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केविन मैन ने गोली मारी

फर्रुखाबाद: रेलवे के केविन मैन ने गोली मरकर ग्रामीण को घायल कर दिया. घायल शिवपाल यादव को लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया. पुलिस ने केविन मैन के भाई श्री किशन को हिरासत में ले लिया है.

थाना शमसाबाद के मोहल्ला बढ़हईन टोला दाउद खां निवासी वेदराम ने बीते दिन अपना खेत जुतवाया था. इसी दौरान पड़ोसी शिवपाल की मेड़ कट गयी. शिवपाल ने आज इस बात का विरोध किया तो दोनों पक्षों में लाठी डंडा चले. हमले में श्री किशन घायल हो गया तभी वेदराम ने गोली मरकर शिवपाल को घायल कर दिया.

गिरंद ने हमलावर वेदराम व् उनके पुत्र नरेन्द्र, महेंद्र व् रामसिंह के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई है. वेदराम मंझना रेलवे स्टेशन पर केविन मैन की नौकरी करते हैं.

विवाद में किरन व दीपक टाकीज बंद

फर्रुखाबाद: कैंटीन ठेकेदार से रुपयों के लेन-देन व किराए के विवाद के कारण आज दोपहर से किरन व दीपक टाकीज के शो बंद कर दिए गए. सिनेमा देखने आये दर्शक मायूश लौट गए तथा मनोरंजन कर विभाग को भी छूना लगा.

किरन सिनेमा के मालिक योगेश भल्ला उर्फ़ जोगी ने आज सुबह दीपक सिनेमा के गेट में ताला डाल दिया. जिसको लेकर विवाद शुरू हुआ. भल्ला ने कैंटीन ठेकेदार गोवर्धन दास सिंधी से किराए के बकाया रुपये मांगे. ठेकेदार ने किराया देने से साफ़ मना कर दिया तथा कहा कि अपने बेटे राजीव के पास जमानत बतौर जमा ४ लाख रुपये दिलवाने को कहा. रुपये न मिलने से गुस्साए जोगी ने ताला बंदी करके शो भी बंद करा दिए. उनकी शिकायत पर पुलिस ने जांच-पड़ताल की.

ठेकेदार ने समाज के लोगों के साथ पुलिस के सामने अपना पक्ष रखा. ईश्वरदास शिवानी ने बताया कि जोगी ने गोवर्धन से किराए के २८ लाख रुपयों का तगादा किया तो गोवर्धन ने भी राजीव के पास जमा ४ लाख रुपये मांगे.

टाकीज के मैनेजर अवधेश शुक्ला ने दोनों सिनेमा बंद किये जाने की सूचना मनोरंजन कर विभाग को दे दी है. उन्होंने बताया कि मालिकों का विवाद आपस में सुलझ जाएगा.

वोटरों ने बड़ाई शराब की बिक्री

फर्रुखाबाद: पंचायत चुनाव के कारण शराब ठेकेदारों की चांदी है वहीं कच्ची शराब बनाने वालों के तो भाग्य ही खुल गए हैं. वह १ महीने में ही ६ माह तक की कमाई करने के लिए दिन रात शराब बनाने में जुट गए हैं.

वैसे तो पूरे जिले में पंचायत चुनाव का बुखार फ़ैल गया है. लेकिन पहले चरण वाले ब्लाक बढपुर व् कमालगंज में चुनाव प्रचार जोर पकड़ने लगा है. प्रत्याशी का प्रचार करने वाले ख़ास समर्थकों के लिए शराब की कोई कमी नहीं है. वहीं मतदाता भी शराब पीने के कारण ही नखरे दिखा रहे हैं, जिसको नशा करा दिया जाता वही प्रत्याशी का खुलकर समर्थन करने के साथ ही जीत जाने तक का आशीर्वाद देने लगता है.

आरक्षण ने इस बार उल्टा कर दिया है जो लोग आरक्षण के कारण चुनाव मैदान से बाहर हो गए हैं. उनकी शराब पीने के लिए उड़कर लगी है. अब उनको शराब पिलाकर चुनाव प्रचार करने के लिए मनाया जा रहा है जो बीते चुनाव तक स्वयं शराब पिलाते थे. जो ग्राम पंचायत अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गयी है. वहां के दलित प्रत्याशियों को सवर्णों को शराब पिलाकर खुश करना पड़ रहा है.

