प्रमुख सचिव व कमिश्नर जीएसटी कों सौंपा ज्ञापन

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फर्रुखाबाद:(जेएनआई ब्यूरो) जीएसटी के अंतर्गत व्यापारियों को आ रही व्यावहारिक एवं कानूनी समस्याओं को लेकर जनपद के व्यापारियों ने प्रमुख सचिव (कर एवं निबंधन) कामिनी रतन सिंह चौहान तथा एबीएम कमिश्नर जीएसटी अमित बंसल को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से व्यापारियों ने जीएसटी नियमों में सुधार, माफी योजनाओं के विस्तार और विभागीय कार्यवाही में मानवीय व न्यायसंगत दृष्टिकोण अपनाने की मांग की।
व्यापारियों ने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार व्यापारियों के प्रति संवेदनशील है, ऐसे में उनकी समस्याओं पर गंभीरता से विचार किया जाना आवश्यक है। ज्ञापन में सबसे पहले जनपद फर्रुखाबाद को अधिकरण आगरा के क्षेत्राधिकार में शामिल किए जाने की चर्चा पर आपत्ति जताई गई और फर्रुखाबाद व कन्नौज जैसे जनपदों को माल एवं सेवाकर अधिकरण लखनऊ के क्षेत्राधिकार में ही शामिल रखने की मांग की गई।
कर अवधि 2017-18, 2018-19 एवं 2019-20 में आरोपित ब्याज एवं अर्थदंड पर लागू माफी योजना को कर अवधि 2023-24 तक बढ़ाने की भी मांग रखी गई। व्यापारियों का कहना है कि GSTR-2A में प्रदर्शित आईटीसी को GSTR-3B में भूलवश क्लेम न कर पाने के कारण उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है और कई मामलों में वसूली की कार्रवाई शुरू हो चुकी है। यदि 2A में प्रदर्शित आईटीसी का लाभ दे दिया जाए तो व्यापारियों को दोहरे कर से राहत मिलेगी और अनावश्यक विभागीय कार्यवाही भी रुकेगी।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि अनेक व्यापारी ऐसे हैं जिनका व्यापार 2020-21 के बाद बंद हो गया है और आय का कोई स्थायी साधन नहीं है, फिर भी उनके विरुद्ध वसूली की कार्रवाई की जा रही है, जो मानवीय दृष्टि से उचित नहीं है।
इसके अतिरिक्त, जीएसटी रिटर्न GSTR-1 एवं GSTR-3B में उसी कर अवधि में संशोधन की व्यवस्था न होने से विभागीय भ्रम व अनावश्यक नोटिस जारी होने की बात कही गई। व्यापारियों ने मांग की कि संबंधित कर अवधि में ही संशोधन का वैधानिक प्रावधान किया जाए।
व्यापारियों ने एडीशनल कमिश्नर (ग्रेड-2) अपील, इटावा को माह में एक बार जनपद स्तर पर कैंप लगाकर अपीलों की सुनवाई कराने के निर्देश देने की भी मांग की। साथ ही बिना विधिवत तामील के पोर्टल पर जारी नोटिसों एवं आदेशों को वैध मानकर एकपक्षीय आदेश पारित किए जाने पर नाराजगी जताई गई।
अंत में व्यापारियों ने आग्रह किया कि धारा-74 के अंतर्गत पारित एकपक्षीय आदेशों में, जहां अपील की समय-सीमा समाप्त हो चुकी है, वहां देरी को क्षमा करने का अवसर दिया जाए। इससे व्यापारियों को गलत रूप से लगाए गए कर, ब्याज एवं अर्थदंड से राहत मिलेगी और विभाग व व्यापारियों के बीच विश्वास व सहयोग का वातावरण तैयार होगा। फैम व्यापार मंडल जिलाध्यक्ष मनोज मिश्रा आदि रहे |

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