भारत के लोकतंत्र की इन्हें खबर नहीं, सांसद-विधायक किस चिड़िया का नाम

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फर्रुखाबादः स्वयं को महाराणा प्रताप के वंशज बताने वाले (लोहपीट) समाज के लगभग दो दर्जन परिवारों के किसी भी सदस्य का इस  देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था से कोई मानों कोई लेना देना ही नहीं है। उन्होंने आज तक किसी भी मतदान में वोट नहीं डाला। वह नहीं जानते कि सांसद-विधायक क्या होता है। उनको तो छत तो दूर राशन कार्ड तक की जानकारी नहीं है। कुछ लोगों द्वारा कालोनी (आवास) की लालच देकर इनको एकत्र किया व शनिवार को इन्होंने निर्वाचन कार्यालय पहुंचकर मतदाता पहचानपत्र की मांग की तो अधिकारियों ने समझा-बूझा कर चलता कर दिया।

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जमाने से बहुत पीछे चल रहे लोहा पीटा समाज के लोग न तो राजनीति में कोई जानकारी रखते हैं और न ही प्रशासन में। उनके दिमाग में तो डीएम केवल सफेद गाड़ी वाले साहब ही हैं। साहब ने कह दिया कि कालोनी मिल जायेगी तो उनके लिए यह बात पत्थर की लकीर हो गयी।

पहले भी कई बार लोहा पीटा समाज प्रशासन के झमेले में पड़कर अपनी झोपड़ियां गवां चुके  है। इसके बावजूद भी इन भोलेभाले अनपढ़ लोहा पीटा समाज के लोग उनका शोषण तो हुआ लेकिन किसी ने आज तक उनकी नहीं सुनी। राजनीति के बारे में बात करने पर उन्होंने बताया कि विधायक किस जीव जन्तु का नाम है व पहचान पत्र, राशनकार्ड क्या होता है यह उन्हें कुछ नहीं पता। लेकिन अब इन्हें आवास के चक्कर में लोगों ने फिर डाल दिया। आधुनिक तकनीक से दूर लोहे को गलाकर चिमटा, तवा बनाकर अपना पेट पालने वाले फर्रुखाबाद में दो सैकड़ा से अधिक लोहापीटा समाज आज समाज से काफी दूर तो है लेकिन अब कुछ-कुछ यह समाज की अधुनिकता से जुड़ने लगा है। झोपड़ियों के अंदर कलर टीवी, डिजिटल मोबाइल के अलावा चार पहिया वाहन भी देखे गये हैं। बैलगाड़ी पर ही अपना चलता फिरता घर रखने वाला यह समाज अब स्थायी मकान की मांग कर रहा है। फिलहाल प्रशासन की तरफ से उनको अभी चुनाव के बाद आवास उपलब्ध कराने की बात प्रशासन ने उनसे कही है। जिस पर लोहापीटा समाज पूरे भरोसे के साथ चुप्पी साधकर बैठ गया व किसी से कुछ कहने को तैयार नहीं है। फतेहगढ़ चौराहे पर तकरीबन आधा सैकड़ा लोहापीटा समाज के लोग रहते हैं।

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