मंडी में 50 किलो आलू पर 47 किलो का दाम, कानपुर रुख कर रहा किसान

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फर्रुखाबाद:(दीपक शुक्ला)एशिया की सबसे बड़ी आलू मण्डी कही जाने वाली सातनपुर मण्डी में इस समय किसानों से प्रति कुन्तल 6 किलो आलू मुफ्त में लिया जा रहा है। जिसे कोई देखने वाला नहीं है!
जनपद में सर्वाधिक कृषि आलू फसल की ही की जाती है। अधिकांश किसानों का विकास आलू की फसल पर ही टिका होता है, यदि आलू भाव ठीक ठाक मिल गये तो जनपद का किसान मालामाल और यदि भाव गिर गये तो जनपद किसान खाक होना तय माना जाता है। जनपद में इतनी बड़ी तादाद में आलू की पैदावार होने के बाद भी किसानों को अपना आलू स्वयं बेचने का अधिकार हासिल नहीं हो सका है। किसानों को अपने आलू को बेचने के लिए आढ़तियों की जरूरत पड़ती है।

मंडी में आढ़त पर किसान के आलू को ट्रैक्टर से उतारकर पैकिटों में भर दिया जाता है। जहां पर पैकिटों को 50 किलो आलू भरा जाता है, जिसके बाद इसमें भी प्रति पैकिट तीन किलो की कटौती कर 47 किलो के रुपये किसान को दिये जाते हैं। जिससे प्रति कुन्तल किसान का 6 किलोग्राम आलू मुफ्त में व्यापारियों को चला जाता है। किसानों के मुफ्त में लिये जा रहे 6 किलो आलू को लेकर कुछ किसानों में भी खासा रोष व्याप्त है।

सातनपुर मंडी में आवक कम
दरअसल जिस तरह से सातनपुर मंडी में पैकेट में 50 किलो आलू भरकर किसान को 47 किलो के दाम दिये जाते हैं| वहीं कानपुर की मंडी में किसान को पूरा दाम मिल रहा है| लिहाजा किसान अब कानपुर आलू मंडी की तरफ रुख कर रहा है|

सातनपुर आलू मंडी में ‘1351’ रुपए कुंतल तक आलू की बिक्री
2 जनवरी को सातनपुर आलू मंडी में आवक लगभग 60 गाड़ी पंहुचा, भाव में लगभग 100 रुपये की गिरावट हुई| 1201 से 1351 रुपए कुंतल में ज्यादातर बिक्री हुई| खरीददारी भी कम रही ।
आलू आढती अरविन्द राजपूत नें बताया कि आलू किसान को 50 किलो आलू की जगह 47 किलो आलू के दाम दिये जाते है| जिससे किसान कानपुर, बरेली, आगरा आदि की मंडियों की तरफ रुख कर रहा है| अध्यक्ष आलू आढ़ती एसोसिएशन सुधीर वर्मा , रिंकू , ने बताया कि किसान को लगातार जागरूक किया जा रहा है कि वह आलू को साफ करके लाये, जिससे उसे पूरा दाम मिले| मंडी में आलू की आवक भी पर्याप्त है| कानपुर की मंडी से सातनपुर की मंडी में आलू की कीमत बेहतर है| किसान गलत फहमी का शिकार है| कोल्ड मालिक खुद किसानों से 50 की जगह 53 किलो क्यों ले रहें है? जबकि कोल्ड में किसान साफ आलू लेकर जाता है| इस सम्बन्ध में एसोसिएशन किसानों को लगातार जागरूक कर रही है|



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