दलीय प्रत्याशियों की सूची में ब्राह्मणों की उपेक्षा

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फर्रुखाबाद: विधान सभा चुनाव के मद्देनजर दलिय प्रत्याशियों की जो सूची जारी की गयी उसमे किसी भी ब्राह्मण को अभी तक टिकट नही मिला जिससे ब्राह्मणों में रोष के साथ बेचैनी भी है|

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कभी ब्राह्मणों की राजनिति का गढ़ माने जाने वाले फर्रुखाबाद में इस बार किसी भी राजनैतिक दल ने अभी तक किसी भी ब्राह्मण को टिकट नही दिया है| विदित है कि वर्ष १९७७ से लेकर २००२ तक फर्रुखाबाद सदर विधान सभा सीट पर ब्रह्मदत द्विवेदी व विमल तिवारी के बीच केवल सत्ता का हस्तांतरण ही होता रहा किसी अन्य जाति के प्रत्याशी को सदर सीट के प्रतिनिधित्व का अवसर नसीब नही हुआ| यहाँ तक की ब्रह्मदत द्विवेदी की हत्या के बाद हुए उपचुनाव में भी उनकी विधवा प्रभा द्विवेदी को ही विधायक की खुर्सी मिली|

विमल हो या ब्रह्मदत द्विवेदी दोनों का ही अपने-अपने दलों में खासा दबदबा रहा| बाद में बसपा और सपा की सोशल इंजीनिरिंग फोर्मुले जहाँ प्रदेश में जातिवाद के समीकरणों की लहर चलाई इसका असर जनपद की राजनिति पर कही न कही जरूर पड़ा| स्थिति यहाँ है की इस बार अभी तक मानता प्राप्त दल से घोषित प्रत्याशियों में किसी ब्राह्मण का नाम नही है जिसको लेकर ब्राह्मणों में रोष के साथ बेचैनी भी है| वही कुछ निर्दलीय प्रत्याशी इस परिस्थिति का लाभ उठाने के मुड में है|

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