शराब ठेकेदारों की करीब १० % बिक्री बड़ गयी है. आंधी के दौर में नकली शराब की भी बिक्री शुरू हो गयी है. ठेकेदारों को ५० पौआ की पेटी थोक में १८८९ रुपये की मिलती है को १८०० रुपये तक में बेंचा जा रहा है, खरीदारों को तो सस्ती दारू चाहिए.

प्यार के खातिर पति को कुर्बान किया

फर्रुखाबाद: कहते हैं कि प्यार अंधा होता है और प्यार के लिए कुछ भी किया जा सकता है. ऐसा कार्य करने वाले अंजाम की भी परवाह नहीं करते हैं.

थाना शमसाबाद के ग्राम फरीदापुर निवासी खुशीराम शाक्य की पुत्री मीरा ने प्यार की खातिर अपने पति को कुर्वान कर दिया. मीरा का ६ वर्ष पूर्व थाना नवाबगंज के ग्राम नादेवीरपुर निवासी रामनरेश शाक्य के पुत्र शेरसिंह राज मिस्त्री से विवाह हुआ था. विवाह के बाद मीरा का बहनोई अजयपाल से जब मुलाक़ात हुई तो दोनों में प्यार की पींगे बड़ती गयीं.

मीरा ने प्रेमी की खातिर पति को नजरअंदाज करना शरू कर दिया. वह बीते माह से मायके में हैं. शेरसिंह 28 सितम्बर को पत्नी को बुलाने ससुराल गया तो मीरा ने उसके साथ जाने से साफ़ मना कर दिया. तभी गुस्साए शेरसिंह ने साडू अजयपाल के सम्बन्धों का खुलासा करते हुए मीरा को जलील किया. बताते हैं कि इसी विवाद में शेरसिंह को धोखे से जहर खिला दिया गया. उसके मर जाने पर परिजन घबड़ा गए, उन्होंने शेरसिंह के शव को उसके मामा ग्राम बबरापुर में आसाराम के घर छोंड गए. शेरसिंह के २ पुत्री हैं पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया.

चलबसा बेरोजगार

फर्रुखाबाद: नगर के मोहल्ला शांतिनगर निवासी नन्हेलाल के ३५ वर्षीय पुत्र सुधीर गुप्ता की आज सुबह लोहिया अस्पताल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गयी. पुलिस ने बेहोश पड़े मिले सुधीर को अज्ञात में लोहिया अस्पताल पहुंचाया था. सुधीर की माँ पुष्पा का लोहिया अस्पताल के बाहर चाय का खोखा है. बेरोजगार सुधीर बीते पखवारे से बढपुर स्थित निरंकारी भवन में रहता था उसकी पत्नी शारदा बदायुं मायके में है.

आग से झुलसी युवती की मौत

फर्रुखाबाद: कन्नौज कोतवाली गुरसहायगंज ग्राम लालपुर निवासी राजेश शंखवार की आग से झुलसी २२ वर्षीय पत्नी नीलम की आज सुबह लोहिया अस्पताल में मौत हो गयी.

नीलम १३ सितम्बर को गैस पर खाना बना रही थी. आग से बुरी तरह झुलस जाने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

खोज: बच्चों की शरारत में जींस दोषी

अगर आपके बच्चे शरारती हैं तो इसके लिए दोष जंक फूड या खराब परवरिश पर मत लगाइए। इसके लिए उनमें मौजूद कुछ खास जीन्स जिम्मेदा

र हैं। यह नतीजा निकाला है भारतीय मूल की रिसर्चर प्रोफेसर अनीता थापर।

प्रोफेसर अनीता और कार्डिफ यूनिवर्सिटी के उनके सहयोगियों ने एक स्टडी में पाया कि बच्चों में अटेंशन-डिफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (एडीएचडी) नाम की बीमारी के लिए उनके जीन्स में हुई गड़बड़ी जिम्मेदार है। इस स्टडी में यह बात सामने आई कि यह गड़बड़ी एडीएचडी से पीड़ित 16 पर्सेंट बच्चों के जीन्स की संख्या में होती है।

रिसर्चरों का मानना है कि स्टडी साबित कर देगी कि 80 फीसदी मामलों में डीएनए में हुइ गड़बड़ी को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। इसके अलावा खराब डाइट और बच्चों की परवरिश के तरीके भी इस पर असर डालते हैं। स्टडी में रिसर्चरों ने इस रोग से ग्रस्त 366 बच्चों और स्वस्थ 1047 बच्चों के डीएनए की जांचपड़ताल की। पाया गया कि इनके डीएनस के कुछ हिस्से या दोहरे थे या इनके फिर गायब थे।

