहगढ़ जिला जेल को उपलब्ध कराए गए बाजार भाव से संभंधित कुछ सूचना मांगी गई थी लेकिन उनके द्वारा आर टी आई कार्यकर्ता को इसकी सुचना उपलब्ध नहीं कराई गई जिसकी अपील राज्य सूचना आयोग में लंबित है| इस पूरे प्रकरण में जिला खाद्य विपणन अधिकारी फर्रुखाबाद की भी सहमती है, उन्हें डर है की अगर वे खाद्यान से सम्बन्धित सूचना देगे तो उनके कार्यालय के कई अफसर व कर्मचारियों पर इस अनियमितता की गाज गिर सकती है|
करोडो के खेल पर ख़ामोशी क्यूँ?
पूरे प्रकरण पर कारवाही के लिये डीएम फरूखाबाद, संभागीय खाद्य नियंत्रक कानपूर मंडल, मंडलायुक्त कानपूर मंडल, कारागार सचिव उत्तर प्रदेश शासन, खाद्यायुक्त उत्तर प्रदेश शासन, व अतिरिक्त महानिरीक्षक कारागार उत्तर प्रदेश शासन को लिखा जा चुका है लेकिन 1 महीने से ज्यादा समय व्यतीत हो जाने के बावजूद अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है|

अपहत छात्रा की FIR के लिए भटक रहा है बाप

फर्रुखाबाद: एक छात्रा को उसका प्रेमी बहला-फुसलाकर ले गया है| पुलिस इस बात की रिपोर्ट दर्ज करने के लिए उसके बाप को फ़ुटबाल की तरह इधर-उधर धकेल रही है| पीड़ित बाप जवान बेटी के गायब हो जाने के कारण वैसे ही दुखी है| पुलिस मदद करने के वजाय उसे और परेशान कर रही है|

कोतवाली फर्रुखाबाद के ग्राम धर्म नगरिया निवासी रूपराम की पुत्री मोना डीएन कालेज फतेहगढ़ में पढ़ती थी| पड़ोसी गाँव मसेनी निवासी युवक मनीष से उसके प्रेम सम्बन्ध हो गए| मोना बीते दिनों जब कालेज गई थी, वहीं से मनीष उसको बहला-फुसलाकर ले गया|

मोना के परिजनों ने रिश्तेदारी आदि स्थानों पर मनीष व मोना को तलाश किया| कोई सुराग न मिलने पर रूपराम ने रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए फतेहगढ़ कोतवाली में तहरीर दी| पुलिस ने यह कहकर रिपोर्ट दर्ज नहीं की कि तुम्हारा गाँव कोतवाली फर्रुखाबाद में लगता है| जब वह फर्रुखाबाद कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराने गया तो पुलिस ने यह कहकर रिपोर्ट नहीं लिखी कि तुम्हारी बेटी कालेज फतेहगढ़ क्षेत्र से गायब हुयी है वहीं रिपोर्ट दर्ज कराओ|

विवाहित छात्रा प्रेमी के साथ फुर्र

फर्रुखाबाद: नव विवाहित छात्रा प्रेमी के साथ फुर्र हो गई है| छात्रा कोतवाली फतेहगढ़ के मोहल्ला नगला नैन निवासी अतरसिंह पाल की पुत्री थी|

उसका ६ माह पूर्व ही जिला व कोतवाली कन्नौज के गाँव जेमा में विवाह हुआ था| वह यहाँ मायके में ही रहकर नेकपुर चौरासी स्थित सिटी डिग्री कालेज में बीए द्वितीय वर्ष में पढ़ रही थी|

अतर सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए कोतवाली में तहरीर दे दी है| उन्होंने आरोप लगाया कि नेकपुर चौरासी निवासी अशोक बाथम १२ नवम्बर को मेरी पुत्री को कालेज से ही बहला-फुसलाकर ले गया है|

फांसी पर लटक गई छात्रा

फर्रुखाबाद: दुर्गा नारायण डिग्री कालेज एमए फायनल २२ वर्ष की छात्रा रेनू कठेरिया ने फांसी लगाकर जान दे दी|

रेनू कोतवाली फतेहगढ़ के मोहल्ला सिद्धार्थ नगर नवदिया निवासी रामसिंह की पुत्री थी| सायं ३:३० बजे रेनू की माँ उर्मिला सब्जी लेने बाजार गईं थी| बीएससी में पढने वाले उसके दोनों भाई अभिषेक व राहुल टियूशन पढ़ने गए थे| उसी दौरान रेनू ने मुख्य दरवाजे के चैनल को अन्दर से बंद कर ताला लगाया, और बरामदे में टंगे पंखे में दुपट्टा बांधकर फांसी पर लटक गई|

