मातमी जुलूस में गूंजीं या हुसैन की सदायें

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हर वर्ष की भांति इस बार भी पैगम्बर ए इस्लाम हजरत मोहम्मद (स.अ.व.) के प्यारे नवासे हजरत इमाम हुसैन की याद में मोहर्रम यौम ए आशूरा पर विशाल जुलूस निकाला गया| जुलूस में आगे-आगे परचम ए इस्लाम, अलम ए मुबारक तथा मातमी जत्थे के साथ ही आशिकान ए हुसैन खुनी मातम भी किया गया|

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नम आंखों में किसी खास को खोने का गम और ढोल-ताशों से लगातार निकलती मातमी धुनें। इस गमगीन नजारे का मंगलवार को जो भी गवाह बना, वो इमाम हुसैन को अपने दिल में बसाकर लौटा।

शहर में मंगलवार को दोपहर दो बजे से ताजियों का जुलूस निकला चालू हो गया| मोहर्रम में सभी धर्म के लोगों को श्रद्धा है। ताजिये के नीचे से निकलकर जितनी संख्या में मुस्लिम महिलाएं अपने बच्चों को लेकर जाती हैं, उतनी ही संख्या में अन्य धर्म के लोग भी।
इस मुबारक मोके पर मोलवी साहब ने कहा की यह माह हमें सच्चाई, इंसाफ और नेक राह पर चलने वाले हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत की याद दिलाता है। यह महीना हमें सच्चाई और इंसानियत की यादें ताजा कराता है।

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