देवोत्थान एकादशी को लेकर खूब बिका गन्ना-सिंघाड़ा

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फर्रुखाबाद:(जेएनआई ब्यूरो) अषाढ़ माह की देवशयनी ग्यारस को क्षीर सागर में सोए पालनहार भगवान विष्णु कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी (देवोत्थानी एकादशी) को जागेंगे। इस मंगल अवसर पर घरों व मंदिरों में विराजे भगवान के श्रंगार व पूजन की तैयारियां लोगों ने पूरी कर ली हैं। इसके चलते बाजारों में गन्ना, सिंघाड़े व शकरकंद की खूब बिक्री हुई| इस दिन से मांगलिक कार्यक्रम भी शुरू हो जाएंगे। बाजारों में खरीदारी करने के लिए ग्राहकों की भीड़ उमड़ने लगी है।
सनातन धर्म में मान्यता है कि भगवान विष्णु आषाढ़ माह की देवशयनी ग्यारस से चार माह के लिए क्षीर सागर में शयन करते हैं। हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार इस दौरान विवाह आदि शुभ कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जाते हैं। भगवान का यह विश्राम कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष एकादशी को पूर्ण होता है। इस शुभ दिन के मौके पर घरों से लेकर मंदिरों तक भगवान का विशेष पूजन किया जाता है। शंख और घंटों की ध्वनि से भगवान को जगाया जाता है। इसके बाद भगवान को स्नान कराकर नए वस्त्र धारण कराए जाते हैं और उनकी पूजा की जाती है। देवोत्थानी एकादशी पर भगवान विष्णु की विशेष पूजा की जाती। इसको लेकर बाजारों में खासी रौनक देखने को मिली। भक्तों ने भोग लगाने के लिए गन्ना, सिंघाड़ा, शकरकंद, फल मिष्ठान सहित पूजन सामग्री की जमकर खरीदारी की।
10 से 20 रुपये का एक गन्ना, 40 रुपये किलो बिके सिंघाड़े
शहर की बाजार सहित कई स्थानों पर गन्ने बिक रहे हैं। पूजा के लिए पांच गन्ने की आवश्यकता होती है। एक गन्ना 20 रुपये का बिकता है। 100 रुपये के पांच गन्ने बाजार में बिक रहे हैं। इसके साथ ही 40 रुपये किलो सिंघाड़ा बिक रहा है।
दो दिन का है त्योहार
एक नवंबर शनिवार सुबह 9:11 बजे से शुरू होकर 2 नवंबर रविवार सुबह 7:31 बजे तक रहेगी।

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