अयोध्या विवाद: आख़िरी लड़ाई अब सुप्रीम कोर्ट में

नई दिल्ली: अयोध्या जमीन विवाद की ल़डाई अब सुप्रीम कोर्ट में ल़डी जाएगी। सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और हिंदू महासभा, दोनों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ विशेष बेंच के फैसले को चुनौती देने का फैसला किया है।
हिंदू महासभा ने कहा है कि वह राम जन्मभूमि को तीन हिस्सों में बांटने के फैसले को चुनौती देगी। उधर, सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील जफरयाब जिलानी ने भी कहा है कि एक तिहाई भूमि बंटवारे का फार्मूला मान्य नहीं है। हाईकोर्ट में दावा खारिज होने पर उन्होंन कहा कि वह मस्जिद का दावा नहीं छो़डने वाले हैं और सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। जिलानी ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट जो भी फैसला करेगा, वह उसे मंजूर करेंगे।
गौरतलब है कि इस ऎतिहासिक फैसले के लिए बेंच के तीनों जजों ने अलग-अलग फैसले दिए। ऎसा कम ही होता है जब किसी बेंच के सभी जजों ने अलग-अलग फैसले लिखे हों। अदालत के सामने कई अहम सवाल थे। साठ साल से चल रहे मुकदमे का फैसला आसान नहीं था। कई सवालों पर जजों की राय बंटी। काफी सवाल ऎसे थे जिन पर आम राय भी दिखी।
ये सवाल यहां दिए जा रहे हैं-
सवाल नंबर 1- क्या यहां मस्जिद थी!
जस्टिस एसयू खान- हां!
जस्टिस सुधीर अग्रवाल- हां, मुसलमानों ने हमेशा इसे मस्जिद माना है।
जस्टिस धर्मवीर शर्मा- नहीं, क्योंकि यह इस्लाम की परम्परा के खिलाफ बनाई गई थी।
बहुमत फैसला- हां
सवाल नं. 2- क्या विवादित भूमि राम की जन्मभूमि है!
जस्टिस एसयू खान- मस्जिद बनने के बाद हिंदुओं ने इसे राम जन्मभूमि माना।
जस्टिस सुधीर अग्रवाल- हां, हिंदुओं की यही मान्यता है।
जस्टिस धर्मवीर शर्मा- हां।
सवाल नं. 3- क्या मस्जिद बनाने के लिए मंदिर को गिराया गया था!
जस्टिस एसयू खान- नहीं, यह एक उज़ाड मंदिर के खंडहर पर बनाया गया था।
जस्टिस सुधीर अग्रवाल- हां, एक गैर-इस्लामी ढांचे यानी हिंदू मंदिर को गिराया गया था।
जस्टिस धर्मवीर शर्मा- ऑर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने साबित किया है कि एक ब़डा हिंदू धार्मिक ढांचा गिराया गया था। बहुमत राय- हां
सवाल नं. 4- क्या मूर्तियां 22-23 दिसंबर, 1949 की रात रखी गई थीं!
जस्टिस एसयू खान- हां।
जस्टिस सुधीर अग्रवाल- हां।
जस्टिस धर्मवीर- हां।
बहुमत- हां।
सवाल नं. 5- क्या यह जगह हिंदू और मुस्लिम दोनों धर्मो से जु़डी है!
जस्टिस एसयू खान- हां।
जस्टिस सुधीर अग्रवाल- हां।
जस्टिस धर्मवीर शर्मा- नहीं हिंदुओं से।
बहुमत- हां।
सवाल नं. 6: क्या राम की मूर्ति मुख्य गुंबद के नीचे रहनी चाहिए!
जस्टिस एसयू खान- हां।
जस्टिस सुधीर अग्रवाल- हां।
जस्टिस धर्मवीर शर्मा- हां।
बहुमत- हां।
सवाल नं. 7- जमीन का बंटवारा कैसे होगा!
जस्टिस एसयू खान- तीनों को एक तिहाई हिस्सा मिले। मुख्य गुंबद हिंदुओं को, सीता रसोई और राम का चबूतरा निर्मोही अख़ाडे को। जस्टिस सुधीर अग्रवाल- हां, मुख्य गुबंद हिंदुओं को, सीता की रसोई और राम चबूतरा निर्मोही अख़ाडे को।
जस्टिस धर्मवीर शर्मा- मंदिर के निर्माण में मुसलमान हस्तक्षेप न करें।
बहुमत- तीनों को एक-तिहाई हिस्सा मिले। मुख्य गुंबद हिंदुओं को, सीता की रसोई और राम का चबूतरा निर्मोही अख़ाडे को मिले।

क्या है निर्मोही अखाड़ा ?

