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आया सावन झूम के…..

सावन का महीना यानी शिव का महीना, कांवरियो का महीना, झूलों का महीना, मेंहदी का महीना, श्रृंगार का महीना, लड़कियों के मायके जाने का महीना..जीं हां आज यानी 26 जुलाई से सावन महीने की शुरूआत हो गई है। आज सावन का पहला सोमवार है। वैसे धार्मिक और पुराणों की बात करें तो सावन को शिव का प्रिय महीना कहा जाता है।

सावन मास के आरंभ होते ही व्रत-उपवासों का दौर शुरू हो जाता है। सावन मास में जहाँ शिवोपासना, शिवलिंगों की पूजा की जाती है जिससे मनुष्‍य को अपार धन-वैभव की प्राप्ति होती है। इस माह में बिल्व पत्र, जल, अक्षत और बम-बम बोले का जयकारा लगाकर और शिव चालीसा, शिव आरती, शिव-पार्वती की उपासना से भी आप शिव को प्रसन्न कर सकते हैं। सावन मास के दौरान एक महीने तक आप भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना कर साल भर की पूजा का फल प्राप्त सकते हैं।

इस बार का सावन बेहद खास है। धर्म पंडितों के अनुसार इस बार सावन जिस नक्षत्र में लगा है वो नक्षत्र बेहद शुभ है। आज से 27 साल पहले ऐसा नक्षत्र देखा गया था। इस सावन की विशेषता ये भी है कि 27साल बाद इस बार का सावन सोमवार से प्रारंभ हुआ है। सावन के बारे में लोग कहते है कि भगवान शिव को ये महीना इसलिए भी बेहद पसंद क्योंकि ये ही वो माह है जिसमें शिव-पार्वती की शादी की तय हुई थी। इन दिनों की गई पूजा का फल हर मनुष्य को अवश्य ही प्राप्त होता है।

10 अँगुलियों के छापे और आंख की पुतली से पहचान होगी कलावती की

देश के लाखो कलावातिओं और कलुआ की पहचान अब दोनों हाथों की दसों अंगुलिओं और आंख की पुतली की फोटो से की जाएगी| अब भारत का कोई नागरिक बिना पहचान के नहीं रहेगा| यूआईडी ने भारत के हर नागरिक को एक अलग पहचान देने के लिए पूरी तैयारी कर ली है| इस पहचान पत्र का नाम होगा ”आधार”| बिना ”आधार” के कुछ सालों के बाद सरकार से मिलने वाली सुविधाओं को ले पाना काफी मुश्किल होगा| भारत पूरी दुनिया में पहला ऐसा देश होगा जहाँ इतने बड़े पैमाने पर ये ”आधार” पहचान पत्र जारी किये जायेंगे|

आधार बनाने का पहला चरण अगस्त 2010 में शुरू हो जायेगा| इसके लिए लगभग सब तैयारियां कर ली गयी है| इसके लिए देश भर से 221 कम्पनियों का नामांकन कर लिया गया है| सरकारी देख रेख में ये प्राइवेट कम्पनियां नागरिको के आधार पहचान के लिए आंकड़े जुटाने का काम करेंगी| वर्ष 2015 देश के हर नागरिक को ये पहचान पत्र उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है|

सरकार की किसी प्रकार की सहायता प्राप्त करने के लिए इस आधार का होना जरूरी हो जायेगा| भ्रस्ताचार पर अंकुश लगाने में भी इससे काफी मदद मिलेगी| बैक में खाता खोलने से लेकर सरकारी दुकान से राशन और मिटटी का तेल लेने तक, कर्ज लेने से जमीन जायदाद का बैनामा कराने तक, वोट देने से लेकर पासपोर्ट बनबाने तक में यही ”आधार” काम आएगा| आधार में नागरिक के भौतिक से लेकर अनुवांशिक रिकॉर्ड का लेखा जोखा होगा| कब पैदा हुए, कहाँ खान पढ़ाई की, कितनी शिक्षा है, कितना धन है, कितना कमाते है और कहाँ कहाँ बैंक खाते है सब रिकॉर्ड इसमें पड़ी चिप में दर्ज होगा| पूरे जीवन में कहाँ कहाँ अपराध किया, कितने मुकदमे चल रहे हैं, कितने पुरष्कार मिले आदि आदि|

