बेसिक शिक्षाः खूब चहकी नकल की पाठशाला, न प्रश्नपत्र, न उत्तर पुस्तिकायें

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फर्रुखाबाद: बेसिक शिक्षा विभाग की वार्षिक परीक्षायें गुरुवार को प्रारंभ हुईं। परीक्षा क्या नकल की पाठशाला कहिये। न प्रश्नपत्र न उत्तर पुस्तिकायें बस खानापूरी की औपचारिकता पूर्ण की गयी। हद तो यह है कि प्रातः सात बजे से प्रारंभ होने वाली परीक्षा के लिये छात्र तो दूर अध्यापिकायें तक आठ बजे तक नहीं पहुंची थीं। आठ बजे के बाद पहुंची अध्यापिका ने किसी तरह मुटठी भर बच्चों को एक जगह बैठाकर परीक्षा का मजाक बनाना शुरु किया। एक विद्यालय में तो अध्यापिका ने अपने चहीते छात्रों की सहायता के लिये पड़ोस के एक निजी स्कूल से एक साल्वर छात्र तक की व्यवस्था कर रखी थी।

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शहर की सीमा से सटे प्राथमिक विद्यालय धनसुआ में अध्यापिका ने पड़ोस के एक निजी स्कूल शांति स्वरुप मेमोरियल स्कूल के एक छात्र रजत को बाकायदा बच्चों को नकल कराने के लिये बुला रखा था। जेएनआई की टीम को आया देखकर मैडम ने रजत को चलता कर दिया परंतु हमने रजत को अकेले में ले जाकर पूछा तो उसने सब उगल दिया।

जनपद में अधिकांश स्कूलों में यही स्थिति की खबर जनपद के सभी जेएनआई रिपोर्टर्स ने दी है| पूरी विस्तृत रिपोर्ट आने पर प्रकाशित की जाएगी| 8-8 बजे तक अधिकांश स्कूलों में ताले लटकते रहे| जो खुले भी उनमे नाम मात्र को बच्चे आये जिन्हें एक समूह में बैठकर खानापूर्ति परीक्षा की कर दी गयी| ज्ञात हो कि जनपद में लगभग 40 प्रतिशत बच्चो का नामांकन फर्जी है जिनका इस्तेमाल वजीफा हडपने, मिड डे मील का पैसा हजम करने और बच्चो के लिए आने वाली अन्य सुविधाओ को डकारने के लिए किया जाता है| इतना ही नहीं ये फर्जी नामांकन शिक्षको की उपलब्धता और फर्जी जरुरत तैयार करने के लिए भी किया जाता है| कम से कम परीक्षा में तो 90 प्रतिशत बच्चे होने ही चाहिए|

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