रेनू ने फांसी लगाने के लिए कुर्सी का सहारा लिया| उर्मिला जब सब्जी लेकर घर पहुँची तो बरामदे में मृत बेटी को लटका देखकर बुरी तरह रोने लगीं| रेनू के पिता फर्रुखाबाद डाक अधीक्षक कार्यालय में सुपर वाईजर पद पर कार्यरत हैं| सूचना देने के बाबजूद पुलिस आधा घंटे बाद पहुँची| परिजाओं ने बताया कि रेनू बीते ६ माह से बुखार से पीड़ित थी, ठीक न होने के कारण उसने फांसी लगा ली| परिजन रेनू के शव का पोस्टमार्टम नहीं कराना चाहते हैं| यह बात उन्होंने पुलिस को लिखकर दे दी|

रिश्वत न मिलने पर मुंशी ने छात्र को टरकाया

फर्रुखाबाद: पुलिस विभाग में विना रुपये दिए कोई काम कराना बड़ा मुश्किल है| भय के कारण लोग पुलिस के खिलाफ शिकायत करने से डरते हैं|

फतेहगढ़ सेन्ट्रल स्कूल कक्षा ११ के छात्र मेहुम कुमार पाण्डेय ने रिश्वत माँगने वाले मुंशी की शिकायत करने का हौंसला दिखाया है| फतेहगढ़ सैनिक कालोनी निवासी सुशील कुमार के पुत्र मेहुम का पर्स गुम हो गया| वह अपने दोस्त राहुल व आशीष भदौरिया के साथ फतेहगढ़ कोतवाली में गुम हुए ५०० रुपये, एटीएम कार्ड व ड्राईवरी लायसेंस की गुमशुदगी दर्ज कराने गया| तो वहां के मुंशी आशीष तिवारी ने छात्र से हलफनामा लाने को कहा और बाद में कहा की ७० रूपये दे दो तो बिना हलफनामा के काम हो जाएगा|

रिश्वत का विरोधी होने के कारण मेहुम ने मुंशी को रुपये देने से साफ़ मना कर दिया| उसके पिता राजपूत रेजीमेंट में हवलदार हैं| छात्र ने मोबाइल फोन पर बताया कि मैंने रिश्वत माँगने वाले मुंशी की शिकायत भ्रष्टाचार विभाग के अधिकारियों से तथा पुलिस अधिकारी से कर दी है|

उप्र में कानून व्यवस्था हुई अपंग: रीता बहुगुणा

कांग्रेस नेता एवं पूर्व सांसद अमरपाल सिंह की दिनदहाड़े हत्या ने साबित कर दिया कि प्रदेश में कानून व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है।

उत्तरप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डा. रीता बहुगुणा जोशी ने जारी बयान में कहा कि कानून व्यवस्था में सुधार और भयमुक्त समाज का वादा करके सत्ता में आयी मायावती सरकार के कार्यकाल में कानून और व्यवस्था नाम की कोई चीज रह ही नहीं गयी है। हत्या, बलात्कार, अपहरण जैसे संगीन अपराधों में कई गुना इजाफ हुआ है।

सत्तारूढ़ दल के अपराधियों, माफियाओं और पुलिस की मिलीभगत से अपराध उद्योग तेजी से फल-फूल रहा है। इसका अंदाजा सहज लगाया जा सकता है कि प्रदेश भर के गुण्डे, माफिया और अपराधी अन्य दलों से पलायन करके सत्तारूढ़ दल बसपा में शामिल हो चुके हैं।

डा.जोशी ने कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था तार-तार हो चुकी है। प्रदेश की मुख्यमंत्री चूंकि गृहमंत्री भी हैं उनका खौफ पूरी तरह समाप्त हो चुका है। थानों पर बसपा कार्यकर्ताओं का कब्जा है। थाने सिर्फ धनउगाही के केन्द्र बनकर रह गये हैं। सत्तारूढ़ दल के समर्थित गुण्डे, माफिया, नेता और अपराधिक तत्व सरकारी संरक्षण में खुलेआम दिनदहाड़े हत्याओं में संलिप्त हैं।

