मरीज को परलोक पहुंचाने में झोलाछाप डाक्टरों की अहम भूमिका

0
107

झोलाछाप डाक्टर के इलाज से बालिका की मौत

[adrotate banner="3"]

फर्रुखाबाद (कायमगंज): बोलचाल की भाषा में ये ‘झोलाछाप डाक्टर’ कहलाते हैं। ‘झोलाछाप’ शब्द पर बहुत शोध की दरकार नहीं है। दरअसल, उनकी साइकिल-मोटरसाइकिल या उनका झोला-बैग ही क्लिनिक है; डिस्पेंसरी है; पैथोलाजिकल लैब है; आपरेशन थियेटर है, अस्पताल है और दवाखाना भी।

वे सर्जन- फीजिशियन, सब कुछ हैं। कुछ ने क्लिनिक-हास्पिटल बना साइनबोर्ड टांग रखे हैं। ये तरह-तरह के हैं। कुछ, कई तरह की डिग्रियां भी रखे हैं। रूटीन टाइप बीमारियां, जो मेडिकल स्टोर चलाने वाले द्वारा दवा देने से भी ठीक हो जाती हैं, पर तो इनका वश है लेकिन ..! हालांकि परलोक पहुंचाने के काम में अब कई नामी डाक्टरों का भी योगदान बढ़ा है।

कोतवाली कायमगंज क्षेत्र के ग्राम फरीदपुर सैंथरा निवासी पप्पू दिवाकर की 13 वर्षीय पुत्री पूजा को कई दिनो से बुखार आ रहा था। उसकी गांव के ही झोला छाप डाक्टर हरी दुवे द्वारा गलत इलाज कर इंजेक्शन लगा देने के कारण उसकी मौत हो गयी।

पप्पू दिवाकर ने बताया कि पुत्री पूजा को कई दिनों से बुखार आ रहा था। उसे गांव के ही झोला छाप डाक्टर हरी दुवे को दिखाया गया जिस पर झोला छाप डाक्टर ने उसको इंजेक्शन लगाकर दवाइयां दी। घर पहुचने पर दवा के रिएक्सन से पूजा की हालत बिगड़ने लगी व उसके शरीर में फुन्सियां पड़ने लगी।

जिसकी जानकारी झोला छाप डाक्टर को दी तो उसकी हालत देखने के बाद वह घबड़ा गया और उसने अपने हाथ खड़े कर दिए। परिजन उसे आनन फानन में नगर के सरकारी अस्पताल ले गए जहां डाक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया|

[adrotate banner="2"]