13 अंको वाले इस “आधार” में वो सब कुछ होगा तो नहीं भटकना पड़ेगा आपको जाती प्रमाण पत्र बनबाने या फिर आय प्रमाण पत्र बनबाने के लिए| जमीन जायदाद का बैनामा कराने में पहचान इसी से होगी| खरीदने के लिए धन कहाँ से आया गलत जानकारी देते ही पकड़ा जायेगा| फर्जी आय प्रमाण पत्र बनबाकर वजीफा और शुल्क प्रतिपूर्ति हडपने वालों को एक बटन दबाते ही पकड़ा जा सकेगा|

गरीबो के हक़ पर डाका डालने वाले नटवरलालों के लिए किसी खुनी पंजे से कम नहीं होगा ये “आधार” तो सही हकदार को उसका हक भी दिलाएगा ये “आधार”|

और क्या क्या खूबियाँ होंगी और कैसा होगा ये आधार पढ़िये अगले अंक में—

बसपा नेता के भाई पर चाकू से हमला

फर्रुखाबाद|25july: दवंग लोगों ने बसपा नेता के भाई को चाकू मारकर घायल कर दिया.

थाना मऊदरवाजा पुलिस ने ग्राम बड़ी बरौन निवासी घायल नदीम खां मंसूरी का लोहिया अस्पताल में डाक्टरी परीक्षण कराया. जरदोजी का कार्य करने वाले नदीम ने बताया कि वह सायं घर पर था तभी पड़ोसी रिजवान खां, जाफर खां, शाहरुख खां आदि ने लाठी डंडा व् चाकू से हमला कर दिया.

सूचना मिलने पर खेत में मौजूद बड़े भाई खिल्लन खां ने बचाया. खिल्लन ने आपातकालीन कक्ष में मौजूद मंत्री प्रतिनिधि जितेन्द्र ओझा को घटना की जानकारी देते हुए बताया कि वह बसपा सेक्टर का महा सचिव है. बीते दिनों पूर्व यह लोग मेरे साथ भी मारपीट कर चुके हैं.

लोगों के समझाने पर मैंने हमलावरों को माफ़ कर दिया था. अब किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करूंगा. हमलावरों की ओर से परिवारी महताव हुसैन खिल्लन को राजीनामा करने के लिए मनाते रहे.

रोडवेज बस से जाए तो छाता भी साथ ले जाए

सावधान। बरसात के दिनों में यदि आप उत्तर प्रदेश परिवहन की बसों में यात्रा करने जा रहे हैं तो आप छाता अवश्य साथ ले जाए। अन्यथा निगम की ऊपर से टपकती खटारा बसें आपको भिंगो अवश्य देगी।

उत्तर प्रदेश परिवहन निगम यात्रियों को सुख-सुविधायें प्रदान कराने के मामले में एकदम शून्य है उसे तो यात्रियों से किराया वसूलने से ही मतलब है। निगम के द्वारा विभिन्न मार्गो पर अभी भी अनेकों ऐसी खटारा बसें चलाई जा रही है जोकि बरसात के दिनों में पानी बरसने पर टपकती है तथा अनेकों बसों में शीशे नाम मात्र के ही बचे है।

इन बसों में बैठे यात्री बस की छत से टपकने वाले पानी से तथा शीशों के अभाव में साइडों से आने वाले पानी से बचने के लिए सुरक्षित स्थान तलाशते है परंतु जब पूरी बस से ही पानी टपकने लगता है तब उनके पास भींगने के अलावा कोई चारा नहीं बचता है। बस में बैठे ऐसे एक-दो यात्री भी होते है जिनके पास छाता होता है वह बस में ही छाता लगाकर बचाव करने के प्रयास करते है।

ट्रैफिक नियमों को दिखाते ठेंगा

सड़कों पर अधिकतर वाहन यातायात नियमों को ठेंगा दिखा कर सड़कों पर बेखौफ दौड़ रहे हैं, लेकिन पुलिस प्रशासन इस पर शिकंजा कसने में नाकाम साबित हो रहा है।

