फर्रुखाबाद:(दीपक शुक्ला) फतेहगढ़ के विजाधरपुर निवासी युवा शिवम दुबे की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो परिस्थितियों के सामने हार मानने के बजाय अपनी राह खुद बनाने का जज्बा रखते हैं। कभी उड़ीसा में सहायक अभियंता की नौकरी करने वाले शिवम ने पारिवारिक परिस्थितियों के चलते वर्ष 2014 में नौकरी छोड़ दी थी। इसके बाद कई तरह के काम किए, लेकिन मन को वह संतुष्टि नहीं मिली जिसकी उन्हें तलाश थी। फिर एक दिन सरकारी योजना की जानकारी ने उनके सपनों को नई दिशा दी और यहीं से शुरू हुआ नौकरी से उद्यमिता तक का सफर।
मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना की जानकारी मिली तो शिवम को लगा कि शायद यही वह अवसर है, जिसका इंतजार उन्हें वर्षों से था। उन्होंने प्रशिक्षण लिया, अगरबत्ती निर्माण की बारीकियां सीखीं और अपने कारोबार का सपना जमीन पर उतारने की तैयारी शुरू कर दी। जनवरी 2026 में ऋण स्वीकृत होने के बाद मशीनें मंगाकर उत्पादन शुरू किया और धीरे-धीरे मेहनत रंग लाने लगी। आज विजाधरपुर से शुरू हुआ उनका कारोबार फर्रुखाबाद ही नहीं, बल्कि अन्य जनपदों तक पहुंच चुका है और ऑनलाइन मंचों के जरिए भी ग्राहकों तक पहुंच रहा है।शिवम की कहानी बताती है कि मंजिल पाने के लिए सिर्फ नौकरी ही रास्ता नहीं, बल्कि हुनर, साहस और सही अवसर के साथ अपना रोजगार खड़ा करना भी सफलता की मजबूत राह है। प्रशिक्षण से शुरू हुई नई राह
योजना की जानकारी मिलने के बाद शिवम दुबे प्रशिक्षण के लिए एफएफडीसी कन्नौज पहुंचे। वहां उन्होंने खुशबू, अगरबत्ती निर्माण और उससे जुड़े कारोबार की बारीकियों को समझा। प्रशिक्षण के दौरान मिली जानकारी और अपने स्तर पर किए गए अध्ययन के बाद उन्होंने अगरबत्ती निर्माण इकाई स्थापित करने के लिए योजना के तहत आवेदन किया। जनवरी 2026 में ऋण स्वीकृत होने के बाद शिवम ने कानपुर और अहमदाबाद से आवश्यक मशीनें मंगाईं और अपने कारोबार की शुरुआत की। शुरुआती दौर में कारोबार को स्थापित करना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने धैर्य और मेहनत के साथ उत्पादन एवं बाजार दोनों पर ध्यान दिया।
छोटे कदमों से बढ़ा कारोबार
धीरे-धीरे उनके कारोबार ने गति पकड़नी शुरू की। उत्पादों की गुणवत्ता और बाजार की मांग को देखते हुए उन्होंने जीएसटी पंजीकरण कराया और व्यवस्थित तरीके से कारोबार आगे बढ़ाया। इसके बाद फर्रुखाबाद समेत आसपास के अन्य जनपदों में उनके उत्पादों की बिक्री शुरू हुई।
समय के साथ शिवम ने बदलते बाजार की जरूरत को समझते हुए अपने कारोबार को ऑनलाइन बाजार से भी जोड़ा। आज उनके उत्पाद फ्लिपकार्ट, अमेजन और मीशो जैसे ऑनलाइन मंचों पर भी ग्राहकों तक पहुंच रहे हैं। यानी विजाधरपुर से शुरू हुआ यह छोटा सा प्रयास अब स्थानीय बाजार से निकलकर डिजिटल बाजार तक पहुंच चुका है।
नौकरी से ज्यादा सुकून मिला अपने कारोबार में
शिवम दुबे का कहना है कि नौकरी में एक निश्चित आय जरूर थी, लेकिन अपने काम को खड़ा करने और आगे बढ़ाने से जो आत्मसंतुष्टि मिलती है, वह अलग है। उनका प्रयास है कि कारोबार को आगे बढ़ाते हुए अधिक से अधिक लोगों को रोजगार से जोड़ा जाए।
युवा दिवस के अवसर पर शिवम दुबे की यह यात्रा इस बात का उदाहरण है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी चुनौतीपूर्ण हों, सही अवसर, प्रशिक्षण, मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ युवा अपने सपनों को हकीकत में बदल सकते हैं। आज जब बड़ी संख्या में युवा सरकारी और निजी नौकरी की तलाश में रहते हैं, ऐसे में शिवम की कहानी यह संदेश देती है कि रोजगार मांगने वाले बनने के साथ-साथ रोजगार देने वाला बनने का सपना भी देखा जा सकता है। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना उनके लिए उस पुल की तरह बनी, जिसने वर्षों से तलाश रहे आत्मनिर्भरता के रास्ते को मंजिल की ओर मोड़ दिया। युवा दिवस पर शिवम दुबे की कहानी सिर्फ एक अगरबत्ती उद्योग की कहानी नहीं, बल्कि बदलते भारत के उस युवा की कहानी है, जो नौकरी की तलाश से आगे बढ़कर अपने हाथों से अपना भविष्य गढ़ने का साहस कर रहा है।
युवा दिवस विशेष: विजाधरपुर के शिवम ने बदली राह, नौकरी से उद्यमिता तक का सफर बना युवाओं के लिए मिसाल
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