अयोध्या विवाद का मुख्य वादी निर्मोही अखाड़ा एक हिन्दू धार्मिक समिति है, जिसकी अपनी आस्था और रीतियां हैं। गुरुवार को अयोध्या विवाद पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आए फैसले में इस अखाड़े को विवादित भूमि का एक तिहाई हिस्सा आवंटित किया गया है।

निर्मोही अखाड़ा, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद द्वारा मान्यता प्राप्त 14 अखाड़ों में से एक है। इसका संबंध वैष्णव संप्रदाय से है और महंत भास्कर दास इसके अध्यक्ष हैं। इस अखाड़े ने 1959 में बाबरी मस्जिद की विवादित भूमि पर अपना मालिकाना हक जताते हुए एक मुकदमा दायर किया किया था, तभी से यह चर्चा में है।

निर्मोही अखाड़े ने फैजाबाद के उप न्यायाधीश की अदालत में याचिका दायर कर बाबरी मस्जिद के बगल में राम चबूतरा वाले स्थान पर राम मंदिर बनाने की अनुमति मांगी थी। उप न्यायाधीश ने उस समय कहा था कि दो धर्मो का विशाल ढांचा एक-दूसरे के नजदीक रहने से लोगों में वैमनष्य उत्पन्न होने का खतरा है।

अदालत द्वारा अनुमति देने से इंकार करने के बावजूद निर्मोही अखाड़ा उसी समय से उस भूमि पर अपना हक जमाने और मंदिर बनाने के प्रयास में जुटा रहा।

हरदोई का लुटेरा पुलिस शिकंजे में

फर्रुखाबाद|31july: हरदोई में बाइक लूटने वाला शातिर अपराधी तमंचे सहित पकड़ा गया.

कोतवाली फतेहगढ़ पुलिस ने थाना नवावगंज के ग्राम हुसैनपुर बांगर निवासी गया सिंह विश के बेटे सोनू को तमंचे सहित गिरफ्तार किया है. जिसके पास लाल रंग की बिना न० वाली प्लेटिना बाइक मिली है.

सोनू ने बताया की मैंने यह बाइक ८ दिन पूर्व हरदोई थाना बिलग्राम के गाँव पर्मोला इलाके में रात ८:४० बजे तमंचे की नोक पर लूटी थी. बाइक से दो लोग कन्नौज से बिलग्राम जा रहे थे.

उनके पास ४०० रुपये भी मिले थे. सोनू ने बताया की मेरे गाँव के मुकेश सिंह का बेटा नीलू लूट की वारदात में साथ था. अब पुलिस नीलू के पीछे लग गयी है.

पंचायत चुनाव से पहले मिड डे मील खातों का आडिट?

प्रशासन के हाथ में पंचायत खातों की गर्दन–
उत्तर प्रदेश के कई जनपदों में प्रधानो ने नौनिहालों को मिलने वाले निशुल्क मिड डे मील योजना की परिवर्तन लागत और खाद्यान का हिसाब वर्ष 2004 से अब तक नहीं दिया है| दो साल पहले केंद्रीय अनुरक्षण टीम द्वारा खुलासे किये जाने के बाद केंद्र ने राज्य सरकार पर हिसाब देने का शिकंजा कसा| उसके बाद उत्तर प्रदेश में प्रधानो से सैकड़ो बार ये हिसाब माँगा गया मगर आज तक प्रदेश सरकर को ये हिसाब नहीं मिला है| अब जबकि पंचायतो के चुनाव सर पर आ गए हैं प्रधानो पर शिकंजा कसने का मौका न गवांते हुए जनपद स्तर पर जिला लेखा एवं सम्परीक्षा अधिकारी (पंचायत एवं सोसाइटी) द्वारा मिड डे मील के खातों का आडिट कराया जा रहा है|

मिड डे मील के लिए जेब से रकम लगा दी प्रधानो ने

जनपद फर्रुखाबाद में ही बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय के दस्ताबेजों के अनुसार लगभग खाद्यान और परिवर्तन लागत का 4 करोड़ का माल प्रधानो के पास मिड डे मील का होना चाहिए| वर्ष 2004 से 2009 तक शिक्षा विभाग के अनुसार मोहम्दाबाद के विभिन्न प्रधानो के पास अभी परिवर्तन लागत का 88 लाख रुपया परिवर्तन लागत का है, मगर चौकाने वाली बात यह है कि अकेले मोहम्दाबाद के प्रधानो ने ही उलटे सरकार पर ही इन वर्षो ने 9 लाख रुपया निकल दिया है| प्रधानो के मुताबिक उन्होंने अपनी जेब से 9 लाख रुपये लगाकर बच्चो को मिड डे मील खिला दिया|

