फर्रुखाबाद:(जेएनआई ब्यूरो) यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू करने और पीएलआई में भेदभाव की नीति समाप्त करने की मांग को लेकर शुक्रवार को जिलेभर के बैंक अधिकारी और कर्मचारी एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर रहे। हड़ताल के चलते बैंकों की शाखाओं में ताले लटके रहे और बैंकिंग कामकाज पूरी तरह ठप रहा। हड़ताली बैंककर्मी सुबह करीब 10 बजे पंजाब नेशनल बैंक की लालगेट शाखा पर एकत्र हुए और धरना-प्रदर्शन कर अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की। हड़ताल में स्टेट बैंक समेत राष्ट्रीयकृत बैंक, ग्रामीण बैंक और सहकारी बैंकों के अधिकारी-कर्मचारी शामिल रहे। जिले की करीब 300 बैंक शाखाओं में हड़ताल का
व्यापक असर दिखाई दिया। बैंक शाखाएं बंद रहने से करोड़ों रुपये का बैंकिंग लेनदेन प्रभावित होने के साथ ही चेक क्लीयरिंग का काम भी पूरी तरह ठप रहा।बैंककर्मी संगठनों ने कहा कि उनकी प्रमुख मांग माह के सभी शनिवारों को बैंक अवकाश घोषित करने की है। वर्तमान में दूसरे और चौथे शनिवार को ही बैंक बंद रहते हैं। उनका कहना है कि बैंक यूनियनों और बैंक प्रबंधन के बीच माह के सभी शनिवारों को अवकाश दिए जाने को लेकर लिखित समझौता हो चुका है, लेकिन करीब दो वर्षों से सरकार स्तर पर इसे लागू नहीं किया गया है। कर्मचारियों ने कहा कि समझौते को लागू करना सामूहिक सौदेबाजी और श्रम कानून की भावना के अनुरूप है।धरने को संबोधित करते हुए आश्रय अवस्थी ने कहा कि पांच दिवसीय कार्य सप्ताह की मांग पूरी तरह न्यायसंगत है। उन्होंने कहा कि अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस और जापान सहित अधिकांश विकसित देशों में बैंक सोमवार से शुक्रवार तक ही काम करते हैं। भारत में भी आरबीआई, बीमा कंपनियों और कई सरकारी कार्यालयों में पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू है। ऐसे में बैंक कर्मचारियों से छह दिन काम लिया जाना असमानता को दर्शाता है। (उत्तर प्रदेश) इटावा मंडल के प्रांतीय सहायक महामंत्री राजीव कुमार ने कहा कि बैंकिंग सेवाएं बड़े पैमाने पर डिजिटल हो चुकी हैं और ग्राहकों को अनेक सेवाएं 24 घंटे उपलब्ध हैं। ऐसे में शाखाओं के कार्यदिवस कम करने से ग्राहकों को नुकसान नहीं होगा। इससे कर्मचारियों की कार्यकुशलता, मानसिक स्वास्थ्य और सेवा की गुणवत्ता में भी सुधार होगा।उन्होंने कहा कि पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह की मांग को लेकर लगातार वार्ताएं, सुलह कार्यवाहियां और समझौते होते रहे हैं। 7 दिसंबर 2023 को हुए समझौता ज्ञापन तथा 8 मार्च 2024 को हुए सेटलमेंट/जॉइंट नोट में शेष सभी शनिवारों को बैंक अवकाश घोषित किए जाने की बात दर्ज है। इसके बावजूद प्रावधान लागू न होने से बैंक कर्मचारियों में रोष है।वक्ताओं ने कहा की ओर में भी कई बार आंदोलन व हड़ताल के कार्यक्रम स्थगित किए गए। मार्च 2025 में भी वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से शीघ्र समाधान का आश्वासन मिलने के बाद हड़ताल वापस ली गई थी। इसके बावजूद मांग पूरी न होने पर कर्मचारियों को दोबारा आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।बैंक कर्मचारी नेताओं ने स्पष्ट किया कि वर्तमान हड़ताल किसी विशेष सुविधा या विशेषाधिकार की मांग नहीं है, बल्कि पूर्व में हुए समझौते को लागू कराने और कर्मचारियों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित करने के लिए है। उन्होंने सरकार से पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू करने तथा पीएलआई में भेदभाव समाप्त करने की मांग की।धरना-प्रदर्शन में आश्रय अवस्थी, राजीव कुमार, राजीव सिंह चौहान, निखिल मित्र, प्रदीप सोमवंशी, मानवेन्द्र चौहान, मयंक गुप्ता, ब्रजेश राय, धीरेन्द्र यादव और जयंत यादव सहित बड़ी संख्या में बैंक अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।
पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह की मांग को लेकर बैंककर्मियों की हड़ताल
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