एक देश-एक चुनाव की ओर अग्रसर भारत,मौजूदा सत्र में पेश हो सकता बिल

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नई दिल्ली:राजनीतिक चर्चाओं में एक बात अक्सर कही जाती है कि भारत चुनावों का देश है। यहां हर साल किसी न किसी हिस्से में चुनाव होते ही रहते हैं। लेकिन अब ये बीते दिनों की बात हो जाएगी।केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एक देश-एक चुनाव से जुड़े बिल को मंजूरी दे दी है।संभावना जताई जा रही है कि संसद के शीतकालीन सत्र में इस बिल को पेश कर दिया जाएगा। लोकसभा और राज्यसभा दोनों में ही भाजपा और उसके सहयोगी दल का संख्या बल ज्यादा है।ऐसे में बिल को पास कराने में भी कोई समस्या नहीं आएगी।आखिरी बार 1967 में देश में ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ के तत्कालीन फॉर्मेट के तहत चुनाव हुए। तब उत्तर प्रदेश जिसे पहले यूनाइटेड प्रोविंस कहते थे, को छोड़कर पूरे देश में एक चरण में चुनाव हुए। यूपी में उस वक्त भी 4 चरण में चुनाव कराने पड़े थे।1967 का इलेक्शन आजादी के बाद चौथा चुनाव था। तब 520 लोकसभा सीटों और 3563 विधानसभा सीटों के लिए वोट डाले गए थे। इस वक्त तक सत्ता में केवल कांग्रेस की सरकार थी। लेकिन जवाहर लाल नेहरू की मृत्यु के बाद न सिर्फ इंदिरा गांधी को सहयोगियों के विरोध से जूझना पड़ रहा था, बल्कि कांग्रेस के खिलाफ देश में भी विरोधी लहर चलने लगी थी| करीब 6 दशक के बाद अब देश फिर से वन नेशन-वन इलेक्शन की तरफ बढ़ रहा है। 

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