ओवर लोडिंग बदस्तूर जारी

हालत यह है कि सरकारी व निजी बसों पर ओवर लोडिंग बददस्तूर जारी है। ओवर लोडिंग को लेकर इतने हादसे हो रहे हैं, लेकिन चालक व परिचालक इनसे सबक नहीं ले रहे हैं। निजी बसों में लगे प्रेशर हॉरन समस्या को और बढ़ा दे रहे हैं। ओवर लोडिड बसें इतनी तेज रफ्तार से दौड़ती हैं कि कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।

नाबालिग चला रहे वाहन

सही नहीं दोपहिया वाहनों पर दो सवारियां बिठाना अधिकृत है, लेकिन यहां तीन-तीन सवारियां बिठा कर दोपहिया वाहन दौड़ रहे हैं और वह भी बिना हैल्मेट के।

ज्यादातर दोपहिया वाहन नाबालिग बच्चे चलाते हैं। उनके पास न तो हैल्मेट होता है और न ही ड्राइविंग लाइसेंस। कई बार छुटपुट दुर्घटनाएं भी हुई, लेकिन अभिभावक अपने नाबालिग बच्चों की गलती देख उन्हें दबा देते हैं। यदि इस पर शिकंजा न कसा तो कोई भी बड़ी घटना घट सकती है।

गंगा में पानी बढ़ने से पतित पावनी हुई अपवित्र

फर्रुखाबाद: गंगा का जलस्तर 45 सेंटीमीटर और बढ़ गया। केंद्रीय जल आयोग के स्थानीय कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार शनिवार को जलस्तर 135.47 मीटर रिकार्ड किया गया। पानी बढ़ने से गंगा और शहर का गंदा नाला एक हो गया है।

गंगा में पानी कम होने के कारण पिछले कई महीनों से गंदा नाला पुरानी घटिया के घाटों के किनारे से बह रहा था। जलस्तर बढ़ने से पानी घाटों तक पहुंच गया है और नाले का पानी भी इसी में संयुक्त हो गया है।

पानी बढ़ने से गंगा पुत्रों के ठिकाने भी पानी में बह गए। कई लोग नावों से अपना सामान किनारे लाते दिखे। पश्चिमी बंधा पर पानी किनारे तक पहुंच गया है। बंधा के उस पार खेतों में बाढ़ का पानी भर गया है।

उधर, जलस्तर बढ़ने के बावजूद कोई प्रशासनिक तैयारियां होती नहीं दिखतीं। पिछले काफी समय से यहां बंधा स्टीमर खराब पड़ा है। इसकी मरम्मत भी नहीं करायी गयी है। दो अन्य नावें भी बुरी हालत में यहीं किनारे पड़ी हैं।

देर तक बैठना मतलब स्वास्थ्य से खिलबाड़

ज्यादा तर लोग ऑफिस या अन्य दफ्तरों में टेबल-कुर्सी पर एक जगह एक ही पोजीसन में बैठे हुए काम करते हैं, भले ही आपको सुहाता है, लेकिन यह आपके स्वास्थ के लिए सही नहीं है। बेहतर हो कि आप काम के बीच-बीच में छोटे ‘ब्रेक’ लें। विश्वास कीजिए, ऐसा न करने पर आप बड़े खतरे को निमंत्रण दे रहे हैं। एक अध्ययन में यह दावा किया गया है। इसकी मानें, तो बहुत देर तक एक की मुद्रा में बैठने का स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है।

जो लोग दिन का ज्यादातर समय कुर्सी पर बैठे-बैठे काम में बिताते हैं, उनके दीर्घायु लोगों के मुकाबले कम उम्र में मरने की आशंका ज्यादा होती है। भले ही वे कितना भी व्यायाम करें।

अमेरिकन कैंसर सोसाइटी के शोध में कहा गया है कि जो महिलाएं एक दिन में छह घंटे से ज्यादा का समय बैठे-बैठे बिताती हैं, उनमें उन महिलाओं की अपेक्षा जल्दी मरने की आशंका 37 फीसदी ज्यादा होती है, जो तीन घंटे से भी कम समय एक ही स्थान पर बैठी रहती हैं। पुरूषों में यह आशंका लगभग 18 फीसदी होती है।