बेमेल है शिक्षा विभाग और प्रधानो का खाता

इतना ही नहीं इन वर्षो में जो धनराशी इस ब्लाक में प्रधानो को भेजी गयी वो भी शिक्षा विभाग से मेल नहीं खाती| मोहम्दाबाद ब्लाक के प्रधानो के अनुसार उन्हें इन वर्षो में 3.90 करोड़ की धनराशी ही दी गयी जबकि शिक्षा विभाग के आंकड़ो के मुताबिक यह धनराशी लगभग 4.02 करोड़ है|

हिसाब दोनों जगह नहीं है

सूत्रोंके अनुसार असल बात तो यह है की न तो सही हिसाब शिक्षा विभाग के पास है और न ही प्रधानो के पास| ग्राम पंचायत सचिव भी भ्रष्टाचार के हिस्से की मलाई में हिस्सा पाते रहे और पैसे का आहरण होता रहा| शिक्षा विभाग का तो ये आलम है कि इनकी तो हर साल मिड डे मील के खातों की ओपनिंग और क्लोसिंग खाता ही गड़बड़ा जाता है और उसे कई बार में चूल से चूल मिलाकर लेखा का हिसाब बैठाया जाता है|

कहीं प्रधानो को काबू में रखने के लिए ये जाल जैसा तो नहीं?

अब जबकि पंचायत के चुनाव सर पर हैं, इन खातो की जाँच जिला लेखा एवं सम्परीक्षा अधिकारी (पंचायत एवं सोसाइटी) को सौपी जा रही है| अगर फस गए तो प्रधानो को चलते चलते ही सही कुछ दंड मिलने की सम्भावना बनती नजर आती है| लगभग 90 प्रतिशत प्रधानो के पास खाद्यान और परिवर्तन लागत के खर्च का कोई हिसाब नहीं है| जल्दबाजी में ये लेखा जोखा बैठाये गए है| जाहिर है ऐसी सथियों में ज्यादातर प्रधान मिड डे मील के खाद्यान और परिवर्तन लागत हडपने के घोटाले में फसेंगे| जन फसेंगे तो कारवाही भी होगी या फिर फसे हुए प्रधान सत्ता की बोली बोलने के लिए प्रशासन द्वारा मजबूर किये जायेंगे ये संदेहस्पद भाविश्यकालिक प्रश्न है|उत्तर प्रदेश में जैसा कि पहले भी सत्तादल प्रशासन के दिमाग का उपयोग अपने राजनैतिक नफा नुकसान के लिए करता रहा है उसी की तयारी के लिए ये कामयाब जाल भी हो सकता है|

इस मामले में कोई भी प्रशासनिक अफसर अपना मुह खोलने को तैयार नहीं है|

इस खबर पर आपकी क्या राय है जरूर लिखें-

कप्तान के हडकाते ही खाकी हरकत में

फर्रुखाबाद31july: पुलिस कप्तान का इतना जलजला रहता है. की आँखे तरेरते ही सीधे मुंह बात न करने वाले पुलिस कर्मी भीगी बिल्ली बन जाते है. यही नजारा आज फर्रुखाबाद कोतवाली में सुवह देखने को मिला. ट्रेक्टर व अनेकों मजदूरों को लगाकर कोतवाली की गन्दगी साफ़ होने लगी.

कई माह से कोतवाली प्रांगढ़ में बरगद का टूटा पेंड पड़ा था. बीती रात कोतवाली पहुंचे पुलिस कप्तान अखिलेश कुमार ने गन्दगी देखकर नाराजगी जाहिर की उन्होंने आवासों का भी निरिक्षण किया.

जब उन्हें पता चला कि कई बर्षों से हरदोई में तैनात शिव कुमार शर्मा व जालौन में तैनात वीके यादव ने आवास खाली नहीं किया है तो वह चकित रह गए. कार्यालय में हेड मोहर्रिर रामप्रताप सिंह बनियान पहने बैठे थे.

पूछने पर उन्होंने बताया बहुत गर्मी है. कार्यालय का अपटूडेट साफ़ सुथरा रिकार्ड देखकर कप्तान प्रभावित हुये.