विगत वर्षों में हुईं तमाम बड़ी घटनाओं के बाद मुख्यमंत्री (जो कि गृहमंत्री भी हैं) एक बार भी संवेदना प्रकट करने मृतकों के परिजनों के घर नहीं पहुंची हैं। थानों का इस्तेमाल सिर्फ अपने विरोधी दलों के नेताओं को कुचलने के लिए प्रयोग किया जा रहा है। प्रदेश सरकार कानून व्यवस्था बनाये रखने में पूरी तरह अक्षम साबित हुई है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि अभी कुछ दिन पूर्व प्रदेश की राजधानी लखनऊ में दिनदहाड़े हुई स्व. डा.विनोद आर्या की हत्या हो, परिवार कल्याण के महानिदेशक डा.बच्ची लाल व स्वास्थ्य विभाग के रिटायर अतिरिक्त निदेशक डा. आरएस शर्मा की हत्या हो, बहराइच में जू.इंजीनियर पर जानलेवा हमला हो, इन सभी घटनाओं में पुलिस अभी तक कोई सुराग नहीं लगा पायी है।

सच्चाई तो यह है कि दिल दहलाने वाली इन हत्याओं के पीछे सत्ता समर्थित लोगों का ही हाथ है इसलिए पुलिस कोई भी कदम नहीं उठा पा रही है। ताजा उदाहरण के रूप में कानूनगो स्व.राम कुमार यादव की हत्या में नामजद इसौली के विधायक चन्द्रभद्र सिंह उर्फ सोनू सिंह को प्रदेश सरकार द्वारा क्लीन चिट दे दी गयी।

उन्होने कहा कि सबसे बड़ा दुःखद पहलू तो यह है कि प्रदेश की मुख्यमंत्री सुश्री मायावती जहां एक ओर अपने भाषणों में बेहतर कानून व्यवस्था की दुहाई देती हैं वहीं उन्हीं के पार्टी के विधायक और कार्यकर्ता प्रदेश में जघन्य अपराधों को अंजाम दे रहे हैं और प्रदेश सरकार मौन साधे हुई है।

पूर्व सांसद अमरपाल सिंह की मेरठ में दिनदहाड़े गोली मारकर की गयी हत्या से स्पष्ट हो गया है कि प्रदेश में संकट का दौर चल रहा है। आम जनता खुद को असुरक्षित महसूस कर रही है। लोगों का जीवन असुरक्षित हो गया है। ऐसी निकम्मी सरकार को सत्ता में एक पल भी बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं है।

डा.जोशी ने मांग की है कि कांग्रेस नेता एवं पूर्व सांसद स्व.अमरपाल सिंह के हत्यारों को अविलम्ब गिरफ्तार किया जाय।

यह क्या किया राखी? शादीशुदा महिला की दुबारा शादी…

मुजफ्फरपुर|| राखी की कचहरी में हस हफ्ते फरियाद लेकर पहुंची शादीशुदा सुनीता सिंह की शो के दौरान एक अन्य पुरुष से शादी करवा दी गई।

दरअसल शो में आया पुरुष देव भारद्वाज सुनीता सिंह को अपनी पत्नी बता रहा था जबकी सुनीता का कहना था कि वह पहले से ही शादीशुदा है और उसके पति का नाम नरेंद्र कुमार सिंह है। लेकिन शो के अंत में जो हुआ वह हैरान कर देने वाला था। राखी ने सुनीता को देव के साथ शादी करने के लिए तैयार कर लिया और शो में ही उनकी शादी करवा दी।

गौरतलब है कि राखी का यह शो पहले भी भी खबरों की सुर्खियों में रह चुका है। कुछ दिन पहले ही इस शो में इंसाफ मांगने आए झांसी के युवक ने फैसला हक में न होने के कारण फांसी लगा ले थी। अब राखी की कचहरी नए विवाद में फंस गई है। सुनीता के पति होने का दावा करने वाले मुजफ्फरपुर के नरेंद्र ने कहा है कि पैसे देकर उसकी बीवी को शो में बुलाया गया और बाद में नाटकीय स्क्रिप्ट पर एक्टिंग करवा कर उसकी शादी करवा दी गई।

नरेंद्र ने बताया कि उसकी पत्नी सुनीता ने उसे पहले ही बता दिया था कि उसे इमेजिन टीवी के शो राखी का इंसाफ से एक ऑफर आया है और इसके लिए उसे एक लाख रुपए मिलेंगे।

नरेंद्र ने कहा कि शो में जो कुछ भी हुआ उसे वह नखुश है और शो को बंद करवाने के लिए वह अदालत का दरवाजा खटखटाएगा।

दूसरी ओर जब सुनीता सिंह से मीडिया ने बात की तो उसने बताया की वह एक कलाकार है और शो में यह नाटक करने के लिए उसे पैसे दिए गए थे। हालांकि सुनीता ने नरेंद्र को अपना पति मानने से इंकार कर दिया है और उसे अपना दोस्त बताया है।