गंगा खतरे के निशान से महज 5 सेमी दूर, तराई क्षेत्रों में मुसीबत की बाढ़

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फर्रुखाबाद:(जेएनआई ब्यूरो) गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर ने जिले में बाढ़ की चिंता बढ़ा दी है। शनिवार को लोहिया सेतु (पांचालघाट) पर गंगा का जलस्तर 137.05 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का निशान 137.10 मीटर है। यानी गंगा अब खतरे के निशान से महज पांच सेंटीमीटर नीचे बह रही है। सुबह आठ बजे और शाम चार बजे जलस्तर 137.05 मीटर ही दर्ज किया गया। जलस्तर बढ़ने से गंगा की तराई और निचले इलाकों में हालात लगातार मुश्किल होते जा रहे हैं। कई स्थानों पर खेतों और संपर्क मार्गों तक बाढ़ का पानी पहुंचने से ग्रामीणों की परेशानियां बढ़ गई हैं। आने वाले समय में जलस्तर बढ़ने की स्थिति में और अधिक गांवों के प्रभावित होने की आशंका है।सिंचाई विभाग की रिपोर्ट के अनुसार शनिवार को नरौरा स्केपिंग से गंगा में 1,34,584 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। वहीं खो बैराज से 2,760 क्यूसेक, हरेली बैराज से 291 क्यूसेक तथा रामनगर बैराज से 4,498 क्यूसेक, कुल 7,549 क्यूसेक पानी रामगंगा नदी में छोड़ा गया है। रामगंगा नदी भी उफान पर है। बहमस्त द्विवेदी सेतु (रामगंगा) पर जलस्तर 135.75 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का निशान 137.10 मीटर है। दोनों नदियों के जलस्तर पर प्रशासन और सिंचाई विभाग की नजर बनी हुई है। गंगा के खतरे के निशान के बेहद करीब पहुंचने से अमृतपुर, राजेपुर सहित तराई क्षेत्र के ग्रामीणों में चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों को आवागमन, पशुओं के चारे और फसलों की सुरक्षा को लेकर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन द्वारा संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई जा रही है।नोट: सिंचाई विभाग की 22 अगस्त की रिपोर्ट में दर्ज आंकड़ों के अनुसार गंगा का जलस्तर 137.05 मीटर है।

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