शोध के मुताबिक घंटों बैठ कर काम करने से पैदा होने वाले शारीरिक नुकसान की इस बात से क्षतिपूर्ति नहीं होती कि बाकी समय में कितना व्यायाम किया गया। मुख्य शोधकर्ता डॉ. अल्फा पटेल ने कहा कि जो लोग अपना ज्यादातर समय बैठ कर काम करने में बिताते हैं, उन्हें थोड़े-थोड़े अंतराल में पैदल चलने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

उत्तर प्रदेश में 51921 ग्राम सभा के चुनाव की उलटी गिनती शुरू

दुनिया के सबसे बड़े लोकतान्त्रिक देश की सबसे छोटी लोकतान्त्रिक पद्धिक प्रणाली ‘ग्राम सभा’ का उत्तर प्रदेश में इस साल सितम्बर में वर्तमान कार्यकाल समाप्त हो जायेगा| नियमानुसार नयी चुनी हुई ग्राम सभाएं सितम्बर में कार्यभार ग्रहण करेंगी| इसके लिए त्रिस्तरीय चुनाव प्रणाली के तहत लगभग 12 करोड़ ग्रामीण मतदाता अपने मत का प्रयोग करेंगे|

दुनिया में भारत इस तरह का प्रयोग करने वाला पहला देश है|


त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में ग्राम पंचायत, न्याय पंचायत और जिला पंचायत का गठन होगा| इसमें निचले स्तर पर ग्राम पंचायत और उपरी स्तर पर जिला पंचायत का गठन महत्वपूर्ण होता है| ग्राम पंचायत के गठन में ग्राम सभा का प्रधान और ग्राम सभा के सदस्य जनता द्वारा चुने जायेंगे| देश की लोकतान्त्रिक प्रणाली में आम जनता द्वारा सीधे चुने गए ये प्रथम प्रतिनिधि होते है| पांच साल के कार्यकाल वाली ग्राम सभा में प्रधान और ग्राम सभा के अन्य सदस्य देश की सबसे बड़े लोक्तान्तिक सदन (लोकसभा और राज्य सभा) की तरह ही गाँव के विकास के लिए ग्राम सभा/पंचायत चलाते है| बृहत स्तर पर दुनिया में भारत इस तरह का प्रयोग करने वाला पहला देश है|

उत्तर प्रदेश में 22 जुलाई 2010 को त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन के साथ ही वर्तमान में पंचायत संभाले वर्तमान ग्राम सभाओं के प्रधानो द्वारा दुबारा पंचायत पर कब्ज़ा ज़माने और पिछले पांच साल तक उन्हें पानी पी पी कर कोसने वाले विरोधी अपनी अपनी चुनावी तलवारों में धार पैनी करने में लग गए हैं| इस चुनाव में 51921 प्रधान/सरपंच, 2622 जिला पंचायत सदस्य के लिए उत्तर प्रदेश की ग्रामीण जनता वोट करेगी| कुल 72560 मतदान केन्द्रों पर लगभग 12 करोड़ मतदाता एक बार फिर अपना पहला प्रतिनिधि चुनेगे|

बीएसएनएल की बोलती बंद

फर्रुखाबाद: जब चाहे आपके बीएसएनएल युक्त सिम वाले मोबाइल फ़ोनों की बोलती बंद हो जाती है| बरसात होते ही बेसिक फ़ोन सेवा में घर्र घर्र शुरू हो जाता है, मानो सैकड़ो मेडक बरसात में अपनी प्रेमिका को आकर्षित कर रहे हो| ब्राडबेंड और इन्टरनेट का पता नहीं कब उसका हलक सूखने लगे और आप कम्पूटर के निचले दाये हाथ के कोने में जलती बुझती दो छोटी टीवी नुमा आइटम को घंटो ताकते रहें कि अब जली की तब जली| आपकी शिकायत सुनने वाला कोई नहीं| ज्यादा से ज्यादा आप सही जगह पहुच भी गए अपना दर्द सुनाने तो एक ही बात मिलेगी- ऊपर से ख़राब है यहाँ सब ठीक है| अपना माथा पीटने के सिवाय कुछ नहीं कर सकते| शर्मा जी बोले दुनिया में फ़ोन और इन्टरनेट की चौथी पीड़ी की बात चल रही है और ये बीएसएनएल वाले हमें हातिमताई की कहानी सुना रहे है|

अर्थ कर रहा अनर्थ

अब अगर आपकी जान पहचान है तो उम्मीद करिए दो चार दिन में कोई आएगा| शिकायत करने पर लाइनमेन आता है और बड़े ही करीने से आपको समझाता है-
लाइनमेन- पहले आपसे पूछेगा क्या क्या ख़राब है| अब अगर आप ने कहा बेसिक फ़ोन काम नहीं कर रहा है तो लाइनमेन समझाएगा -आपका ब्राडबेंड चल रहा है फ़ोन तो अब कोई बेसिक से करता नहीं है| लाइनों में फाल्ट है अर्थ कर रही है चिंता मत करो जैसे ही पानी बंद होगा और जमीन सूख जाएगी फ़ोन अपने आप चालू हो जायेगा| लाइन अर्थ कर रही और लाइनमेन अनर्थ|
मान लो आपने कहा ब्राडबेंड या इन्टरनेट ख़राब है तो लाइनमेन समझाएगा- भाई लाइन तो आपकी चकाचक है देखो डायलटोन सही है, ब्राडबेंड वाले पता नहीं क्या करते रहते है अक्सर कहते है ऊपर से ख़राब है| सुननी हमें पड़ती है|

बोलती बंद रखने में फायदा दामाद का घाटा कम्पनी का

अब बीएसएनएल वाले तो ठहरे सरकारी दामाद- जिलें में जो बीएसएनएल के टावर लगें है ज्यादातर इन्ही दामादो के हैं| किसी की बीबी या उसके भाई के नाम जगह में लगा है तो किसी के अपने भाई या उसकी बीबी के नाम पर तो किसी ने सास ससुर के नाम पर लगा रखा है| अब टावर पर कब्ज़ा है तो बिजली जाने पर जरनेटर बंद रखने में जो डीजल बचेगा उसका हिस्सा किसकी जेब में जायेगा- इन्ही दामादो की जेब में- अब समझे उत्तर प्रदेश में अक्सर बीएसएनएल की बोलती क्यूँ बंद हो जाती है| और उत्तर प्रदेश में बिजली के क्या हालत है इस पर लिखने की अब जरूरत नहीं| ये मामला अब ख़बरों के दायरे से बाहर का हो गया है|

यूपी में दलित रसोइये की अनिवार्यता समाप्त

उत्तर प्रदेश में मिड डे मील बनाने के लिए नए सिरे से रसोइयों के चयन में आरक्षण व्यवस्था पर अपने कदम वापस खींच लिए हैं| प्रदेश सरकार ने पिछले आदेशो को संशोधित करते हुए शासनादेश जारी कर दिया है| अब रसोइयों के चयन में विधवा,निराश्रित और तलाकशुदा महिला को प्राथमिकता दी जाएगी| यूपी सरकार के शिक्षा सचिव जीतेन्द्र कुमार ने कार्मिक विभाग के शासनादेश संख्या 4/1/2001-कार्मिक-2- दिनांक 25-6-2002 द्वारा निर्धारित जातिगत आरंक्षण रोस्टर व्यवस्था को निरस्त करने का आदेश जारी कर दिया है|
नए शिक्षा सत्र के शुरू होते ही पूरे राज्य के विभिन्न जनपदों से सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चो द्वारा मिड डे मील के बहिष्कार की खबरे पिछले पखवाड़े से मीडिया की सुर्खियाँ बनने लगी थी| बच्चो ने दलित रसोइये के हाथो बना खाना खाने से इंकार करने के बाद कई जनपदों में शिक्षको/प्रधानो और ग्रामीणों पर जातिगत भेदभाव फैलाने के मुकदमे भी कायम हुए| मगर सरकार का जोर जबरदस्ती खाना खिलाने का ये फंदा कामयाब होते नहीं दिखा| सरकारी स्कूलों में बच्चो की उपस्थिति बढ़ने की जगह लगातार कम हो रही थी और बैठे बिठाये नया सिरदर्द शासन और प्रशासन के लिए बढ़ रहा था|
फिलहाल नए आदेश से अब कुछ राहत मिलने की उम्मीद है, रसोइयों के चयन में जातीय आरक्षण व्यवस्था की वरीयता समाप्त करने पर चिंतको ने देर आये दुरुस्त आये की संज्ञा दी है|